Space & Astronomy
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मंगल पर जीवन की खोज: नासा के हटने के बाद चीन बना अकेला दावेदार
IND24
January 18, 2026•4 days ago

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नासा ने बजट की कमी के कारण मंगल ग्रह से नमूने वापस लाने का अपना मार्स सैंपल रिटर्न (MSR) प्रोग्राम रद्द कर दिया है। इसके चलते पर्सेवरेंस रोवर द्वारा एकत्र किए गए जीवन के संभावित सबूतों को पृथ्वी पर लाने की योजना अधूरी रह गई है। इस फैसले से चीन का तियानवेन-3 मिशन मंगल पर जीवन की खोज में अकेला दावेदार बन गया है, जो 2031 तक नमूने लाने का लक्ष्य रखता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी मार्स सैंपल रिटर्न (MSR) प्रोग्राम को कैंसिल कर दिया है। इसका सीधा अर्थ है कि नासा फिलहाल मंगल ग्रह पर जीवन के संभावित सबूतों को पृथ्वी तक लाने की योजना पर आगे नहीं बढ़ेगा। बजट की कमी इस फैसले की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है, जिसके चलते पर्सेवरेंस रोवर द्वारा एकत्र किए गए बेहद अहम सैंपल्स को वापस लाने की कोशिशें ठप पड़ गई हैं।
पर्सेवरेंस रोवर के सैंपल्स: अधूरा सपना
पर्सेवरेंस रोवर ने मंगल की सतह से करीब 30 भूवैज्ञानिक नमूने एकत्र किए हैं, जिनमें से एक को नासा ने अब तक का जीवन का सबसे स्पष्ट संकेत माना था। लेकिन अमेरिकी सीनेट द्वारा नए खर्च बिल को मंजूरी दिए जाने के बाद इन सैंपल्स की जांच की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है। अब यह संभावना जताई जा रही है कि ये नमूने 2040 से पहले पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाएंगे।
रणनीति बदली, लेकिन राह कठिन
नासा ने कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के बजाय अपनी रणनीति बदलने की बात कही है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि वह सैंपल लाने के लिए दो अलग-अलग तरीकों पर विचार कर रही है, जिनमें रॉकेट से चलने वाली स्काई क्रेन जैसी आजमाई हुई लैंडिंग तकनीक शामिल है। हालांकि इसकी अनुमानित लागत 6.6 से 7.7 अरब डॉलर के बीच बताई जा रही है, जो अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई है।
चीन के लिए सुनहरा अवसर: तियानवेन-3 मिशन
अमेरिका के कदम पीछे खींचने के बाद चीन मंगल पर जीवन की खोज में लगभग अकेला खिलाड़ी बनता नजर आ रहा है। चीन का तियानवेन-3 सैंपल रिटर्न मिशन अपेक्षाकृत आसान और सुरक्षित स्थान से चट्टानों के नमूने लाने की योजना पर काम कर रहा है। यह मिशन 2028 में लॉन्च होने और 2031 तक मंगल से सैंपल पृथ्वी पर लाने के लिए निर्धारित है।
अंतरिक्ष की रेस में बढ़त की संभावना
अगर मंगल से सैंपल लाने की इस पूरी प्रक्रिया को एक अंतरिक्ष रेस माना जाए, तो मौजूदा हालात में चीन इस दौड़ को अकेले दौड़कर जीत सकता है। ऐसा होना अंतरिक्ष विज्ञान और वैश्विक प्रतिष्ठा के स्तर पर अमेरिका पर चीन की बड़ी बढ़त मानी जाएगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मंगल जैसे जटिल मिशन में अंतिम सफलता तक पहुंचने से पहले कई तकनीकी और वैज्ञानिक बाधाएं आ सकती हैं।
एक्सपर्ट्स की राय: फैसला समझ से परे
साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिक और मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम एनालिसिस ग्रुप की चेयरपर्सन विक्टोरिया हैमिल्टन के अनुसार, MSR प्रोग्राम को कैंसिल करना यह दर्शाता है कि मंगल से सैंपल वापस लाना अमेरिका के लिए फिलहाल बेहद कठिन साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल बजट नहीं, बल्कि अंतरिक्ष प्राथमिकताओं में आए बदलाव को भी दर्शाता है।
मंगल की खोज का भविष्य: नया अध्याय
नासा के पीछे हटने और चीन के आगे बढ़ने से मंगल पर जीवन की खोज का संतुलन बदलता दिख रहा है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि क्या चीन वास्तव में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल कर पाता है या अंतरिक्ष की यह दौड़ किसी नए मोड़ पर पहुंचती है। इतना तय है कि लाल ग्रह की रहस्यमयी कहानी अब और भी रोमांचक होने वाली है।
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