Thursday, January 22, 2026
Geopolitics
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यूरोपीय देश एकजुट: क्या ट्रंप का गुरुर टूटेगा?

Navbharat Times
January 21, 20261 day ago
फ्रांस, कनाडा, डेनमार्क, ट्रंप की हेकड़ी निकालने को यूरोपीय देशों ने मिलाए हाथ, अमेरिकी राष्ट्रपति का टूटेगा गुरुर?

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फ्रांस, कनाडा, डेनमार्क सहित यूरोपीय देशों ने ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की धमकी और टैरिफ लगाने की घोषणा का कड़ा विरोध किया है। मैक्रों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर चेतावनी दी है। यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप की विदेश नीति को कमजोर करने वाला बताया है, जिससे संभावित व्यापार युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

नूक/कोपेनहेगन: डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को छीनने की धमकियों के बीच यूरोपीय नेता खड़े होने लगे हैं। यूरोप के नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। जिसके खिलाफ ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। जिसपर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी है कि यूरोपियन कमीशन (EU) अमेरिका पर टैक्स लगाकर जवाबी कार्रवाई शुरू कर सकता है। यूरोपीय देशों के कई नेताओं भी अंतरराष्ट्रीय कानून को खत्म करने के लिए ट्रंप की आलोचना की हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर परोक्ष तौर पर निशाना साधा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक में अपने भाषण में ताकतवर नेताओं की राजनीति के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "संघर्ष सामान्य हो गया है।" उन्होंने "एक ऐसी दुनिया की ओर बदलाव की चेतावनी दी जहां कोई नियम नहीं हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून को पैरों तले रौंदा जाता है और एकमात्र नियम जो मायने रखता है वह है सबसे ताकतवर का नियम।" उन्होंने कहा कि "सामूहिक शासन के बिना, सहयोग की जगह कड़ी प्रतिस्पर्धा ले लेती है।" फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि "इसका का एकमात्र मकसद यूरोप को कमजोर करना और उसे अपने अधीन करना है।" डोनाल्ड ट्रंप पर यूरोपीय देश के नेताओं ने साधा निशाना फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के करीबी एक सूत्र ने सोमवार को एक बयान में कहा कि फ्रांस का "कई देशों के साथ" बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए मिले निमंत्रण को स्वीकार करने का कोई प्लान नहीं है। BBC के मुताबिक बयान में कहा गया है, "(बोर्ड का) चार्टर... कई बड़े सवाल खड़े करता है, खासकर संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और ढांचे के सम्मान के संबंध में, जिस पर किसी भी हालत में सवाल नहीं उठाया जा सकता।" वहीं, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि "अमेरिका इस विशाल आर्कटिक इलाके पर कब्जा करना चाहता है और ट्रंप की मांग ने एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जो "दुनिया की व्यवस्था के बारे में है।" उन्होंने पत्रकारों से कहा, "अंतर्राष्ट्रीय कानून कोई खेल नहीं है। और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो निश्चित रूप से गठबंधन टूट जाएंगे और यह बहुत बुरा होगा।" डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि "सबसे बुरा समय अभी आना बाकी हो सकता है।" संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि "हमने कभी टकराव नहीं चाहा। हमने हमेशा सहयोग चाहा है।" यूरोपीय संसद में एक बहस के दौरान डेनमार्क MEP एंडर्स विस्टिसेन ने ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। विस्टिसेन ने तीखे शब्दों में कहा, "मैं इसे उन शब्दों में कहता हूं जो शायद आप समझें, मिस्टर प्रेसिडेंट, भाड़ में जाओ।" इसके अलावा UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप के उस ऐलान का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड का साथ देने वाले आठ देशों, जिनमें नॉर्वे और ब्रिटेन भी शामिल हैं, उन देशों से आने वाले सामान पर फरवरी से 10 परसेंट इंपोर्ट टैक्स लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि UK को अमेरिका और यूरोप में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करना "गलत" है। उन्होंने ये भी कहा कि ट्रेड वॉर "किसी के भी हित में नहीं है"। लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअंतरराष्ट्रीय मामले एवं रक्षा पत्रकार | नवभारत टाइम्सस्थान: नई दिल्ली, भारतशिक्षाअंग्रेज़ी पत्रकारिता में स्नातक, पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय, कोलकाताप्रोफेशनल परिचयअभिजात शेखर आज़ाद एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 16 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वे नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय राजनीति, भू-राजनीति और रक्षा मामलों पर है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और क्राइम बीट से की, जहाँ उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, चुनावी कवरेज और रक्षा से जुड़े विषयों पर गहन रिपोर्टिंग की।विशेषज्ञता के क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय राजनीति और विदेश नीतिरक्षा एवं सैन्य मामलों का विश्लेषणभारत की रणनीतिक और कूटनीतिक भूमिकाराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनाव कवरेजविशेषज्ञों, राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू​कार्य अनुभवअभिजात शेखर आज़ाद ने कई लोकसभा चुनावों और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों सहित प्रमुख वैश्विक राजनीतिक घटनाओं को कवर किया है। उन्होंने रक्षा सहयोग, सैन्य खरीद, वैश्विक शक्ति संतुलन और सुरक्षा नीतियों से जुड़े विषयों पर विस्तृत लेख और विश्लेषण लिखे हैं। नवभारत टाइम्स से पहले वे Zee Media सहित अन्य प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने रिपोर्टिंग और संपादकीय निर्णय लेने की मजबूत नींव तैयार की।प्रमुख प्रोजेक्ट्स‘बॉर्डर-डिफेंस’ — रक्षा और रणनीतिक विषयों पर आधारित साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू सीरीज़अंतरराष्ट्रीय मामलों पर विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक लेखउपलब्धियाँरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहन विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैंप्रमुख राष्ट्रीय समाचार प्लेटफॉर्म्स पर व्यापक लेखन अनुभवनीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ संवाद पर आधारित रिपोर्टिंगदो बार मिल चुका है प्रतिष्ठित ENBA अवार्ड... और पढ़ें

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    ट्रंप की हेकड़ी: यूरोपीय देशों का एकजुट होना