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क्या शिंगल्स वैक्सीन बुढ़ापे की रफ्तार कम कर सकती है? डिमेंशिया पर भी असर
DNA India
January 21, 2026•1 day ago

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एक नई स्टडी के अनुसार, शिंगल्स वैक्सीन बुजुर्गों में जैविक उम्र बढ़ने की गति को धीमा कर सकती है और सूजन को कम कर सकती है। यह वैक्सीन डिमेंशिया जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के जोखिम को भी कम कर सकती है। अध्ययन में पाया गया कि वैक्सीन लगवाने वालों में जैविक उम्र बढ़ने का स्कोर कम था, जो स्वस्थ वृद्धावस्था में सहायक हो सकता है।
Shingles Vaccine And Biological Ageing: हाल ही में आई एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि शिंगल्स (Shingles) की वैक्सीन न केवल हर्पीज इंफेक्शन से बचाव करती है, बल्कि यह बुज़ुर्गों में जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को भी धीमा कर सकती है. पिछले एक रिपोर्ट में इस वैक्सीन से न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, जैसे डिमेंशिया का भी खतरा कम होने का दावा किया गया था. अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के जेरॉन्टोलॉजी विभाग में रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर और इस अध्ययन के मुख्य लेखक जंग की किम के मुताबिक, यह अध्ययन इस बात के बढ़ते सबूतों में इज़ाफा करता है कि वैक्सीन सिर्फ संक्रमण से बचाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शरीर की जैविक प्रक्रियाओं पर असर डालकर सेहतमंद उम्र बढ़ने में भी मदद कर सकती है.
शिंगल्स क्या है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शिंगल्स, जिसे हर्पीज़ जोस्टर भी कहा जाता है, एक दर्दनाक और छालेदार त्वचा रोग है. यह चिकनपॉक्स (चेचक, जिसे ग्रामीण इलाकों में छोटी माता कहा जाता है) के वायरस के दोबारा सक्रिय होने से होता है. इस बीमारी का खतरा 50 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा माना जाता है.
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क्या कहती है स्टडी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने 2016 में 70 साल या उससे अधिक उम्र के 3,800 से ज्यादा लोगों पर अध्ययन किया और उन्होंने देखा कि शिंगल्स वैक्सीन का शरीर में सूजन (Inflammation), इम्युनिटी और न्यूरोडीजेनेरेशन जैसी उम्र से जुड़ी प्रक्रियाओं पर क्या असर पड़ता है. इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई थी, उनमें सूजन का स्तर कम था और कुल जैविक उम्र बढ़ने का स्कोर भी कम देखा गया. इतना ही नहीं. जेनेटिक स्तर पर भी उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी पाई गई.
यह वैक्सीन न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों, जैसे डिमेंशिया, के खतरे को भी कम कर सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डिमेंशिया में उम्र के साथ याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और मानसिक कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है.
क्या होता है शरीर में इसका असर?
शोधकर्ताओं ने लिखा कि शिंगल्स की वैक्सीन लेने वाले लोगों में, सूजन (Inflammation) का स्तर कम, एपिजेनेटिक और ट्रांसक्रिप्टोमिक स्तर पर उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी और कुल जैविक उम्र बढ़ने का स्कोर भी कम पाया गया. यह संकेत देता है कि यह वैक्सीन शरीर में सूजन को कम करने और पूरे जैविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मददगार हो सकती है. शोधकर्ता यह भी बता रहे हैं कि इन नतीजे से यह समझने में मदद मिलती है कि इम्यून सिस्टम की सेहत और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया आपस में कैसे जुड़ी हुई हैं.
जंग की किम के मुताबिक, लंबे समय तक रहने वाली हल्की सूजन कई उम्र से जुड़ी बीमारियों का एक बड़ा कारण मानी जाती है, जैसे दिल की बीमारी, शारीरिक कमजोरी और याददाश्त में गिरावट. इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में ‘इन्फ्लेमएजिंग’ (Inflammaging) कहते हैं.
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