Space & Astronomy
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रिंग नेबुला में दिखी 'रहस्यमयी छड़': वैज्ञानिकों को क्या मिला?
Zee News
January 19, 2026•3 days ago
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रिंग नेबुला में वैज्ञानिकों को लोहे के परमाणुओं का लगभग 3.7 ट्रिलियन मील लंबा, छड़ जैसा बादल मिला है। यह खोज विलियम हर्शल टेलीस्कोप पर WEAVE यंत्र के उपयोग से हुई। माना जा रहा है कि यह लोहा एक नष्ट हुए चट्टानी ग्रह से आया है, जिसका वजन पृथ्वी के पिघले लोहे के कोर के बराबर हो सकता है।
Ring Nebula: रिंग नेबुला आकाशगंगा में एक चमकदार और जानी-मानी चीज है, यह धरती से लगभग 2,600 लाइट-ईयर दूर है. रिंग नेबुला की खोज फ्रांसीसी खगोलशास्त्री चार्ल्स मेसियर ने 1779 में की थी और तब से इसका व्यापक अध्ययन किया जा रहा है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमने इसे पूरी तरह से समझ लिया है. इतने लंबे इतिहास के बाद भी नए शोध से पता चला है कि नेबुला में अभी भी अनसुलझे रहस्य छिपे हैं. रिंग नेबुला को सामान्तः मेसियर 57 भी कहते हैं. यह गैस और धूल का एक चमकता हुआ गोला है जो तब बना जब एक मरते हुए तारे ने अपनी बाहरी परतें हटा दीं.
एक समय पर यह तारा सूरज के वजन से भी लगभग दोगुना था, उसका फ्यूल खत्म हो गया और वह एक रेज जायंट में फैल गया था. इसके बाद धरकी के साइज के एक घने व्हाइट ड्वार्फ में बदल गया. इससे जो भी मटीरियल निकला वही अब नेबुल बनता है. हाल में ही स्पेन के कैनरी आइलैंड्स में विलियम हर्शल टेलीस्कोप पर WEAVE नाम के एक यंत्र का इस्तेमाल करते हुए शोधकर्ताओं ने एक हैरान करने वाली जानकारी प्राप्त की है.
शोध में क्या आया सामने?
शोधकर्ताओं ने पाया कि नेबुला में लगभग 3.7 ट्रिलियन मील तक फैले आयरन एटम का एक लंबा बार जैसा बादल मिला. जानकारों का कहना है कि इस आयरन की खासियत भी अजीब है, क्योंकि नेबुला में पाया जाने वाला कोई भी दूसरा एलिमेंट इसी आकार का नहीं दिखता है. वैज्ञानिकों ने माना है कि इसके पीछे की वजह यह हो सकती है कि लोहा एक चट्टानी ग्रह से आया ता, जो तब खत्म हो गया जब तारे ने अपनी बाहरी परतें निकाल दीं. माना जा रहा है कि लोहे की मात्रा पृथ्वी के पिघले हुए लोहे के कोर के वज़न के बराबर है. हालांकि, इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि यह केवल अनुमान है, इसको सिद्ध नहीं किया गया है.
शोध को इस फेमस एस्ट्रोनॉमर ने लीड किया
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्डिफ यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमर रोजर वेसन ने इस शोध को लीड किया है. उन्होंने बताया कि इतनी जानी-पहचानी चीज़ में कुछ नया खोजना रोमांचक था. आगे यह भी बताया कि रिंग नेबुला की अक्सर स्टडी की जाती है और यह छोटे टेलिस्कोप और बाइनोकुलर्स से भी दिखता है, हालांकि इसे नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता. कहा जा रहा है कि उन्होंने बताया कि यह प्रोफेशनल और शौकिया एस्ट्रोनॉमर्स, दोनों के देखने के लिए एक क्लासिक चीज़ है. हालांकि, इसको नंगी आंखों देखना उतना संभव नहीं है क्योंकि यह काफी धुंधला है. इसको दूरबीन से देखना काफी आसान है.
सिलेंडर के आकार की है इसकी असली बनावट
उल्लेखनीय है कि धरती से नेबुल एक रिंग के जैसा दिखता है, लेकिन वैज्ञानितों का मानना है कि यह वास्तव में एक सिलेंडर के जैसा है. इसको अगर ऊपर से देखा जाए. यह अधिकांश हाइड्रोजन और हीलियम बना हुआ है. इसमें थोड़ी मात्रा में भारी एलिमेंट भी शामिल हैं. दावा किया जा रहा है कि रिंग नेबुला लगभग 4,000 साल पहले बना था, जो कॉस्मिक नज़रिए से बहुत नई बात है. वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारी गैलेक्सी में लगभग 3,000 ऐसे नेबुला हैं. (इनपुट-रॉयटर्स)
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