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शेयर बाजार में भारी गिरावट: जानें 6 प्रमुख कारण क्यों टूटा सेंसेक्स 1000 अंक
Moneycontrol Hindi
January 21, 2026•1 day ago

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भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार को भारी गिरावट आई, सेंसेक्स 1000 अंक और निफ्टी 25,000 के स्तर से नीचे गिर गया। रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, मिले-जुले तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों में गिरावट, बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताएं और VIX में तेजी प्रमुख कारण रहे।
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार 21 जनवरी को लगातार तीसरे दिन भारी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1000 अंक लुढ़क गया। वहीं निफ्टी भी 25,000 के लेवल को तोड़कर उसके नीचे चला गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, तिमाही नतीजों से मिलेजुले संकेत और बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच निवेशकों का भरोसा डगमगाया नजर आ रहा है। बाजार में चौतरफा गिरावट देखने को मिली। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1.5 फीसदी से अधिक लुढ़क गए।
इससे एक दिन पहले मंगलवार को शेयर बाजार में पिछले 8 महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। निफ्टी और सेंसेक्स क्रमशः करीब 1.4% और 1.3% टूट गए थे। बाजार के सेंटीमेंट पर कई नेगेटिव खबरों का एक साथ असर दिखा।
सुबह 10.50 बजे के करीब, बीएसई सेंसेक्स 945.14 अंक या 1.15 फीसदी गिरकर 81,235.33 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 285.40 अंक या 1.13 फीसदी टूटटकर 24,947.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 6 बड़े कारण रहे-
शेयर बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा कारण रुपये की कमजोरी रही। शुरुआती कारोबार में रुपया 31 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 91.28 के अपने नए ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 91.05 पर खुला था, लेकिन जल्द ही और फिसल गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, लगातार डॉलर की मांग, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी ने भारतीय करेंसी पर दबाव बनाए रखा है।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी शेयर बाजार के लिए चिंता का बड़ा कारण बने हुए हैं। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, मंगलवार को एफआईआई ने ₹2,938.33 करोड़ के शेयर बेचे। यह जनवरी महीने में लगातार 11वां दिन था जब एफआईआई ने शुद्ध रूप से बिकवाली रहे। इस महीने विदेशी निवेशकों ने केवल एक दिन, 2 जनवरी को ही खरीदारी की थी। जनवरी महीने में अब तक वह कुल 32,253 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं।
तिमाही नतीजों से जुड़े संकेत फिलहाल बाजार को कोई मजबूत दिशा देने में नाकाम रहे हैं। आईटी सेक्टर खास तौर पर दबाव में दिखा। कई बड़े प्राइवेट बैंकों के नतीजे भी बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे। इसके अलावा शॉपर्स स्टॉप समेत कई शेयर बुधवार को कमजोर तिमाही नतीजों के चलते 10 प्रतिशत तक गिर गए। वीके विजयकुमार के मुताबिक, शुरुआती Q3 नतीजों से फिलहाल अर्निंग्स ग्रोथ में कोई साफ रिकवरी नहीं दिखी है। हालांकि ऑटो सेक्टर के नतीजों के साथ तस्वीर में सुधार आ सकता है।
ग्लोबल बाजारों से भी बुधावर को नेगेटिव संकेत मिले। एशियाई बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। वहीं, अमेरिकी बाजारों में रातभर जोरदार बिकवाली हुई। नैस्डैक कंपोजिट 2.39%, एसएंडपी 500 2.06% और डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 1.76% टूट गया।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “अमेरिकी शेयर मार्केट में मंगलवार को अक्टूबर के बाद की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट देखने को मिली। यूरोपीय देशों पर संभावित टैरिफ और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की आक्रामक नीति से ट्रेड वॉर की आशंकाएं फिर से बढ़ गई हैं, जिससे ग्लोबल स्तर पर बिकवाली तेज हुई है।”
शेयर बाजार में बढ़ती घबराहट का संकेत देने वाले इंडिया VIX इंडेक्स में भी बुधवार को तेजी देखने को मिली। इंडिया VIX इंडेक्स करीब 4% चढ़कर 13.22 पर पहुंच गया। आमतौर पर VIX में बढ़ोतरी का मतलब होता है कि निवेशक आगे और उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं और जोखिम लेने से बच रहे हैं।
भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी हालात बाजार के पक्ष में नहीं रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर बयानों और यूरोपीय देशों के खिलाफ संभावित टैरिफ कदमों ने ग्लोबल अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि ट्रंप की नीतियों और यूरोप के कड़े रुख के चलते वैश्विक बाजारों में “रिस्क-ऑफ” माहौल बन गया है। निवेशक तेजी से सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बना हुआ है।
टेक्निकल चार्ट्स से क्या मिल रहे संकेत?
जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का मानना है कि निफ्टी में फिलहाल गिरावट का रुझान जारी रह सकता है, हालांकि बीच-बीच में हल्की रिकवरी या पुलबैक संभव है। लेकिन जब तक मुख्य रेजिस्टेंस स्तरों के ऊपर मजबूती से ब्रेकआउट नहीं होता, तब तक किसी भी तेजी के टिकने की संभावना कम है।
डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।
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