Geopolitics
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तालिबान में दो-फाड़: हक्कानी और अखुंदजादा की लड़ाई में चीन पर मंडराया खतरा
Navbharat Times
January 20, 2026•2 days ago
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तालिबान में नेतृत्व संघर्ष तेज है, जिसमें सुप्रीम लीडर अखुंदजादा और आंतरिक मंत्री हक्कानी के गुट आमने-सामने हैं। अखुंदजादा गुट चीन को आर्थिक साझेदार मानता है, वहीं हक्कानी चीन की बढ़ती भूमिका को खतरे के रूप में देखता है। हालिया काबुल हमले का निशाना चीनी नागरिक और अखुंदजादा के सहयोगी बशीर नूरजई थे, जिसका उद्देश्य चीनी निवेश को बाधित कर अखुंदजादा के प्रभाव को कम करना है।
काबुल: अफगानिस्तान पर काबिज तालिबान में सत्ता संघर्ष चरम पर है। तालिबान के अंदर दो गुट बन गए हैं, जो एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं। इसमें एक गुट का नेतृत्व तालिबान का सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा कर रहा है। वहीं, दूसरे गुट की कमान तालिबान सरकार के आंतरिक मंत्री और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी के हाथ में है। हिबतुल्लाह कंधार से शासन चला रहा है, जबकि हक्कानी काबुल में बैठे उसके आदेशों की सीधी अवहेलना कर रहा। तालिबान के अंदर मचे इस संघर्ष का सीधा असर चीन पर पड़ता दिख रहा है। एक दिन पहले ही काबुल में चीनी रेस्टोरेंट में विस्फोट हुआ था, जिसमें कई लोग मारे गए थे।
अखुंदजादा गुट का करीबी बना चीन
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, हिबतुल्लाह अखुंदजादा का कंधार नेतृत्व चीन को एक अहम आर्थिक और कूटनीतिक पार्टनर मानता है। वहीं, सिराजुद्दीन हक्कानी का काबुल नेतृत्व चीन की बढ़ती भूमिका को अपने प्रभाव के लिए सीधा खतरा मानता है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कंधार चाहता है कि चीनी भागीदारी जारी रहे और बढ़े, खासकर माइनिंग, तेल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जो तालिबान प्रशासन को तेजी से पैसा देते हैं।
चीन के पैसों से अखुंदजादा गुट पड़ रहा भारी
पश्चिमी निवेशकों के उलट, चीनी कंपनियां अपने सौदों में मानवाधिकारों की शर्तें नहीं लगातीं और एक हद तक अंतरराष्ट्रीय वैधता देती हैं। ये ऐसे कारक हैं जो अखुंदजादा की स्थिति को देश और विदेश दोनों जगह मजबूत करते हैं। चीन के अफगानिस्तान में निवेश को लेकर बशीर नूरजई नाम के अफगान नागरिकका नाम काफी चर्चा में है। बशीर नूरजई एक ताकतवर सरदार और प्रभावशाली नूरजई कबायली नेटवर्क से अखुंदजादा के भरोसेमंद सहयोगी हैं।
काबुल धमाके में नूरजई था निशाना
2022 में अमेरिका के साथ कैदियों की अदला-बदली में रिहा होने के बाद, नूरजई कथित तौर पर काबुल में आने वाले चीनी निवेश के लिए एक प्रमुख बिचौलिए के रूप में उभरे हैं। तालिबान सूत्र उन्हें मुख्य चैनल बताते हैं जिसके ज़रिए चीनी पूंजी अफगानिस्तान में आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, एक दिन पहले काबुल में हुआ हमला मुख्य रूप से सिर्फ चीनी नागरिकों को नहीं, बल्कि नूरजई को निशाना बनाने के लिए किया गया था। उनकी भूमिका को बाधित करना कंधार के आर्थिक प्रभाव को कमजोर करने का एक तरीका माना जा रहा है।
चीनी पैसों से प्रभाव बढ़ा रहा अखुंदजादा गुट
हक्कानी नेटवर्क के नजरिए से, चीनी पैसे ने सत्ता का अंदरूनी संतुलन बिगाड़ दिया है। एक सूत्र ने कहा, "तालिबान के लिए अभी पैसा ही सब कुछ है, और चीनी फंडिंग कंधार को मजबूत बना रही है।" उनका मानना है कि बार-बार हमलों के जरिए चीनी विश्वास को कमज़ोर करने से प्रोजेक्ट्स धीमे हो सकते हैं या रुक सकते हैं, जिससे कंधार के नेताओं को सत्ता-साझेदारी और संसाधनों के बंटवारे पर बातचीत की मेज पर वापस आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
लेखक के बारे मेंप्रियेश मिश्रनवभारत टाइम्स डिजिटल में डिजिटल कंटेंट राइटर। पत्रकारिता में दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसी संस्थाओं के बाद टाइम्स इंटरनेट तक 5 साल का सफर जो इंदौर से शुरू होकर एनसीआर तक पहुंचा है पर दिल गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और गोरक्षनाथ की धरती गोरखपुर में बसता है। देश-विदेश, अंतरराष्ट्रीय राजनीति/कूटनीति और रक्षा क्षेत्र में खास रुचि। डिजिटल माध्यम के नए प्रयोगों में दिलचस्पी के साथ सीखने की सतत इच्छा।... और पढ़ें
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