Geopolitics
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15 करोड़ KM दूर से आया खतरनाक सौर तूफान: बिजली, सैटलाइट और GPS पर मंडराया खतरा!
Times Now Navbharat
January 21, 2026•1 day ago

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सूर्य से निकले शक्तिशाली आवेशित कणों के कारण एक तीव्र भू-चुंबकीय तूफान आया, जो 23 साल का रिकॉर्ड तोड़कर G4 श्रेणी का रहा। इससे बिजली ग्रिड, सैटेलाइट और जीपीएस सिस्टम में अस्थायी बाधाएं आईं। ब्रिटेन और यूरोप सहित कई देशों में ऑरोरा (ध्रुवीय ज्योति) भी देखे गए।
सूर्य की सतह पर अचानक हुई तीव्र गतिविधि के बाद एक शक्तिशाली धमाका हुआ, जो सामान्य नहीं था। इसकी तीव्रता ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया। इस धमाके से उत्पन्न हुए आवेशित कण कुछ घंटों बाद पृथ्वी के वायुमंडल से टकराए। (फोटो साभार: iStock)
लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 के बाद सबसे शक्तिशाली सौर तूफान आया। हालांकि, यह पूरी तरह से सही नहीं है, क्योंकि मई 2024 में आया 'मदर्स डे स्टॉर्म' इससे कहीं ज्यादा शक्तिशाली था। ताजा तूफान ने एक खास सौर विकिरण से जुड़ा 23 साल पुराना रिकॉर्ड जरूर तोड़ा है। (फोटो साभार: iStock)
भू-चुंबकीय तूफान 19 जनवरी को तब शुरू हुआ, जब कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर से टकराया। इसकी वजह से पृथ्वी के चारों ओर मौजूद अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र में अस्थायी गड़बड़ी हुई और आवेशित कण वायुमंडल में दाखिल हो गए। (फोटो साभार: iStock)
नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (SWPC) के मुताबिक, तूफान पहली बार G4 श्रेणी (गंभीर) का रहा। इसके बाद माहौल सामान्य ही हुए थे कि मंगलवार को यह फिर से G4 स्तर तक पहुंच गया। (फोटो साभार: iStock)
G4, भू-चुंबकीय तूफानों का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। ऐसी स्थिति में रेडियो ब्लैकआउट, पावर ग्रिडों और सैटेलाइट को नुकसान हो सकता है। हालांकि, इस तूफान से हुए वास्तविक नुकसान का आकलन अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैटेलाइट, जीपीएस सिस्टम में कुछ रुकावटें जरूर आई हैं। (फोटो साभार: iStock)
सौर तूफान की वजह से ब्रिटेन और यूरोप के कई हिस्सों में ऑरोरा देखे गए। जिनमें फ्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, नॉर्वे, डेनमार्क, नीदरलैंड और क्रोएशिया शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने अमेरिका के 24 राज्यों तक ऑरोरा देखे जाने की संभावना जताई है। (फोटो साभार: AP)
भू-चुंबकीय तूफान तब उत्पन्न होता है जब सूर्य से आने वाले आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं और तब यह सैटेलाइट या अन्य ऊंचाई वाली चीजों से टकराते हैं। कुछ वक्त पहले एक रिसर्च में बताया गया था कि कुछ सैटेलाइट समय से पहले ही वायुमंडल में दाखिल हो गई जिसके लिए सौर गतिविधियों को जिम्मेदार माना गया था। (फोटो साभार: AP)
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