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भारतीय वायुसेना: राफेल के साथ 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी
Zee News
January 19, 2026•3 days ago
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भारतीय वायुसेना अपनी लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है। इसके साथ ही, रूस के पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 विमान को शामिल करने की लागत और व्यवहार्यता पर भी बातचीत चल रही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) रूस से सुखोई-57 के भारत में निर्माण की लागत का मूल्यांकन कर रही है, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही मिलने की उम्मीद है।
Indian Airforce: भारतीय वायुसेना (IAF) में लड़ाकू विमानों की संख्या लगातार कम हो रही है. इस स्थिति में सरकार कॉम्बैट की ताकत बढ़ाने के लिए एक बड़ा कैपिटल पुश की तैयारी कर रही है. माना जा रहा है कि जल्द ही भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लंबे समय से अटके प्रस्ताव को सरकार मंजूरी दे देगी. इसके अलावा खबर है कि रूस के पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 विमान को भारतीय वायुसेना में शामिल करने की लागत और व्यवहार्यता पर भी बातचीत चल रही है.
दरअसल, बताया जा रहा है कि सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भारत में सुखोई-57 के निर्माण के लिए रूस से विस्तृत लागत मूल्यांकन का इंतजार कर रही है. हालांकि, विमान को शामिल करने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि इस महीने के आखिरी तक रूस की ओर से रिपोर्ट मिलने की संभावना है. इस मूल्यांकन में प्रोजेक्ट को भारत में शुरू करने के लिए अनुमानित खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर की आश्यकताओं के बारे में बताया जाएगा.
पहले से सुखोई विमानों का बनाने का अनुभव
चूंकि, भारत को सुखोई विमानों को बनाने का काफी पहले से अच्छा अनुभव है. जानकारी दें कि रूस के साथ साल 2000 में हुए एक समझौते के तहत देश में 250 से अधिक सुखोई-30MKI लड़ाकू जेट बनाए जा चुके हैं. इन सभी को चौथी पीढ़ी का जेट माना जाता रहा है. हाल के दिनों में ही रूस की एक टेक्निकल टीम ने भारत में लड़ाकू विमानों को बनाने के लिए भारत की मौजूदा सुविधाओं का जायजा लेने के लिए यहां का दौरा किया था.
इस दौरे के दौरान भारत के अधिकारियों ने कथित तौर पर बताया कि भारत के पास पहले से ही सुखोई-57 बनाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का लगभग 50 प्रतिशत मौजूद है. इसके बाद रूस की टीम ने लागत और क्षमता के बारे में एक डिटेल रिपोर्ट देने का वादा किया है, जिसका इंतजार एचएएल कर रही है.
कहां-कहां HAL बनाता है ये लड़ाकू विमान
गौरतलब है कि वर्तमान में एचएएल के नासिक डिवीजन में सुखोई-30MKI की फाइनल असेंबली लाइन है, जबकि इसकी कोरापुट यूनिट AL-31FP टर्बोफैन इंजन का लाइसेंस वाला प्रोडक्शन करती है. इसके अलावा एवियोनिक्स और दूसरे जरूरी कंपोनेंट केरल में HAL की फैसिलिटीज में बनाए जाते हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, सुखोई-57 के लिए कैपेसिटी और लागत का असेसमेंट HAL की पहल पर ही किया जा रहा है और सरकार ने अभी तक यह भी तय नहीं किया है वह अंत में वह कौन सा पांचवीं पीढ़ी का फाइटर चुनेगी.
उल्लखनीय है कि भारत पहले से ही 4.5 पीढ़ी के राफेल जेट्स के साथ अपने बेड़े को मजबूत करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है. हालांकि, भारत में पांचवी पीढ़ी के विमानों के विकल्प सीमित हैं. इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि दुनिया में पांचवीं पीढ़ी के दो ही ऐसे फाइटर संभावित रूप से शामिल करने के लिए उपलब्ध हैं, इसमें अमेरिकी F-35 और रूसी सुखोई-57 शामिल है. वहीं, चीन पांचवी पीढ़ी का अपना खुद का J-20 विमान ऑपरेट करता है.
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भारत भी बना रहा पांचवी पीढ़ी का विमान
भारत भले अभी चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को खरीदने की योजना बना रहा हो, लेकिन इसके साथ ही एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के तहत अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट भी बनाने का काम कर रहा है. हालांकि, इसको पूरा होने में थोड़ा वक्त लगेगा. अगर सबकुछ ठीक रहा, तो माना जा सकता है कि यह स्वदेशी प्लेटफॉर्म 2035 के आसपास IAF में शामिल हो जाएगा.
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