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तीस्ता नदी प्रोजेक्ट: भारत की पीठ पीछे चीन का 'छुरा घोंपने' का प्लान?

News18 Hindi
January 18, 20264 days ago
जिस 'तीस्ता' पर भारत की डील, उस पर चीनी राजदूत ने बांग्‍लादेशी NSA से की बात, पीठ पीछे छुरा घोंपने का प्‍लान!

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चीनी राजदूत ने बांग्लादेशी NSA से तीस्ता नदी परियोजना पर चर्चा की। यह भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि चीन इस परियोजना के माध्यम से भारत की 'चिकन नेक' की निगरानी कर सकता है। भारत इस परियोजना को चीन से दूर रखने की कोशिश कर रहा है।

Written by : Gyanendra Mishra Agency:News18Hindi Last Updated:January 18, 2026, 18:19 IST तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट (Teesta River Project) भारत के लिए सिर्फ वॉटर मैनेजमेंट का मुद्दा नहीं, बल्कि नेशनल सिक्‍योर‍िटी (National Security) का मामला है. चीनी राजदूत का बांग्लादेशी NSA से मिलना और प्रोजेक्ट साइट पर जाने का ऐलान भारत के लिए एक 'रेड अलर्ट' है. क्योंकि अगर तीस्ता पर ड्रैगन का कब्जा हुआ, तो यह भारत की 'लुक ईस्ट' पॉलिसी और आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिए एक बड़ा झटका होगा. ढाका. भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है. क्‍योंक‍ि ढाका में चीन के राजदूत याओ वेन ने बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) डॉ. खलीलुर रहमान से मुलाकात की. ऊपरी तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन इस बैठक के अंदर जिन मुद्दों पर बात हुई, उसने भारत के ल‍िए टेंशन बढ़ा दी है. चीनी राजदूत ने न केवल ‘तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट’ पर चर्चा की, बल्कि यह भी ऐलान कर दिया कि वे जल्द ही तीस्ता प्रोजेक्ट क्षेत्र का दौरा करेंगे. यह भारत के लिए स्टैटिकली बेहद संवेदनशील है, क्योंकि भारत लगातार यह कोशिश करता रहा है कि तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन का काम किसी भी कीमत पर चीन के हाथों में न जाए. बांग्‍लादेश एनएसए ऑफ‍िस की ओर से मीटिंग के बारे में जो जानकारी दी गई है, उसमें कहा गया क‍ि चीनी राजदूत और बांग्लादेशी NSA के बीच बातचीत सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक माहौल में हुई.दोनों पक्षों ने आपसी हितों के मुद्दों पर विचार साझा किए. सबसे महत्वपूर्ण चर्चा तीस्ता नदी परियोजना और प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन मैत्री अस्पताल पर हुई.चीनी राजदूत ने जानकारी दी कि वे तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करेंगे. चीन ने मौजूदा टेक्‍न‍िकल असेसमेंट को तेजी से पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.इसके अलावा, चीनी राजदूत ने बांग्लादेश में चल रहे लोकतांत्रिक बदलाव के लिए अपनी सरकार के समर्थन की बात कही और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं.सबसे ज्‍यादा टेंशन देने वाली बात, तीस्‍ता को लेकर है. चीनी राजदूत ने बांग्‍लादेश के एनएसए से मुलाकात की. इसमें तीस्‍ता प्रोजेक्‍ट पर भी बात हुई. तीस्ता प्रोजेक्ट: भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी? तीस्ता नदी परियोजना पर चीन की सक्रियता भारत के लिए केवल पानी के बंटवारे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर नेशनल स‍िक्‍योरिटी से जुड़ा मामला है. इसे समझने के लिए हमें नक्शे और भूगोल को देखना होगा. चिकन नेक के करीब: तीस्ता नदी का बहाव क्षेत्र भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, वह संकरा रास्ता है जो भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है. चीन की मौजूदगी का जोखिम: चीन जिस ‘तीस्ता प्रबंधन परियोजना’ पर काम करना चाहता है, उसमें नदी की गहराई बढ़ाना और जलाशय बनाना शामिल है. यह प्रोजेक्ट भारत-बांग्लादेश सीमा के पास उत्तरी बांग्लादेश में स्थित होगा. जासूसी और निगरानी का डर: भारत की चिंता यह है कि अगर यह प्रोजेक्ट चीन को मिलता है, तो चीनी इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ भारत की सीमा के बिल्कुल पास तैनात हो जाएंगे. इससे चीन को भारत के सामरिक रूप से सबसे संवेदनशील ‘चिकन नेक’ इलाके की निगरानी करने का मौका मिल जाएगा. भारत की कोश‍िश: यही वजह है कि भारत सरकार और पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश को यह प्रस्ताव दिया था कि तीस्ता के संरक्षण और कायाकल्प का काम भारत खुद करेगा, ताकि चीन को इस क्षेत्र से दूर रखा जा सके. चीन की चाल: ‘विकास’ के नाम पर घेराबंदी इस बैठक से यह स्पष्ट है कि चीन बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक अस्थिरता के दौर में भी अपने पैर पीछे खींचने वाला नहीं है. चीनी राजदूत का यह कहना कि “वे प्रोजेक्ट एरिया का दौरा करेंगे”, एक कूटनीतिक संदेश है. यह दर्शाता है कि चीन इस प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर है और वह बांग्लादेश की नई व्यवस्था के साथ भी इसे आगे बढ़ाना चाहता है. चीन ने बांग्लादेश को इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 1 अरब डॉलर का कर्ज देने का प्रस्ताव रखा था. चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे को लेकर समझौता पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों के कारण वर्षों से लटका हुआ है, चीन ने इसी ‘वैक्यूम’ का फायदा उठाने की कोशिश की है. चीन बांग्लादेश को यह समझाने में लगा है कि भारत पानी तो नहीं दे पा रहा, लेकिन चीन पानी के मैनेजमेंट में मदद कर सकता है. बांग्‍लादेश का सबसे अच्‍छा दोस्‍त दिखाने की कोश‍िश एक और संकेत बैठक में चीनी राजदूत ने आगामी राष्ट्रीय चुनावों और लोकतांत्रिक परिवर्तन का जिक्र किया. यह भारत के लिए भी एक संकेत है. शेख हसीना की सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंध अपने चरम पर थे. लेकिन अब जब बांग्लादेश ट्रांजिशन से गुजर रहा है, चीन यह जताना चाहता है कि वह बांग्लादेश के ‘विकास का साथी’ है, चाहे सरकार किसी की भी हो.चीन का यह कदम भारत के प्रभाव को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. वह बांग्लादेश की जनता को यह संदेश देना चाहता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के मामलों में बीजिंग, नई दिल्ली से ज्यादा तेज और कारगर है. About the Author Gyanendra Mishra Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें Click here to add News18 as your preferred news source on Google. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। महाराष्ट्र बीएमसी चुनाव रिजल्ट 2026 यहां देखें| Location : International First Published : January 18, 2026, 18:19 IST homeworld जिस 'तीस्ता' पर भारत की डील, उस पर चीनी राजदूत ने बांग्‍लादेशी NSA से की बात और पढ़ें

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    तीस्ता डील पर चीन का दांव: चीनी राजदूत की बांग्लादेश NSA से मुलाकात