Thursday, January 22, 2026
Health & Fitness
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स्ट्रोक मरीजों के लिए अनोखा AI डिवाइस: 97% सटीकता से बिना बोले बातचीत!

Zee News
January 21, 20261 day ago
बिना बोले कैसे होगी बात? स्ट्रोक मरीजों के लिए आया ये अनोखा AI डिवाइस, 97% सटीक रिजल्ट से दुनिया हैरान!

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कैम्ब्रिज और बेइहांग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने स्ट्रोक रोगियों के लिए Revoice नामक एक AI डिवाइस विकसित किया है। यह गले में पहना जाने वाला नॉन-इनवेसिव बैंड होंठों की हलचल और गले के कंपन को समझकर शब्दों और भावनाओं को 97% सटीकता से आवाज़ में बदलता है। यह उन लोगों के लिए मददगार है जिन्होंने बोलने की क्षमता खो दी है।

AI Wearable For Stroke Patients: जरा सोचिए, क्या कोई व्यक्ति बिना एक शब्द बोले अपनी भावनाओं और विचारों को बिल्कुल स्पष्ट तरीके से आप तक पहुंचा सकता है? सुनने में यह किसी फिल्मी सीन लगता है लेकिन विज्ञान की दुनिया में यह अब हकीकत बनने जा रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज और बेइहांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा AI इंटेलिजेंट थ्रोट बना लिया है जो उन लाखों स्ट्रोक मरीजों के लिए आवाज बनेगी जिन्होंने अपनी बोलने की शक्ति खो दी है. Revoice नाम का एक छोटा सा गले में पहनने वाला नेकबैंड न सिर्फ आपके होंठों की हलचल को समझ लेता है बल्कि आपके दिल के जज्बातों को भी शब्दों में आसानी से ढाल देता है. आइए जानते हैं कैसे यह जादुई गैजेट मेडिकल साइंस की दुनिया को बदलने जा रहा है... मेडिकल साइंस और AI की वजह से यह संभव हो पाया है जो बोल पाने में समस्या का सामना करने वाले मरीजों की जिंदगी बदल सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज और बेइहांग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक हाई-टेक डिवाइस तैयार की है जिसे Revoice नाम दिया गया है. यह डिवाइस उन स्ट्रोक सर्वाइवर्स के लिए बनाया गया है जो dysarthria एक ऐसी बीमारी जिसमें बोलने वाली मांसपेशियों की कमजोरी या खराब कंट्रोल के कारण बोलने में समस्या होती है. . इस बीमारी में पेशेंट के दिमाग को पता होता है कि उसे क्या कहना है लेकिन उसके गले की मांसपेशियां साथ नहीं देतीं जिससे बोलना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है. बिना किसी सर्जरी के होगी फिट आमतौर पर ऐसे मामलों में पेशेंट को दिमाग में चिप या इम्प्लांट की जरूरत पड़ती है लेकिन Revoice एक सॉफ्ट चोकर यानी गले में पहनने वाला बैंड है. यह गले के बाहरी हिस्से पर पहना जाता है और पूरी तरह से नॉन-इनवेसिव यानी बिना किसी प्रकार के चीर-फाड़ वाला है. कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी? गले में पहनने वाले इस बैंड में सेंसर लगे हैं जो इतने सेंसिटिव हैं कि वे स्किन में होने वाले 0.1% जैसे मामूली बदलाव को भी पहचान लेते हैं. और जब मरीज बिना आवाज निकाले केवल होंठ और गला हिलाकर शब्द माउथ करता है तो यह डिवाइस गले के कंपन और कैरोटिड आर्टरी की पल्स को रिकॉर्ड कर लेती है. यह डिवाइस का डेटा दो AI एजेंट्स के पास जाता है. पहला एजेंट टूटे-फूटे शब्दों को जोड़कर पूरा वाक्य तैयार करता है तो वहीं दूसरा पेशेंट की फीलिंग्स को समझकर आवाज में बदलता है. सबसे खास बात यह है कि यह हर 100 मिलीसेकंड में डेटा प्रोसेस करता है जिससे बातचीत बिल्कुल नेचुरल लगती है. ये भी पढे़ंः OnePlus: कॉफी शॉप में आया Idea और बना डाला आईफोन को टक्कर देने वाला फोन! क्या अब... पेशेंट पर हो गया ट्रायल 5 स्ट्रोक पेशेंट पर किए गए टेस्ट में इस डिवाइस ने शब्दों को पहचानने में 95.8% और पूरे वाक्यों में 97.1% की सटीकता दिखाई है. इसकी बैटरी पूरे दिन चलती है और इसे हर दिन इस्तेमाल के लिए बहुत ही आरामदायक बनाया गया है. रिसर्चर्स का मानना है कि यह टेक्नोलॉजी आने वाले समय में पार्किंसंस और मोटर न्यूरॉन बीमारी के पेशेंट के लिए भी मजेदार साबित होगी.

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    स्ट्रोक AI डिवाइस: 97% सटीक, बिना बोले बातचीत