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शिंदे-राज ठाकरे का गठबंधन: बीजेपी का कल्याण-डोंबिवली मेयर सपना क्यों अटका?
AajTak
January 21, 2026•1 day ago

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महाराष्ट्र की राजनीति में कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे ने गठबंधन किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भाजपा को मेयर पद से रोकना है। दोनों पार्टियों को मिलाकर 58 सीटें हैं, बहुमत के लिए 62 की आवश्यकता है। उद्धव गुट के पार्षदों के समर्थन से यह गठबंधन बहुमत हासिल कर सकता है। यह भाजपा के लिए एक झटका है।
महाराष्ट्र की राजनीति अक्सर चौंकाने वाले मोड़ लेती रहती है. हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों ने राज्य को बदलते गठबंधनों की एक उलझी हुई तस्वीर में बदल दिया है. ऐसा ही एक मामला कल्याण-डोंबिवली में देखने को मिला, जहां एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ अपनी पुरानी दुश्मनी को दरकिनार करते हुए गठबंधन कर लिया. इस गठबंधन का मकसद बीजेपी को मेयर पद से दूर रखना है.
122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के चुनाव में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया और 50 सीटें जीतीं. यह इलाका शिंदे का गढ़ माना जाता है. वहीं, शिंदे गुट की शिवसेना को 53 सीटें मिलीं और मनसे ने 5 सीटें जीतीं. उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 11 सीटें मिलीं. KDMC में सत्ता बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को 62 सीटों की जरूरत है.
हालांकि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा होने के बावजूद, शिवसेना और बीजेपी कल्याण-डोंबिवली में मेयर पद को लेकर आमने-सामने आ गई हैं.
बुधवार को कोंकण भवन में हुई एक हाई-लेवल बैठक के बाद शिवसेना सांसद और एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने राज ठाकरे की पार्टी के साथ गठबंधन की पुष्टि की. इस गठबंधन की कुल संख्या 58 तक पहुंच गई है, जो बहुमत से सिर्फ़ चार सीट कम है.
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बैठक के दौरान श्रीकांत शिंदे ने संकेत दिया कि उद्धव ठाकरे गुट के चार पार्षद इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो गठबंधन आसानी से 62 के बहुमत के आंकड़े को पार कर जाएगा और बीजेपी के साथ सत्ता साझा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
चुनाव के बाद आया यह नया मोड़ बीजेपी के लिए झटका माना जा रहा है. बीजेपी 2.5 साल के रोटेशन में मेयर पद साझा करने की मांग कर रही थी, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना पूरे कार्यकाल के लिए मेयर पद अपने पास रखना चाहती है.
पिछले कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव में अविभाजित शिवसेना ने 52 सीटों के साथ जीत हासिल की थी.
इस महीने की शुरुआत में दिसंबर 2025 में हुए अंबरनाथ और अकोला नगर परिषद चुनावों में भी ऐसे ही हालात देखने को मिले थे. अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, जबकि अकोला में उसने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के साथ हाथ मिलाया. हालांकि बाद में बीजेपी नेतृत्व ने इन गठबंधनों पर सख्ती दिखाई. कांग्रेस ने भी अंबरनाथ में अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया.
BMC मेयर पर भी सस्पेंस बरकरार
यह सारा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है. बीजेपी–शिंदे सेना गठबंधन ने ठाकरे परिवार का लगभग तीन दशक पुराना दबदबा खत्म कर दिया है.
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227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है.
स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया. पार्षदों को जीत के प्रमाणपत्र मिलने और गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही होटल से जाने की अनुमति दी गई. यह हाई-प्रोफाइल नगर निगम चुनाव महायुति के भीतर मौजूद अंदरूनी खींचतान और मतभेदों को साफ तौर पर उजागर करता है.
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