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UAE राष्ट्रपति की भारत यात्रा: गल्फ में बदलते समीकरणों का संकेत
News18 Hindi
January 18, 2026•4 days ago

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यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा खाड़ी क्षेत्र में बदलते समीकरणों का संकेत है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। यूएई-भारत साझेदारी व्यापार और सुरक्षा में नई दिशा देगी, जो पाकिस्तान और ईरान पर भी प्रभाव डालेगा। भारत का बढ़ता कद और यूएई की समृद्धि के लिए भारत को चुनना, खाड़ी में नए गठजोड़ का संकेत है।
Reported by :
शैलेंद्र वांगू
Written by :
Gyanendra Mishra
Agency:News18Hindi
Last Updated:January 18, 2026, 19:50 IST
UAE President India Visit : यूएई के प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा गल्फ में बदलते समीकरणों का संकेत है. यूएई-भारत साझेदारी व्यापार और सुरक्षा में नई दिशा देगी, सऊदी-पाक गठजोड़ पर असर पड़ेगा.
यूएसई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान कल भारत आ रहे हैं. यह उनकी भारत की तीसरी यात्रा है. यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब यूएई का दुश्मन सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ पींगे बढ़ा रहा है. यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब गल्फ के दो ताकतवर देश सऊदी और यूएई यमन में आपस में लड़ रहे हैं और ईरान की छाया पूरे रीजन पर मंडरा रही है. इसलिए पूरी दुनिया की नजर शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत दौरे पर होगी.
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूएई के प्रेसिडेंट का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए नए रास्ते बनाने का मौका देगा. इससे आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों को साझा किया जा सकेगा, जिन पर भारत और यूएई की सोच काफी हद तक मिलती है. लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है. यहां से निकला संदेश पूरी दुनिया पर असर डालेगा, खासकर पाकिस्तान और ईरान पर. यूएई का भारत के करीब आना, पाकिस्तान को चिढ़ाएगा,क्योंकि वो नहीं चाहता कि कोई मुस्लिम मुल्क भारत के साथ दोस्ती बढ़ाए.
सऊदी पाक की ओर क्यों गया
पिछले कुछ सालों में सऊदी ने पाकिस्तान को काफी नजरअंदाज किया था. लेकिन जिस तरह की जियोपॉलिटिक्स इस वक्त दुनिया में चल रही है, उसने सऊदी अरब को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है. ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब को ‘सुरक्षा कवच’ चाहिए. पाकिस्तान भले ही आर्थिक रूप से कंगाल हो, लेकिन उसके पास एक बड़ी फौज और परमाणु शक्ति का टैग है. इतिहास गवाह है कि सऊदी राजशाही की सुरक्षा के लिए अक्सर पाकिस्तानी फौज का इस्तेमाल होता रहा है. ईरान को काउंटर करने के लिए सऊदी अरब को पाकिस्तान जैसे बड़े सुन्नी देश को अपने साथ रखना मजबूरी है. इसीलिए हाल के दिनों में सऊदी की ‘पाक पर मेहरबानी’ बढ़ी है.
यूएई क्यों चाहता भारत से दोस्ती
सऊदी जहां इस्लामिक अलायंस की ओर लौटता दिख रहा है, वहीं यूएई ने एकदम अलग रास्ता चुना है. वह प्रोग्रेसिव पार्टनरशिप बना रहा है. यूएई के राष्ट्रपति MBZ जानते हैं कि पाकिस्तान से जुड़ने का मतलब है सिर्फ उसे कर्ज देना और अस्थिरता मोल लेना. जबकि भारत से जुड़ने का मतलब है, विशाल बाजार, तकनीक और निवेश पर रिटर्न.
यूएई, ईरान का पड़ोसी है और किसी भी युद्ध का सीधा असर दुबई की इकोनॉमी पर पड़ेगा. ऐसे में यूएई अपनी अर्थव्यवस्था को डायवर्सिफाई कर रहा है. वह अपना पैसा और व्यापार ऐसे देश में लगाना चाहता है जो स्थिर हो. भारत से बेहतर विकल्प फिलहाल कोई नहीं है.
गल्फ का असली लीडर कौन? इस सवाल पर सऊदी और यूएई आमने-सामने हैं. सऊदी अब दुबई की तरह बिजनेस हब बनना चाहता है. इस रेस में आगे रहने के लिए यूएई को भारत जैसे मजबूत साथी की जरूरत है, ताकि व्यापार और सप्लाई चेन बिना किसी रुकावट के चलती रहे.
सऊदी प्रेसिडेंट का दौरा क्यों है ‘गेमचेंजर’?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर हो रही MBZ की यह यात्रा भारत के लिए रणनीतिक जीत है. जब सऊदी का झुकाव पाक की ओर है, तब यूएई के सर्वोच्च नेता का भारत आना यह संदेश देता है कि भारत की अहमियत अब पाकिस्तान के चश्मे से नहीं देखी जाती.
ईरान-इजराइल तनाव के कारण लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में खतरा बढ़ा है. भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए यूएई से पक्की गारंटी चाहिए. यूएई भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का साझेदार है.
‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर’ जो पाकिस्तान को दरकिनार कर यूरोप जाने का रास्ता है, वह फिलहाल ठंडे बस्ते में है. इस दौरे में इसे फिर से जिंदा करने पर बात हो सकती है, जो चीन के BRI और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का जवाब होगा.
यूएई के पास पैसा है, भारत के पास बाजार. गल्फ में युद्ध के खतरे को देखते हुए यूएई अपना भारी-भरकम निवेश भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और शेयर बाजार में शिफ्ट करना चाहता है.
गल्फ में बन गए दो गुट
कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि गल्फ अब अघोषित रूप से दो विचारधारों में बंट रहा है. एक ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान हैं, जो सिक्योरिटी और इस्लामिक कल्चर पर लौट रहे हैं. तो दूसरी ओर यूएई-भारत की दोस्ती है, जो व्यापार, तकनीक, मॉडर्निटी और आर्थिक विकास पर आधारित है. भारत के लिए अच्छी बात यह है कि पीएम मोदी ने दोनों धड़ों से अच्छे रिश्ते बनाए रखे हैं. लेकिन यूएई के साथ रिश्ता अब खरीददार-बेचने वाले से आगे बढ़कर ‘भाई-भाई’ जैसा हो गया है. जब कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने शोर मचाया था, तब यूएई ने ही उसे चुप कराया था. अब जब गल्फ में ईरान को लेकर डर है, तो यूएई भारत को एक भरोसेमंद साथी के रूप में देख रहा है जो संकट के समय साथ खड़ा रहेगा.
भारत का बढ़ता कद
जब शेख मोहम्मद बिन जायद भारत की धरती पर कदम रखेंगे, तो यह केवल द्विपक्षीय संबंधों का जश्न नहीं होगा. यह इस बात का सबूत होगा कि मिडिल ईस्ट के समीकरण बदल चुके हैं. अब वहां के देश यह नहीं देखते कि “कौन मुस्लिम देश है, बल्कि यह देखते हैं कि “कौन सा देश उनके भविष्य को सुरक्षित कर सकता है. सऊदी ने अपनी सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को चुना हो सकता है, लेकिन यूएई ने अपनी समृद्धि के लिए भारत को चुना है. और लंबी दौड़ में, समृद्धि की साझेदारी ही सबसे ज्यादा टिकाऊ होती है.
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Gyanendra Mishra
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें
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Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
January 18, 2026, 19:50 IST
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