Thursday, January 22, 2026
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सुजलॉन एनर्जी के शेयर: 1 साल के निचले स्तर के करीब, जानिए आगे क्या करें

Moneycontrol Hindi
January 20, 20262 days ago
Suzlon Energy टूटकर आया एक साल के निचले स्तर के करीब, अब होगी रिकवरी या फटाफट बेच दें शेयर?

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सुजलॉन एनर्जी के शेयर तीन दिनों में करीब 3% गिरकर एक साल के निचले स्तर के करीब आ गए हैं। घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने इसे निवेश का अवसर बताते हुए ₹74 का लक्ष्य दिया है। फर्म का मानना है कि डेटा सेंटर, C&I और पीएसयू की मांग से विंड एनर्जी की मांग बढ़ेगी, जिससे कंपनी को फायदा होगा।

Suzlon Energy Share Price: विंड टर्बाइन कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में आज लगातार तीसरे दिन बिकवाली का भारी दबाव दिखा। इन तीन दिनों में यह करीब 3% टूट गया और यह टूटकर एक साल के निचले स्तर के काफी करीब आ गया। हालांकि घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के दिए टारगेट के हिसाब से इस गिरावट को निवेश के मौके के तौर पर देखना चाहिए। मौजूदा लेवल से यह 56% से अधिक ऊपर चढ़ सकता है। फिलहाल बीएसई पर यह 1.48% की गिरावट के साथ ₹47.27 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.73% फिसलकर ₹47.15 तक आ गया था और इसका एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर ₹46.00 है जो इसने पिछले साल 7 अप्रैल 2025 को छुआ था। इस निचले स्तर से दो महीने से भी कम समय में यह 61.52% उछलकर 30 मई 2025 को एक साल के हाई ₹74.30 पर पहुंच गया था। Suzlon Energy के शेयरों का क्या है टारगेट प्राइस? घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी के शेयरों का जो टारगेट प्राइस फिक्स किया है, वह इसके एक साल के हाई से भी अधिक है। मोतीलाल ओसवाल ने इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है और टारगेट प्राइस ₹74 के लेवल पर फिक्स किया है। ओवरऑल बात करें तो इसे कवर करने वाले नौ में किसी भी एनालिस्ट्स ने इसे खरीदारी की रेटिंग नहीं दी है और सभी ने इसे खरीदारी की सलाह दी है। मोतीलाल ओसवाल क्यों है सुजलॉन एनर्जी पर बुलिश? घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक रिन्यूएबल सेगमेंट में विंड टेंडर्स की कम हिस्सेदारी, विंड इंस्टॉलेशन की सुस्ती, और विंड सेगमेंट में बढ़ते कॉम्पटीशन के चलते सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में बिकवाली का दबाव आया। बता दें कि 40 गीगावाट के जो प्राइस पर्चेज एग्रीमेंट्स (PPAs) पेंडिंग पड़े हैं, उसमें से करीब 17 गीगावाट तो प्योर सोलर से जुड़े हैं जबकि विंड की कोई खास हिस्सेदारी नहीं है। हालांकि ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि डेटा सेंटर, C&I (कॉमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल) कंज्यूमर्स और पीएसयू के चलते वर्ष 2030 तक विंड एनर्जी की डिमांड 20-24 गीगावाट बढ़ सकती है और यह वित्त वर्ष 2030 तक देश के 100 गीगावाट कैपेसिटी के टारगेट से कहीं अधिक होगी। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक सुजलॉन की अपने ऑर्डर बुक में करीब आधी यानी 50% हिस्सेदारी ईपीसी प्रोजेक्ट्स की करने की स्ट्रैटेजी कॉम्पटीशन के माहौल में इसे फायदा पहुंचा रही है। ब्रोकरेज फर्म ने अपने नोट जिक्र किया है कि बाकी घरेलू कंपनियों की तुलना में सुजलॉन के बेहतर एग्जीक्यूशन ट्रैक रिकॉर्ड और ईपीसी स्पेस में चीनी ओईएम की सीमित भागीदारी इसे कॉम्प्लेक्स और बड़े प्रोजेक्टस को हासिल करने को लेकर सपोर्ट कर रही है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि निर्यात में तेजी से भी इसे सपोर्ट मिल सकता है और वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में इसे ऑर्डर मिलने की उम्मीद है और सप्लाई वित्त वर्ष 2028 से शुरू हो सकती है। दावोसा में सीएनबीसी-टीवी18 के साथ बातचीत में सुजलॉन ग्रुप के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गिरीश तांती ने कहा कि अगले दो वर्षों में कंपनी 10 गीगावाट का आंकड़ा पार कर लेगी। उन्होंने आगे कहा कि करीब 20 गीगावाट की सालाना मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और निर्यात मांग के दम पर वर्ष 2030 तक क्षमता बढ़कर 13-15 गीगावाट तक पहुंच सकती है। Advanta Enterprises IPO: UPL की एक और कंपनी के लिस्टिंग की तैयारी, SEBI के पास आईपीओ का ड्राफ्ट जमा डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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    सुजलॉन एनर्जी शेयर: 1 साल के निचले स्तर के करीब, क्या होगी रिकवरी?