Geopolitics
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दावोस में ट्रंप का भाषण: बोरियत से जम्हाई लेते दिखे लोग
Moneycontrol Hindi
January 21, 2026•1 day ago

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दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक लंबा भाषण दिया। उन्होंने अर्थव्यवस्था, वेनेजुएला, ग्रीनलैंड और नाटो पर बात की। भाषण के दौरान कई लोग ऊब गए, जम्हाई लेते दिखे, या हॉल से बाहर चले गए। ट्रंप ने इस बदलाव को महसूस कर भाषण समेट लिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में अपना संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल में अमेरिका की अर्थव्यवस्था में आए उछाल से लेकर वेनेजुएला पर हमले, ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा से लेकर NATO की प्रतिबद्धता तक पर अपनी बात खुलकर रखी। बड़ी बात ये है कि अपने संबोधन में उन्होंने साफ किया अमेरिका चाहे तो ग्रीनलैंड पर हमला कर के उसे कब्जा सकता है, लेकिन वो बल प्रयोग नहीं करेगा। हालांकि, ट्रंप के इतने लंबे भाषण के दौरान कुछ पल ऐसे भी आए, जब वहां मौजूद कई लोग उनकी स्पीच सुनकर ऊब गए। कोई अपना फोन चलाता दिखा, तो कुछ उठकर हॉल से बाहर ही चले गए।
CNN के मुताबिक, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भाषण एक घंटे के करीब पहुंचा, तो दावोस में मौजूद भरी हुई सभा में बैठे कई लोग ऊबते नजर आने लगे। जैसे-जैसे भाषण लंबा होता गया, दर्शकों की दिलचस्पी कम होती दिखी।
वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती के बाद वहां की व्यवस्थाओं की तारीफ पर ट्रंप की बातें सुनते हुए कई लोग अपने मोबाइल फोन देखने लगे। कुछ लोग जम्हाइयां लेते नजर आए, जबकि कुछ साफ तौर पर जागे रहने की कोशिश करते दिखे।
कई बेचैन श्रोता अपनी सीटों से उठकर सामान समेटते हुए बाहर जाने की तैयारी करते भी दिखाई दिए।
ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप ने भी माहौल में आए इस बदलाव को महसूस किया। डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान ओमार पर अपने पुराने और बार-बार दोहराए गए हमले के बीच ही उन्होंने अचानक रुख बदला और भाषण समेटने लगे।
इल्हान ओमार पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने कहा, “वह ऐसे देश से आती हैं, जो असल में एक देश ही नहीं है, और हमें अमेरिका चलाने की सलाह देती हैं।”
अपने भाषण के आखिर में ट्रंप ने कहा कि पश्चिमी देशों की समृद्धि और तरक्की सिर्फ टैक्स कटौती से नहीं आई है। उनके मुताबिक, असली वजह एक “खास संस्कृति” है, जिसने पश्चिम को आगे बढ़ाया।
ट्रंप का यह भाषण जहां उनके समर्थकों के लिए जाना-पहचाना अंदाज था, वहीं दावोस में मौजूद कई श्रोताओं के लिए यह काफी लंबा और थकाने वाला साबित हुआ।
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