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दिवंगत बेटे आयुष को याद कर भावुक हुए शेखर सुमन, कहा- 'जिंदगी आज भी अधूरी है'
AajTak
January 18, 2026•4 days ago

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दिवंगत बेटे आयुष की यादों में डूबे शेखर सुमन ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने बताया कि 11 साल की उम्र में दुर्लभ बीमारी से बेटे को खोने का दर्द आज भी असहनीय है और उसके बिना जिंदगी अधूरी लगती है। यह घटना शेखर सुमन के जीवन में गहरा सदमा थी।
एक्टर शेखर सुमन ने अपने दिवंगत बेटे आयुष को याद करते हुए सोशल मीडिया पर दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया. हीरामंडी फेम एक्टर ने कहा कि आयुष ने अपनी इस छोटी-सी जिंदगी में ही उनके परिवार को ढेर सारी खुशियां दे दी थीं. शेखर ने यह भी माना कि बेटे को खोने का दर्द आज तक उनसे संभाला नहीं गया है.
शेखर को आई बेटे की याद
इंस्टाग्राम पर आयुष की एक तस्वीर शेयर करते हुए शेखर ने लिखा- मेरे फरिश्ते आयुष को याद कर रहा हूं. हर पल तुम्हें मिस करता हूं मेरे बच्चे. तुम्हारे बिना जिंदगी अधूरी है. बहुत कम समय में तुमने हमें इतनी सारी खुशियां दीं. तुम्हें खोने के इस दर्द से हम आज तक बाहर नहीं आ पाए हैं. लेकिन तुम भगवान और परियों के साथ एक बेहतर दुनिया में हो.
जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि शेखर सुमन के बेटे आयुष का 11 साल की उम्र में एक दुर्लभ बीमारी एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस (EMF) की वजह से निधन हो गया था. उन्होंने 3 अप्रैल 1995 को इस दुनिया को अलविदा कहा था. एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस एक गंभीर दिल की बीमारी होती है, जिसमें दिल की अंदरूनी परत सख्त हो जाती है और दिल ठीक से काम नहीं कर पाता.
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11 साल की उम्र में कह गया अलविदा
शेखर बता चुके हैं कि बड़े बेटे की मौत के बाद वो कैसे टूट गए थे. एफएम कनाडा से बातचीत में शेखर सुमन ने उस पल को याद किया, जब वो अपने बच्चे को बाहों में लिए किसी चमत्कार के होने की दुआ कर रहे थे. उन्होंने कहा, 'लेकिन कोई चमत्कार नहीं होते.' उन्होंने याद किया कि बेटे की हालत खराब होने के बावजूद एक डायरेक्टर ने उन्हें शूटिंग करने के लिए कहा था.
वो बोले, 'एक दिन बहुत भारी बारिश हो रही थी और आयुष बहुत बीमार था. डायरेक्टर को पता था कि मेरा बेटा बीमार है, फिर भी उन्होंने मुझसे शूट पर दो-तीन घंटों के लिए आने की रिक्वेस्ट की. मैं मना कर दिया था. डायरेक्टर ने कहा- प्लीज आ जाइए मेरा बड़ा नुकसान हो जाएगा. मैं मान गया. जब मैं घर से निकल रहा था तो आयुष ने मेरे हाथ पकड़ा था और कहा था- पापा मत जाओ प्लीज. मैंने उसका हाथ छुड़वाया और उसे वादा किया कि मैं जल्दी वापस आ जाऊंगा. वो पल मैं कभी नहीं भूल सकता.'
शेखर सुमन ने बताया कि बेटे के दुनिया छोड़ जाने के बाद उनका विश्वास भगवान से उठ गया था. उन्होंने अपने घर का मंदिर बंद कर दिया था. उन्होंने कहा, 'सारी मूर्तियां हटा दी गई थीं और बाहर फेंक दी गई थीं. मंदिर बंद कर दिया था. मैंने कहा था कि मैं कभी उस भगवान के पास नहीं जाऊंगा जिसने मुझे इतना दर्द दिया, इतनी चोट पहुंचाई, मेरे छोटे से मासूम बच्चे की जान ले ली.'
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