Geopolitics
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RBI का BRICS में डॉलर संग खेल: भारतीय रुपया चमकेगा?
ABP News
January 20, 2026•2 days ago

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आरबीआई ने ब्रिक्स देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य सीमा-पार व्यापार और पर्यटन भुगतानों को तेज, सस्ता और आसान बनाना है। यह अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में भी मदद करेगा। प्रस्ताव को 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के एजेंडे में शामिल करने की सिफारिश की गई है, जिसकी मेजबानी भारत करेगा।
भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्यों) की आधिकारिक डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है. इस कदम से इन देशों के बीच सीमा-पार व्यापार (क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड) और पर्यटन से जुड़े पेमेंट्स ज्यादा आसान, तेज और सस्ते हो जाएंगे. साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है.
2026 BRICS समिट के एजेंडे में शामिल करने का प्रस्ताव
दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि RBI ने भारत सरकार को सिफारिश की है कि इस प्रस्ताव को 2026 BRICS समिट के एजेंडे में शामिल किया जाए. भारत ही इस साल इस समिट की मेजबानी करेगा. अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो BRICS में पहली बार सदस्य देशों की डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का औपचारिक मुद्दा उठेगा.
इस प्रस्ताव का मकसद क्या है?
BRICS देशों के बीच व्यापार और पर्यटन के पेमेंट को आसान बनाना.
पारंपरिक भुगतान सिस्टम की तुलना में कम समय और कम खर्च में लेन-देन पूरा करना.
भू-राजनीतिक तनाव (जैसे अमेरिका के साथ बढ़ते विवाद) के कारण डॉलर-आधारित सिस्टम (जैसे स्विफ्ट) पर कम निर्भर होना.
यह प्रस्ताव 2025 में रियो डी जनेरियो में हुए BRICS समिट के घोषणा-पत्र पर आधारित है, जिसमें सदस्य देशों के पेमेंट सिस्टम को एक-दूसरे से जोड़ने और क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन को बेहतर बनाने की बात कही गई थी.
BRICS देशों की डिजिटल मुद्राओं की स्थिति क्या है?
अभी तक BRICS के किसी भी मुख्य सदस्य ने अपनी डिजिटल मुद्रा को पूरी तरह लॉन्च नहीं किया है, लेकिन सभी पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं.
भारत की e-रुपये (डिजिटल रुपया) दिसंबर 2022 में लॉन्च हुई थी. अब तक इसके करीब 70 लाख रिटेल यूजर्स हैं.
RBI ने e-रुपये को बढ़ावा देने के लिए ऑफलाइन भुगतान, सरकारी सब्सिडी के लिए प्रोग्रामेबल फीचर और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल वॉलेट देने की सुविधा शुरू की है.
चीन अपने डिजिटल युआन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दे रहा है.
सभी देशों की मुद्राओं को मिलाने में चुनौतियां क्या हैं?
सूत्रों के मुताबिक, सदस्य देश दूसरों की बनाई तकनीकी प्लेटफॉर्म को अपनाने में हिचकिचा सकते हैं. सफल होने के लिए तकनीक की इंटरऑपरेबिलिटी (लगातार काम करने की क्षमता), गवर्नेंस के नियम और ट्रेड इम्बैलेंस को हैंडल करने के तरीके पर सहमति जरूरी होगी. एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रेड इम्बैलेंस को संभालने के लिए सेंट्रल बैंकों के बीच द्विपक्षीय विदेशी मुद्रा स्वैप व्यवस्था का विकल्प भी देखा जा रहा है.
ट्रंप ने ब्रिक्स को बताया था एंटी-अमेरिकन
RBI ने पहले भी कहा है कि वह भारत की डिजिटल मुद्रा को अन्य देशों की CBDC से जोड़ने में रुचि रखता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय लेनदेन तेज हों और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़े. लेकिन RBI ने साफ कहा है कि यह कोशिशें डॉलर को हटाने के लिए नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले BRICS को 'एंटी-अमेरिकन' कहा था और इसके सदस्यों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. हालांकि, यह प्रस्ताव BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है. अभी यह शुरुआती स्तर पर है और 2026 समिट में चर्चा के बाद ही आगे बढ़ेगा.
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