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ट्रंप की गिद्ध नजर भारत के पड़ोस दीएगो गार्सिया पर: कितना खतरनाक?
News18 Hindi
January 21, 2026•1 day ago

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर के दीएगो गार्सिया द्वीप को लेकर ब्रिटेन-मॉरीशस समझौते की आलोचना की है। वे इसे कमजोरी बता रहे हैं और ग्रीनलैंड पर कब्जे के अपने तर्क से जोड़ रहे हैं। यह रणनीतिक द्वीप चीन का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत मॉरीशस का समर्थन करता है, जिससे ट्रंप के बयानों का प्रभाव पड़ सकता है।
Written by :
संतोष कुमार
Agency:News18Hindi
Last Updated:January 21, 2026, 09:50 IST
Donald Trump Eyes Diego Garcia In Indian Ocean: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर के द्वीप दीएगो गार्सिया पर अपनी गिद्ध नजर गड़ा दी है. वह ग्रीनलैंड पर कब्जे के पीछे इस द्वीप का उदाहरण दे रहे है. ब्रिटेन ने इस द्वीप को मॉरीशस को सौंपने का समझौता कर लिया है. भारत की कोशिश के बाद यह समझौता हुआ है. ट्रंप इस समझौते को ब्रिटेन की बेवकुफी बता रहे हैं. इस द्वीप पर अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है, जो चीन को काउंटर करने के लिए बेहद जरूरी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया में अपने देश का दबदबा बढ़ाने के नाम पर हर तरह की संधि और समझौते को बकवास बता रहे हैं. वह पूर्वी यूरोप में रूस को कंट्रोल करने के लिए जबर्दस्ती ग्रीन लैंड पर कब्जा चाहते हैं. वह खुलेआम कह रहे हैं कि उनकी सेना जल्द ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेगी. वह कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिकी क्षेत्र बता रहे हैं. इससे पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचने की आशंका जताई जा रही है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के पड़ोस पर भी अपनी गिद्ध नजर गड़ा दी है. उन्होंने हिंद महासागर में स्थित दीएगो गार्सिया द्वीप को लेकर बड़ी बात कही है.
दरअसल, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर ब्रिटेन की उस योजना की कड़ी आलोचना की, जिसमें वह चागोस द्वीप समूह (जिसमें दीएगो गार्सिया शामिल है) की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप रहा है. ट्रंप ने इसे पूर्ण कमजोरी और बड़ी मूर्खता करार दिया. इसके साथ ही उन्होंने इसे ग्रीनलैंड हासिल करने की अपनी मांग का एक और कारण बताया. डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट में लिखा– आश्चर्यजनक रूप से, हमारा ब्रिलियंट नाटो सहयोगी यूनाइटेड किंगडम वर्तमान में दीएगो गार्सिया द्वीप, जो एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डे का स्थान है, को मॉरीशस को बिना किसी कारण के सौंपने की योजना बना रहा है. इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन और रूस ने इस पूर्ण कमजोरी को नोटिस किया है.
उन्होंने आगे कहा कि यूके का बेहद महत्वपूर्ण भूमि सौंपना एक बड़ी मूर्खता है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के कई कारणों में से एक है, जिसके कारण ग्रीनलैंड को हासिल करना जरूरी है. डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों को सही काम करना होगा. ट्रंप ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के सामने कमजोरी दिखाने वाला बताया और दावा किया कि उनकी अगुवाई में अमेरिका अब पहले से कहीं ज्यादा सम्मानित है.
भारत नहीं लिया नाम
हालांकि, ट्रंप ने भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन भारत ने इस यूके-मॉरीशस समझौते का समर्थन किया है और मॉरीशस को क्षेत्र प्रबंधन में मदद कर रहा है. दीएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जहां 1960 के दशक से ब्रिटेन और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है. यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में अमेरिकी ऑपरेशन्स के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. 1965 में ब्रिटेन ने चागोस को ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी (बीआईओटी) बनाया और मॉरीशस से अलग कर दिया, जिसके बाद हजारों मूल निवासियों को जबरन हटाया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीन लैंड पर कब्जे की बात कह रहे हैं. फोटो-रायटर
मई 2025 में यूके और मॉरीशस के बीच समझौता हुआ. इसमें चागोस की संप्रभुता मॉरीशस को सौंप दी गई, लेकिन दीएगो गार्सिया पर 99 साल का लीज ब्रिटेन को मिला. इसके बदले ब्रिटेन मॉरीशस को सालाना करीब 13.6 करोड़ डॉलर देगा. समझौता अभी ब्रिटिश संसद में रैटिफिकेशन के चरण में है. ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल इस समझौते का समर्थन किया था, जहां विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे मॉन्यूमेंटल अचीवमेंट कहा था.
लेकिन अब ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए इसे बिना कारण की कमजोरी बताया है. ब्रिटिश सरकार ने ट्रंप की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी था. एक प्रवक्ता ने कहा कि हमने इसलिए कार्रवाई की क्योंकि अदालती फैसलों से अड्डे पर खतरा मंडरा रहा था. यह समझौता दीएगो गार्सिया पर संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश बेस को सुरक्षित रखता है. ब्रिटेन ने जोर दिया कि अमेरिका को अड्डे तक पूर्ण पहुंच बनी रहेगी.
भारत की भूमिका
भारत की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है. न्यू दिल्ली ने लंबे समय से मॉरीशस के डिकोलोनाइजेशन के प्रयासों का समर्थन किया है. भारत ने मॉरीशस को 68 करोड़ डॉलर का पैकेज दिया है, जिसमें चागोस में मरीन प्रोटेक्टेड एरिया विकसित करना, सैटेलाइट स्टेशन स्थापित करना और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शामिल हैं. भारत हिंद महासागर को अपनी प्रभाव क्षेत्र मानता है और यहां मिलिटराइजेशन का विरोध करता रहा है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ.
हालांकि, 1971 के बांग्लादेश युद्ध में अमेरिका ने अपने सातवें बेड़े को बंगाल की खाड़ी में भेजकर भारत को धमकाया था, जिसके बाद दीएगो गार्सिया को रणनीतिक हब बनाया गया. अब भारत-अमेरिका के रक्षा संबंध मजबूत हैं, लेकिन ट्रंप का यह बयान समझौते को प्रभावित कर सकता है. ट्रंप की यह टिप्पणी ग्रीनलैंड विवाद से जुड़ी है, जहां वह डेनमार्क से क्षेत्र खरीदना या हासिल करना चाहते हैं.
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संतोष कुमार
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
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Location :
All India
First Published :
January 21, 2026, 09:00 IST
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