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शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट: इन 8 कारणों से सेंसेक्स 400 अंक लुढ़का
Moneycontrol Hindi
January 20, 2026•2 days ago

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भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट जारी रही, सेंसेक्स 400 अंक लुढ़का और निफ्टी 25,500 के नीचे चला गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों, और वैश्विक ट्रेड वॉर की आशंकाओं ने बाजार को कमजोर किया। ब्रॉडर मार्केट में भी तेज गिरावट आई, सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे।
Share Market Down: भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला मंगलवार 20 जनवरी को भी जारी रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों तक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी गिरकर 25,500 के भी नीचे चला गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों और ग्लोबल स्तर पर ट्रेड वॉर की बढ़ती आशंकाओं ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर किया है। ब्रॉडर मार्केट में इससे भी तेज गिरावट देखने को मिली। बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स 1.2 तक लुढ़क गए। सभी सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में थे।
सुबह करीब 11.30 बजे, बीएसई सेंसेक्स 351.97 अंक या 0.42 गिरकर 82,894.21 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 125.85 अंक या 0.49% टूटकर 25,459.65 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 8 बड़ी वजहें रहीं-
1. ग्लोबल ट्रेड वॉर से जुड़ी चिंताएं
अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर नई अनिश्चितता सामने आने के बाद ग्लोबल बाजारों में रिस्क लेने का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में तेजी और अमेरिका-यूरोप के बीच संभावित व्यापार तनाव बढ़ने की आशंकाओं ने ग्लोबल शेयर बाजारों में बिकवाली को हवा दी, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड से जुड़े टैरिफ विवाद पर जब तक स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। उनके मुताबिक, भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दे निकट अवधि में बाजार की दिशा तय करते रहेंगे।
2. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
सोमवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से 3,262 करोड़ रुपये की निकासी की। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 29,315 करोड़ रुपये निकाल चुके है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने पूरे शेयर बाजार पर दबाव बनाए रखा और घरेलू निवेशकों की खरीदारी को सीमित कर दिया।
3. Q3 के मिले-जुले नतीजे
तिमाही नतीजों से जुड़े संकेत फिलहाल बाजार को कोई मजबूत दिशा देने में नाकाम रहे हैं। आईटी सेक्टर खास तौर पर दबाव में दिखा। Wipro के कमजोर आउटलुक के बाद सोमवार को उसके शेयरों में तेज गिरावट आई थी, जिसका असर मंगलवार को भी आईटी शेयरों पर बना रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1.1% फिसलकर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा। वीके विजयकुमार के मुताबिक, शुरुआती Q3 नतीजों से फिलहाल अर्निंग्स ग्रोथ में कोई साफ रिकवरी नहीं दिखी है। हालांकि ऑटो सेक्टर के नतीजों के साथ तस्वीर में सुधार आ सकता है।
4. कमजोर ग्लोबल संकेत
एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख दिखा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स हरे निशान में रहा, लेकिन जापान का निक्केई 225, शंघाई का SSE कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट में कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजार सोमवार को हॉलिडे के चलते बंद रहे, लेकिन 20 जनवरी को वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स 1% से ज्यादा टूटते नजर आए।
5. रुपये में कमजोरी
मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 90.98 पर आ गया। आयातकों की मजबूत डॉलर मांग और लगातार विदेशी निवेश की निकासी ने भारतीय करेंसी पर दबाव बनाए रखा। फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर घरेलू शेयर बाजार के कारण रुपये पर दबाव जारी है।
6. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर अनिश्चितता
निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ पर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। विजयकुमार ने कहा कि अगर फैसला बाजार के अनुमान के उलट रहा, तो इसका असर ग्लोबल और घरेलू दोनों बाजारों की चाल पर दिख सकता है।
7. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव मंगलवार को 0.11% बढ़कर 64.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए महंगाई और राजकोषीय दबाव को लेकर चिंताएं बढ़ाती हैं, जिससे शेयर बाजारों पर नेगेटिव असर पड़ता है।
8. निफ्टी का वीकली एक्सपायरी डे
मंगलवार को निफ्टी के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी होती है। ऐसे दिनों में डेरिवेटिव पोजीशनों की अनवाइंडिंग और रोलओवर के चलते बाजार में आमतौर पर ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, जिससे इंडेक्स में तेज इंट्राडे मूवमेंट होते हैं।
अब आगे क्या?
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी का हालिया निचले स्तरों के पास सपोर्ट लेने के बाद लोअर बोलिंजर बैंड के ऊपर लौटना एक पॉजिटिव संकेत है। हालांकि उन्होंने चेताया कि अगर इंडेक्स 25,550 के ऊपर टिकने में नाकाम रहता है, तो निकट अवधि में तेजी की गुंजाइश सीमित रह सकती है।
डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।
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