Geopolitics
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शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा: भारत के साथ शक्सगाम वैली विवाद के बीच चीन का बड़ा कदम
Moneycontrol Hindi
January 20, 2026•2 days ago

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही पाकिस्तान की यात्रा करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। यात्रा में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC 2.0) और विवादित शक्सगाम घाटी में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर रहेगा। भारत शक्सगाम घाटी में चीन के निर्माण कार्यों का कड़ा विरोध कर रहा है, इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।
Xi Jinping: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में इसकी घोषणा की है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट और सुरक्षा विफलताओं से जूझ रहा है। भारत इस दौरे को लेकर बेहद सतर्क है क्योंकि इसमें चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के फेज- 2 (CPEC 2.0) और विवादित शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर मुख्य जोर रहने वाला है।
CPEC 2.0 से पाकिस्तान का होगा बेड़ा पार!
शहबाज शरीफ ने CPEC 2.0 को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए 'नया अध्याय' बताया है। उन्होंने बताया कि इसके तहत कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और खनन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य चीनी तकनीक के जरिए पाकिस्तान की कृषि पैदावार बढ़ाना और $1 बिलियन के व्यापार अधिशेष जनरेट करना है।
वैसे आपको बता दें कि भारत ने हमेशा CPEC का विरोध किया है। इसके पीछे की वजह ये है कि, इसका एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।
शक्सगाम घाटी विवाद पर भारत का सख्त संदेश
शी जिनपिंग की पाकिस्तान यात्रा से पहले शक्सगाम घाटी में चीनी निर्माण कार्यों को लेकर भारत और चीन के बीच तीखी बयानबाजी हुई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न हिस्सा है। 1963 में पाकिस्तान द्वारा इसे अवैध रूप से चीन को सौंपना भारत को स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने शक्सगाम घाटी में यथास्थिति बदलने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है और अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा है।'
थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भी 1963 के समझौते को 'अवैध' करार देते हुए CPEC 2.0 के तहत किसी भी गतिविधि को खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान खेल रहा कूटनीतिक 'डबल गेम'
जिनपिंग की पाक यात्रा के पीछे पाकिस्तान के लिए दो बड़ी चुनौतियां है। दरअसल 2014 से अब तक पाकिस्तान में करीब 90 चीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। बीजिंग ने बार-बार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान से ठोस गारंटी मांगी है, जिसमें वो विफल रहा है। वहीं पाकिस्तान एक तरफ चीन से कर्ज और निवेश मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहा है।
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