Geopolitics
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ट्रंप के गाजा 'बोर्ड ऑफ पीस' में जेलेंस्की और कट्टर दुश्मन: यूक्रेन ने क्या कहा?
Hindustan
January 20, 2026•2 days ago

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ट्रंप ने गाजा शांति बोर्ड में पुतिन को आमंत्रित किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ एक ही मंच पर काम करना उनके लिए मुश्किल है, क्योंकि रूस यूक्रेन का हमलावर है। रूस ने भी निमंत्रण मिलने की पुष्टि की है। इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा में शांति और पुनर्निर्माण की देखरेख करना है, जिसके लिए ट्रंप प्रशासन देशों से एक बिलियन डॉलर की मांग कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को एक बार फिर चौंका दिया है। गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के बाद शांति और पुनर्निर्माण की देखरेख के लिए बनाए गए अपने खास 'बोर्ड ऑफ पीस' में उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी न्योता भेज दिया है। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने साफ कहा है कि पुतिन के साथ एक ही मंच पर बैठना और काम करना उनके लिए बहुत ही मुश्किल कल्पना है।
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जेलेंस्की ने क्या कहा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने पुष्टि की है कि उन्हें निमंत्रण मिला है, लेकिन उन्होंने कहा कि रूस के साथ एक ही बोर्ड में काम करना बहुत ही मुश्किल कल्पना है, क्योंकि रूस यूक्रेन पर हमलावर है और बेलारूस उसका सहयोगी। जेलेंस्की साफ-साफ शब्दों में कहा कि मेरे लिए यह कल्पना करना भी बहुत मुश्किल है कि हम और रूस, किसी भी तरह की परिषद में एक साथ कैसे काम कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनके राजनयिक इस पर विचार कर रहे हैं।
रूस को भी न्योता
गौरतलब है कि क्रेमलिन ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की कि रूस को शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यह निमंत्रण यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध के पांच साल बाद मिला है, जिसमें दोनों देशों के 15000 नागरिक और लाखों सैनिक मारे गए हैं।
एक बिलियन डॉलर की मांग
रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थायी सदस्यता के लिए ट्रंप प्रशासन ने देशों से एक बिलियन डॉलर की राशि मांग रहा है, जो गाजा पुनर्निर्माण और अन्य शांति प्रयासों में इस्तेमाल होगी। बताया गया है कि अब तक कई देशों को निमंत्रण भेजे गए हैं, जिनमें चीन, भारत, कनाडा (पीएम मार्क कार्नी), इजरायल आदि शामिल हैं।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 'शांति बोर्ड' की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं। इतना ही नहीं, सपोर्ट नहीं करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने तक की चेतावनी दे रहे हैं। गौरतलब है कि बोर्ड की अध्यक्षता खुद ट्रंप करेंगे। फिलहाल फ्रांस इसे स्वीकार करने से हिचकिचा रहा है, जबकि इजरायल में कुछ अधिकारी इसको लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।
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