Geopolitics
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सूडान में पाकिस्तान का प्रॉक्सी युद्ध: सऊदी अरब के इशारे पर धोखा
Navbharat Times
January 20, 2026•2 days ago
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पाकिस्तान सूडान में सऊदी अरब के समर्थन में सैन्य सरकार को JF-17 लड़ाकू विमान बेच रहा है। यह 4 अरब डॉलर का सौदा पाकिस्तान के सऊदी लोन को कम करेगा और UAE के प्रभाव को घटाएगा। पाकिस्तान इस हथियार बिक्री से अमेरिका और UAE को भी धोखा दे रहा है, जबकि सूडान में गृहयुद्ध जारी है।
खार्तूम/इस्लामाबाद: दिन रात हाय मुसलमान, हाय मुसलमान करने वाला पाकिस्तान, सूडान में प्रॉक्सी युद्ध के जरिए कैसे मुसलमानों को मरवा रहा है, इसपर बड़ा खुलासा हुआ है। ये एक बहुत जटिल मिडिल ईस्ट गठबंधन के जाल को दिखाता है। खुलासा हुआ है कि सऊदी खेमे में खुद को रणनीतिक मकसद से और मजबूत करने के लिए पाकिस्तान ने सूडान में प्रॉक्सी युद्ध को तेज कर दिया है। सूडान में अब्देल फत्ताह अल-बुरहान के नेतृत्व वाली सैन्य सरकार और मोहम्मद हमदान "हेमेती" डगालो की कमान वाली रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच पिछले कई महीनों से जंग जारी है। इसमें हजारों लोग मारे गये हैं। ये क्षेत्रीय शक्तियों के लिए एक युद्ध का मैदान बन गया है।
सऊदी अरब, सूडान की सरकार का समर्थन करता है। सऊदी को सूडान की अस्थिरता से डर है, क्योंकि ये लाल सागर क्षेत्र में फैल सकती है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात RSF का समर्थन करता है। लेकिन इस बीच इस लड़ाई में पाकिस्तान की एंट्री हुई है और वो भी हथियार डील के माध्यम से। वह खार्तूम को फाइटर जेट्स की सप्लाई करने जा रहा है। इससे सऊदी अरब के पक्ष में पलरा भारी हो रहा है।
सऊदी के प्रॉक्सी वार को पाकिस्तान का समर्थन
पाकिस्तान, सूडान में सऊदी खेमे वाली सेना को JF-17 लड़ाकू विमान बेचने जा रहा है। ये सौदा करीब 4 अरब डॉलर का होगा। इसमें मिसाइलों के साथ साथ बाकी हथियार भी शामिल हैं। बड़ा खुलासा ये हुआ है कि इसमें पाकिस्तान ने जो सऊदी अरब से लोन ले रखा है, उसमें दो अरब डॉलर का लोन कट जाएगा। यानि सूडान की सेना के लिए पाकिस्तानी लड़ाकू विमान सऊदी अरब खरीद रहा है। इस डील में ड्रोन, हल्के हमलावर विमान और लगभग 1.5 अरब डॉलर के एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल हैं। इससे ना सिर्फ पाकिस्तान का आर्थिक दबाव कम होगा, बल्कि सूडान में संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन भी कम होगा।
साउथ एशिया प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बुरहान की सरकार को हथियार देकर, पाकिस्तान सीधे तौर पर सऊदी अरब समर्थित सरकार गिरने से रोकने में मदद कर रहा है। इसे सऊगी, हॉर्न ऑफ अफ्रीका में प्रभाव बनाए रखने के लिए आवश्यक मानता है। यह भागीदारी इस्लामाबाद के लिए एक महत्वपूर्ण वृद्धि है, जिसने ऐतिहासिक रूप से खाड़ी देशों को भाड़े के सैनिकों का समर्थन और प्रशिक्षण प्रदान किया है। हैरानी की बात ये है कि इस सौदे के जरिए पाकिस्तान अपने JF-17 लड़ाकू विमान को दुनिया के बाजारों में बेचने का ख्वाब दे रहा है। वहीं, पिछले दिनों पाकिस्तान के एक पत्रकार ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स में एक न्यूज स्टोरी लिखकर दावा किया था कि सऊदी, पाकिस्तानी लड़ाकू विमान खरीदने जा रहा है। इसीलिए सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या वो इसी डील की तो बात नहीं कर रहे थे? क्योंकि उस डील में पाकिस्तान लोन पर लड़ाकू विमान सौदे की बात की गई थी।
अमेरिका को भी धोखा दे रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान ऐसे हथियार डील करके अमेरिका को भी धोखा दे रहा है। पाकिस्तान, लंबे समय से अमेरिका से सैन्य मदद, इंटेलिजेंस शेयरिंग और डिप्लोमेटिक सपोर्ट हासिल करता रहा है। खासकर आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर। फिर भी, वो चीनी लाइसेंस वाले हथियार (JF-17 Fighter Jet) बेचकर अमेरिका को धोखा दे रहा है। पाकिस्तान उसी गठबंधन को कमजोर कर रहा है जिसने उसे बनाए रखा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात के लोन पर जिंदा है। पिछले महीने भी यूएई के राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी सेना के फौजी फाउंडेशन में एक अरब डॉलर का निवेश कर रहा है, फिर भी वो सूडान में UAE को रणनीतिक नुकसान पहुंचा रहा है। आपको बता दें सूडान में गृहयुद्ध 15 अप्रैल 2023 को शुरू हुआ था। जिसमें मरने वालों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा हो चुकी है। कई इंटरनेशनल रिपोर्ट्स में ये आंकड़ा, इससे काफी ज्यादा होने की आशंका जताई गई है। अमेरिका के पूर्व दूतों के कुछ स्वतंत्र आकलन बताते हैं कि अकाल और बीमारी के बड़े असर को ध्यान में रखा जाए तो मरने वालों का आंकड़ा 4 लाख से ज्यादा हो चुका है।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद, नवभारत टाइम्स में इंटरनेशनल अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं। जियो-पॉलिटिक्स और डिफेंस पर लिखते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 सालों का अनुभव है। अपने कैरियर की शुरूआती दिनों में उन्होंने क्राइम बीट में काम किया और ग्राउंड रिपोर्टिंग की। उन्होंने दो लोकसभा चुनाव को कवर किया है। इसके बाद वो इंटरनेशनल अफेयर्स की तरफ आ गये, जहां उन्होंने अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के साथ साथ कई देशों के इलेक्शन और वहां की राजनीति को कवर किया है। डिफेंस सेक्टर, हथियारों की खरीद बिक्री और अलग अलग देशों के बीच होने वाले संघर्ष पर लगातार लिखते रहते हैं। वो ज़ी मीडिया समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान में काम कर चुके हैं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पर वो डिफेंस और जियो-पॉलिटिक्स के एक्सपर्ट्स, डिप्लोमेट्स और सैन्य अधिकारियों से बात करते रहते हैं। इस समय वो 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू भी करते हैं, जो डिफेंस पर आधारित है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई है।... और पढ़ें
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