Geopolitics
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Su-30 फाइटर जेट: भारतीय वायुसेना की शान और सफलता की कहानी
Navbharat Times
January 20, 2026•2 days ago
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रूस का Su-30 लड़ाकू विमान पश्चिमी देशों के चौथी पीढ़ी के जेट्स को टक्कर देता है। अमेरिकी F-15 और F-16 के खिलाफ विकसित, यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ है। भारत ने इसे ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया है। यह बहुउद्देशीय विमान अपनी क्षमता और विभिन्न देशों द्वारा उपयोग के कारण रूस का सबसे अधिक बिकने वाला विमान बन गया है।
मॉस्को: लड़ाकू विमान बनाने में रूस का कोई मुकाबला नहीं रहा है। हालांकि Su-57 फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट बाजार में जलवा नहीं दिखा पाया। लेकिन Su-30 एक बेहद कामयाब लड़ाकू विमान बन चुका है। ये फाइटक जेट रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज में भी कम असरदार नहीं है। ये लड़ाकू विमान रूसी वायुसेना में एक मल्टीफंक्शनल और मल्टीपर्पस एयरक्राफ्ट के तौर पर काम करता है। टेक्नोलॉजी के हिसाब से देखें तो Su-30, पश्चिमी देशों के चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट्स की तुलना में भी एक जबरदस्त लड़ाकू विमान बना हुआ है। हालांकि, रूस ने यूक्रेन युद्ध में इस लड़ाकू विमान का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया है। लेकिन सीमित इस्तेमाल में भी ये काफी असरदार रहा है। रूस ने इसे अमेरिकी F-15E ईगल के खिलाफ तैयार किया था और बाद में इसने अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान को भी टक्कर दी।
रूस ने Su-27UB लड़ाकू विमान बनाने के बाद Su-30 फाइटर जेट प्रोजेक्ट शुरू किया। इससे बनने की कहानी की शुरूआत 1970 के दशक के अंत में हुई थी, जब सुखोई डिजाइन ब्यूरो के डिजाइनरों को चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट का एक ट्रेनर वर्जन बनाने का काम सौंपा गया। इसे बनाने का मकसद आकाश में होने वाले डॉगफाइट के दौरान रूस के वर्चस्व को स्थापित करना था। ये अपने मिशन में पूरी तरह से कामयाब रहा। उस वक्त रूस, सोवियत संघ हुआ करता था और उसे दो सीटों वाले एयरक्राफ्ट बनाने में महारत हासिल थी। इस तरह के एयरक्राफ्ट को कम ईंधन की जरूरत होती थी। लेकिन Su-27 को अलग तरह से बनाया गया था। इसके चीफ डिजाइनर मिखाइल सिमोनोव ने एक पूरी तरह से लड़ाकू एयरक्राफ्ट बनाने पर जोर दिया, जिसमें दूसरा क्रू मेंबर हथियारों के ऑपरेटर का काम कर सके।रूस ने कैसे Su-30 लड़ाकू विमान को बनाया?
1980 के दशक में Su-30 एयरक्राफ्ट का डिजाइन तैयार किया गया, जिसका फैक्ट्री कोड नाम T-10U था। लेकिन एक सिंगल-सीट फाइटर जेट बनाने की वजह से इसे बनाने में देरी हुई। पहला फ्लाइट प्रोटोटाइप, T-10U-1, 1984 की शुरुआत तक असेंबल नहीं हो पाया। 7 मार्च 1985 को टेस्ट पायलट निकोलाई सादोवनिकोव ने इसे पहली बार हवा में उड़ाया। एयरक्राफ्ट का डिजाइन अनोखा था। इसका दूसरा कॉकपिट पहले वाले से काफी ऊपर लगाया गया था, जिससे फ्यूजलेज को लंबा किए बिना फ्यूल टैंक का वॉल्यूम बनाए रखना संभव हो पाया। हालांकि विमान को स्थिर करने के लिए कील्स का एरिया बढ़ाना पड़ा।
Su-30 का सीरियल प्रोडक्शन इरकुत्स्क में शुरू किया गया था। इसके पहले पूरी तरह से तैयार जेट ने 14 अप्रैल 1992 को उड़ान भरी थी। इस एयरक्राफ्ट में एक मजबूत सेंटर विंग और लैंडिंग गियर था। हालांकि शुरूआत में बजट की कमी की वजह से सिर्फ 10 यूनिट का ही प्रोडक्शन किया गया। 1985 के बाद से सोवियत संघ ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों पर जोर दिया था। लेकिन ग्राहकों की डिमांड पर 1993 में Su-30MK का एक प्रोटोटाइप तैयार किया गया, जो हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम था। भारत और चीन से कॉन्ट्रैक्ट मिलने की वजह से इस एयरक्राफ्ट को एक बहुत ही स्पेशलाइज़्ड इंटरसेप्टर से रूस के सबसे एडवांस्ड स्ट्राइक फाइटर जेट में बदल दिया गया। जिससे यह लाइन दो हिस्सों में बंट गई। 1- थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल वाला मैनेवरेबल Su-30MKI और 2- स्ट्राइक Su-30MKK।
Su-30 में कमाल का एवियोनिक्स
Su-30SM आधुनिक एवियोनिक्स से लैस है जिसमें डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल और नेविगेशन सिस्टम हैं। बेसिक रडार स्टेशन पैसिव फेज्ड एरे रडार "BARS" N011M है, जो स्पेस की सर्कुलर स्कैनिंग करता है। इसके अलावा BARS रडार अलग-अलग मोड में हवा में मौजूद टारगेट का पता लगाता है। ये एक मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसकी स्पीड 2, 120 किलोमीटर प्रति घंटे की है। इसका रेंज 3000 किलोमीटर तक है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हथियारों की ले जाने की क्षमता है। ये 8000 किलो तक के हथियार लेकर उड़ान भर सकता है। भारत के साथ साथ चीव, वेनेजुएला, वियतनाम और मलेशिया भी Su-30 विमान के अलग अलग वैरिएंट इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए ये रूस का सबसे ज्यादा बिकने वाला विमान बन गया।
Su-30MKI- भारतीय वायुसेना के लिए ये फाइटर जेट रीढ़ की हड्डी की तरह है। इसमें थ्रस्ट वेक्टरिंग रूसी, फ्रांसीसी और इजराइली एवियोनिक्स का मिश्रण है। 2026 तक, भारत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नेतृत्व में एक बड़ा "सुपर-30" अपग्रेड प्रोग्राम चला रहा है।
Su-30SM- ये लड़ाकू विमान रूस इस्तेमाल करता है। रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज के लिए ये एक आधुनिक लड़ाकू विमान है, जिसमें एडवांस्ड कंट्रोल सिस्टम और सेंसर शामिल हैं।
Su-30MKK/MK2- चीन, वेनेजुएला और वियतनाम इसके अलग अलग वैरिएंट को ऑपरेट करते हैं। इसे स्ट्राइक और एंटी-शिप भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है। हालांकि इसमें MKI/SM वर्जन में पाए जाने वाले कैनार्ड्स और थ्रस्ट वेक्टरिंग की कमी है।
Su-30MKM- इसे मलेशिया की वायुसेना ऑपरेट करती है। यह काफी हद तक MKI पर आधारित है, लेकिन इसमें रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। इसमें पश्चिमी एवियोनिक्स का इस्तेमाल किया गया है।
इसके अलावा Su-30 के अलग अलग वैरिएंट को अल्जीरिया, अंगोला, यूगांडा, बेलारूस और म्यांमार भी ऑपरेट करते हैं। भारत ने अपने महाविनाशक ब्रह्मोस मिसाइल के एयरफोर्स वैरिएंट को इसी विमान से इंटीग्रेट किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने Su-30MKI फाइटर जेट से ही पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइलों से हमला किया था।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद, नवभारत टाइम्स में इंटरनेशनल अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं। जियो-पॉलिटिक्स और डिफेंस पर लिखते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 सालों का अनुभव है। अपने कैरियर की शुरूआती दिनों में उन्होंने क्राइम बीट में काम किया और ग्राउंड रिपोर्टिंग की। उन्होंने दो लोकसभा चुनाव को कवर किया है। इसके बाद वो इंटरनेशनल अफेयर्स की तरफ आ गये, जहां उन्होंने अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के साथ साथ कई देशों के इलेक्शन और वहां की राजनीति को कवर किया है। डिफेंस सेक्टर, हथियारों की खरीद बिक्री और अलग अलग देशों के बीच होने वाले संघर्ष पर लगातार लिखते रहते हैं। वो ज़ी मीडिया समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान में काम कर चुके हैं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पर वो डिफेंस और जियो-पॉलिटिक्स के एक्सपर्ट्स, डिप्लोमेट्स और सैन्य अधिकारियों से बात करते रहते हैं। इस समय वो 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू भी करते हैं, जो डिफेंस पर आधारित है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई है।... और पढ़ें
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