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उमर खालिद की जमानत पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का अहम बयान: 'दोषसिद्धि से पहले यह अधिकार है'

News18 Hindi
January 18, 20264 days ago
जुर्म साबित नहीं तो जमानत मिलना आरोपी का हक लेकिन... उमर खालिद को लेकर पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने खींची रेड लाइन

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पूर्व सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा कि दोषसिद्धि से पहले जमानत पाना नागरिक का अधिकार है, बशर्ते आरोपी समाज के लिए खतरा न हो या सबूतों से छेड़छाड़ न करे। उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली में देरी पर चिंता जताई और कहा कि यदि ये आधार नहीं हैं, तो जमानत मिलनी चाहिए।

Edited by : Rakesh Ranjan Kumar Agency:Local18 Last Updated:January 18, 2026, 18:58 IST DY Chandrachud News: जयपुर साहित्य महोत्सव में डी वाई चंद्रचूड़ ने उमर खालिद की जमानत पर चर्चा करते हुए कहा कि दोषसिद्धि से पहले जमानत नागरिक अधिकार है और न्यायपालिका में पारदर्शिता जरूरी है. भारतीय आपराधिक न्याय प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में देरी पर चिंता जाहिर करने के साथ ही उन्होंने कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च कानून है. जयपुर. छात्र नेता उमर खालिद की जमानत नामंजूर किए जाने की पृष्ठभूमि में देश में उदारवादी मूल्यों के खतरे में पड़ने की चिंताओं के बीच देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ ने रविवार को यहां कहा कि दोषसिद्धि से पहले जमानत प्राप्त करना एक नागरिक का अधिकार है. इसके साथ ही पूर्व सीजेआई ने हाईकोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और न्यायपालिका में आम नागरिक के भरोसे की बहाली और मजबूती के लिए नागरिक संस्थाओं से भी विशिष्ट व्यक्तियों को शामिल किए जाने का सुझाव दिया. यहां 19वें जयपुर साहित्य महोत्सव में ‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सत्र में वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी द्वारा शुरुआत में ही उमर खालिद की जमानत का मुद्दा उठाए जाने पर न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) चंद्रचूड़ ने कहा, ”दोषसिद्धि से पूर्व जमानत अधिकार का मामला है. हमारा कानून एक प्रकल्पना पर आधारित है और वह प्रकल्पना यह है कि कोई भी आरोपी व्यक्ति, अपराध सिद्ध होने तक निर्दोष है.” विभिन्न मामलों का उदाहरण देते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर आरोपी के समाज में लौट कर फिर से अपराध को अंजाम देने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या जमानत का फायदा कानून के शिकंजे से भाग निकलने के लिए किए जाने की आशंका है, तो आरोपी को जमानत देने से इंकार किया जा सकता है. उन्होंने कहा, ”यदि ये तीनों आधार नहीं हैं, तो जमानत देनी ही होगी. मुझे लगता है कि जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, वहां अदालत का कर्तव्य है कि वह मामले की गहराई से पड़ताल करे. अन्यथा हो यह रहा है कि लोग वर्षों तक जेलों में बंद रहते हैं.” भारतीय आपराधिक न्याय प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में देरी पर चिंता जाहिर करने के साथ ही उन्होंने कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च कानून है और मामले में कोई ठोस अपवाद नहीं है तथा त्वरित सुनवाई में देरी है, तो आरोपी जमानत का अधिकारी है. सत्र और जिला अदालतों द्वारा जमानत नहीं दिए जाने को न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने चिंता का विषय बताया और कहा कि प्राधिकार के प्रति अविश्वास बढ़ा है और न्यायाधीशों को यह डर सताता है कि कहीं उनकी निष्ठा पर सवाल तो नहीं उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि जमानतों के मामले उच्चतम न्यायालय तक पहुंचते हैं. About the Author Rakesh Ranjan Kumar राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें Click here to add News18 as your preferred news source on Google. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। महाराष्ट्र बीएमसी चुनाव रिजल्ट 2026 यहां देखें| Location : Jaipur,Rajasthan First Published : January 18, 2026, 18:49 IST homenation जुर्म साबित नहीं तो जमानत आरोपी का हक लेकिन... उमर खालिद पर बोले पूर्व CJI और पढ़ें

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    जमानत का अधिकार: उमर खालिद पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बयान