Geopolitics
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डोनाल्ड ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ़ पीस' पर बड़ा बयान: 'काश इसकी ज़रूरत नहीं होती!'
BBC
January 21, 2026•1 day ago

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ़ पीस' के गठन पर कहा कि उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं होती, और संयुक्त राष्ट्र ने उनकी सुलझाई लड़ाइयों में मदद नहीं की। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए मोटी रकम चुकानी होगी। वहीं, कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारतीय मुख्यमंत्रियों की बैठकों को पैसे की बर्बादी बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'बोर्ड ऑफ़ पीस' को लेकर कहा है कि 'काश हमें इसकी ज़रूरत नहीं होती'.
ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "काश हमें ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की ज़रूरत नहीं होती. आप जानते हैं कि मैंने जितनी भी लड़ाइयाँ सुलझाईं, उनमें से किसी में भी संयुक्त राष्ट्र ने मेरी मदद नहीं की."
ग़ज़ा के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक नया 'बोर्ड ऑफ़ पीस' बनाया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ ये बोर्ड डोनाल्ड ट्रंप की ग़ज़ा शांति योजना का हिस्सा है, लेकिन बोर्ड के चार्टर में ग़ज़ा का कोई उल्लेख नहीं है.
अमेरिका दावा कर रहा है कि उसका ये 'बोर्ड ऑफ़ पीस' एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति संगठन के तौर पर काम करेगा.
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर कोई देश इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता पाना चाहता है, तो उसे मोटी रकम ख़र्च करनी पड़ेगी.
बोर्ड के गठन के शुरुआती तीन सालों के बाद भी अगर कोई देश इसमें बने रहना चाहता है, तो उसे एक अरब डॉलर यानी क़रीब नौ हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च करने पड़ेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में 8 युद्ध रुकवाए हैं. 20 जनवरी को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है.
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में चल रही वर्ल्ड इकोनॉमिल फ़ोरम की बैठक पर टिप्पणी की है.
राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “यह वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम है या इंडिया इकोनॉमिक फ़ोरम? दावोस में सात भारतीय मुख्यमंत्री एक-दूसरे से मिल रहे हैं. भारतीय कंपनियाँ भारतीय कंपनियों से मिल रही हैं, जो वे आसानी से भारत में भी कर सकते थे. असल में, दावोस जाना एक स्टेटस सिंबल या दिखावा बन गया है.”
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “यह अजीब है. भारतीय लोग, भारतीयों से मिलने के लिए दावोस जा रहे हैं. राज्य सरकारें स्विट्जरलैंड में भारतीय कंपनियों के साथ समझौते कर रही हैं, जो वे भारत में भी कर सकती थीं. दावोस में राज्यों के मुख्यमंत्री अन्य मुख्यमंत्रियों से मिल रहे हैं. यह पैसे की आपराधिक बर्बादी है."
राजीव शुक्ला का कहना है कि अगर दावोस में विदेशी कंपनियों के साथ समझौते हुए होते तो बात समझ में भी आती.
स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक चल रही है. इस बैठक में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और असम के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद जोशी, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी समेत कई अन्य प्रतिनिधि भी पहुँचे हुए हैं.
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रंप के 25% टैरिफ़ लगाने के बाद भारत ने रूस से तेल ख़रीदना बंद कर दिया है.
स्कॉट बेसेंट ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में ये बयान दिया है.
भारत रूस से काफ़ी भारी मात्रा में तेल आयात करता रहा है लेकिन अमेरिकी टैरिफ़ के बाद ऐसे कई आंकड़े आए हैं, जिसके बाद भारत के रूस से तेल आयात में काफ़ी कमी देखी गई है.
दिसंबर और जनवरी के दौरान रूस से भारतीय तेल आयात में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है.
हालाँकि पहले भारत ने बार-बार ये दलील दी है कि वो अपनी 140 करोड़ आबादी के लिए किफ़ायदी दर पर कच्चा तेल ख़रीदना चाहता है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं पर बिना ज़्यादा आर्थिक दबाव डाले उनकी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा किया जा सके.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से कहा है कि उन्होंने 10 महीने के अंदर 8 युद्ध रुकवाए हैं. उन्होंने पिछले साल मई महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का भी फिर से दावा किया है.
ट्रंप ने कहा, “भारत-पाकिस्तान जंग में 8 विमान मार गिराए गए थे. मेरा मानना है कि दोनों देश परमाणु युद्ध की तरफ बढ़ रहे थे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अमेरिका आए थे और उन्होंने कहा था कि प्रेसिडेंट ट्रंप ने एक करोड़ या उससे भी ज़्यादा लोगों की जान बचा ली.”
पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले के बाद मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष शुरू हो गया था.
तीन दिनों तक चले इस संघर्ष में दोनों पक्षों के कई लोगों की मौत भी हुई थी. उस वक़्त दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष विराम के बारे में सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ही जानकारी दी थी.
स्पेन में बार्सिलोना के पास एक ट्रेन के पटरी से उतरने से हुए हादसे में ट्रेन ड्राइवर की मौत हो गई और कम से कम 37 लोग घायल हो गए, जिनमें से पांच की हालत गंभीर है.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार शाम को रोडालिस ट्रेन एक रिटेनिंग दीवार से टकरा गई.
क्षेत्रीय फायर इंस्पेक्टर क्लॉडी गैलार्डो ने बताया कि सभी यात्रियों को ट्रेन से निकाल लिया गया है.
यह घटना तब हुई जब भारी तूफ़ान की वजह से उत्तर-पूर्वी स्पेन प्रभावित हुआ है और ख़राब मौसम के कारण स्पेन के पूर्व और उत्तर-पश्चिम के तटीय इलाक़ों में हाई अलर्ट जारी किया गया है.
कैटेलोनिया में हुए इस ट्रेन हादसे से पहले रविवार को दक्षिणी स्पेन में दो ट्रेनें आपस में टकरा गईं थीं.
यह हादसा तब हुआ जब स्पेन की राजधानी मैड्रिड से मैलगा जा रही एक हाई-स्पीड ट्रेन पटरी से उतर गई और दूसरी दिशा से आ रही ट्रेन से टकरा गई.
इस हादसे में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई. यह एक दशक से ज़्यादा समय में स्पेन के सबसे बुरे रेल हादसों में से एक था.
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