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सोने के दाम आसमान पर: RBI ने रोकी खरीदारी, जानें कितना है रिजर्व बैंक के पास सोना
Navbharat Times
January 21, 2026•1 day ago
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सोने की कीमत में भारी उछाल के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2025 में सोने की खरीद में पिछले 8 सालों में सबसे बड़ी कमी की है, केवल 4.02 टन खरीदा। इसके बावजूद, RBI का कुल सोने का भंडार रिकॉर्ड 880.2 टन हो गया है, जो विदेशी मुद्रा भंडार का 16% है। यह भंडार प्रबंधन की सोची-समझी रणनीति का संकेत है।
मुंबई: सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम डेढ़ लाख रुपये के पार चली गई है। इसकी कीमत में पिछले साल से ही भारी उछाल दिख रही है। तभी तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल 2025 में सोने की खरीद में भारी कमी की है। यह पिछले 8 सालों में सबसे कम खरीद है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने 2025 में महज 4.02 टन सोना ही खरीदा। जबकि साल 2024 में रिजर्व बैंक ने 72.6 टन सोना खरीदा था। इसका मतलब है कि 2025 में RBI ने 2024 की तुलना में लगभग 94% कम सोना खरीदा।
RBI के पास कितना सोना है?
भले ही पिछले साल रिजर्व बैंक ने कम सोना खरीदा हो, लेकिन खरीद में कमी के बावजूद, RBI के पास कुल सोने का भंडार इस समय रिकॉर्ड स्तर पर है। साल 2025 के अंत तक, RBI के पास कुल 880.2 टन सोना था। एक साल पहले मतलब कि 2024 के अंत में यह 876.18 टन था। तभी तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोना एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। नवंबर 2025 तक, RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का मूल्य 100 अरब डॉलर से अधिक हो गया था।
विदेशी मुद्रा भंडार में सोना कितना
आप जान ही चुके हैं कि साल 2024 में रिजर्व बैंक ने सोने की बड़ी खरीदारी की थी। इसके बाद 2025 में सोने की कीमतों में भारी उछाल आया। इस साल भी यह बढ़ ही रही है। तभ्ज्ञी तो RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है। एक साल में यह हिस्सेदारी लगभग 10% से बढ़कर 16% हो गई है।
रिजर्व बैंक ने क्यों कम खरीदा सोना
RBI ने सोने की खरीद में यह कमी शायद इसलिए की है क्योंकि उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा पहले ही काफी बढ़ गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट कहती है, 'हमें लगता है कि यह भंडार प्रबंधन में एक सोची-समझी रणनीति का संकेत देता है। सोने की ऊंची कीमतें और विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी, आगे की खरीद की गति को प्रभावित कर सकती है।' RBI के अपने आंकड़ों के अनुसार साल 2021 के मार्च में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी (डॉलर में) केवल 5.87% थी। लेकिन सिर्फ पांच सालों में, RBI ने सोने की अपनी हिस्सेदारी को लगभग 6% से बढ़ाकर 16% कर दिया है।
रिजर्व बैंक का सोना कहां है?
यह जान कर काफी आश्चर्य होगा कि RBI का सारा सोना देश के अंदर नहीं रखा जाता है। उसके सोने के भंडार का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में सुरक्षित तिजोरियों में रखा गया है। RBI की विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन पर 5 मई को जारी हुई छमाही रिपोर्ट के अनुसार, 'मार्च 2025 तक, रिजर्व बैंक के पास 879.59 टन सोना था, जिसमें से 511.99 टन ही सोना देश में रखा गया था। जबकि 348.62 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रखा गया था। इसके अलावा, 18.98 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में था।'
ढेरों केंद्रीय बैंक खरीद रहे हैं सोना
ऐसा नहीं है कि सिर्फ अपना रिजर्व बैंक की सोना खरीद रहा है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक इस समय बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। दिसंबर 2025 तक, सभी केंद्रीय बैंकों के पास आधिकारिक तौर पर 32,140 टन सोना था। केंद्रीय बैंकों ने 2022 में सोना खरीदने पर ध्यान दिया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2022 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने 1,082 टन, 2023 में 1,037 टन और 2024 में रिकॉर्ड 1,180 टन सोना खरीदा। 2025 में भी, केंद्रीय बैंकों द्वारा 1,000 टन से अधिक सोना खरीदे जाने की उम्मीद है।
सोने की कीमतों में तेज उछाल
साल 2022 से सोने की कीमतों में लगभग 175% की वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई भारी खरीद है। 2025 में, सोने की कीमतों में 65% से अधिक की वृद्धि देखी गई, क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में थे।
लेखक के बारे मेंशिशिर चौरसियाशिशिर कुमार चौरसिया, नवभारत टाइम्स डिजिटल में बिजनेस एडिटर हैं। वह 26 से भी ज्यादा वर्षों से रेलवे, रोड, एविएशन के साथ-साथ फाइनेंस मिनिस्ट्री समेत अन्य मिनिस्ट्री की आर्थिक गतिविधियों को कवर कर रहे हैं। शिशिर पिछले 5 वर्षों से NBT (Digital) के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर ग्रुप के पिंक पेपर बिजनेस भास्कर, न्यूज एजेंसी यूनीवार्ता, राजस्थान पत्रिका और दिव्य हिमाचल जैसे अखबारों में काम किया है। उन्होंने रेलवे, राजमार्ग, शिपिंग की कई राज्यों की परियोजनाओं की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। उन्होंने रेलवे और टैक्शेसन पर कई विशेष सीरीज़ को चलाने में भी अपनी विशेषज्ञता दिखाई है। इस समय भी वह 'धन की बात' नाम से एक साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू कर रहे हैं जो आम आदमी के पर्सनल फाइनेंस और टैक्शेसन पर केंद्रित होता है। उन्होंने भागलपुर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए (Gold Medalist), IIMC (New Delhi Campus) से पत्रकारित में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से जनसंचार में एम.ए. की उपाधि हासिल की है।... और पढ़ें
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