Politics
11 min read
ऑपरेशन त्रासी: किश्तवाड़ में जैश के आतंकियों का खात्मा
Jagran
January 19, 2026•3 days ago
-1768835975547_m.webp)
AI-Generated SummaryAuto-generated
किश्तवाड़ में 'ऑपरेशन त्राशी' के तहत जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के बंकरनुमा ठिकाने को ध्वस्त किया गया। इस मुठभेड़ में एक सैन्यकर्मी बलिदान हुआ, हालांकि आतंकी घेराबंदी तोड़ भागने में सफल रहे। यह इस वर्ष किश्तवाड़ में पहली मुठभेड़ है, जिसमें आतंकियों के मजबूत स्थानीय नेटवर्क और प्रशिक्षण का खुलासा हुआ।
नवीन नवाज, जम्मू। किश्तवाड़ एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन दुनिया के सबसे महंगे मसाले केसर की पैदावार या फिर प्रदेश के विभिन्न भागों को रोशन कर रही जलविद्युत परियोजनाओं के लिए नहीं, बल्कि ऑपरेशन त्राशी के लिए। किश्तवाड़ को एक बार फिर अपना गढ़ बना रहे आतंकियों को खदेड़ने के लिए चलाया गया अभियान।
ऑपरेशन त्राशी में एक सैन्यकर्मी जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों द्वारा लगाई गई घात में बलिदान को प्राप्त हो चुका है। आतंकियों का बंकरनुमा ठिकाना नष्ट किया जा चुका है, लेकिन आतंकी फिलहाल घेराबंदी तोड़ भागने में कामयाब रहे हैं। यह मौजूदा वर्ष में किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच पहली मुठभेड़ है।
बंकर जैसा बनाया है ठिकाना
इस अभियान में जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह आतंकियों की ट्रेनिंग या उनके विदेशी मूल के होने से जुड़ा नहीं है। यह उनके ठिकाने से जुडा है।
यह ठिकाना सिर्फ ठिकाना नहीं है, यह छोटा बंकर है और ठीक वैसा है, जैसा अग्रिम इलाकों में कई जगह सैनिकों ने अपने निगरानी मोर्च के तौर पर बनाया होता है। यह पेड़ों के बीच, एक पहाड़ी ढलान पर ऐसे बनाया गया था कि आसानी से किसी को नजर नहीं आता था। राशन भी लगभग छह माह के लिए जमा था।
किश्तवाड़ में पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय
किश्तवाड़ जिसे एक 15 वर्ष पूर्व पहले तक आतंकवाद मुक्त बनाने का दावा किया जा रहा था, अपनी भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के चलते बीते आठ साल से पुन: आतंकी गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
जिला किश्तवाड़ में ही प्रदेश का सबसे पुराना और बूढ़ा आतंकी जहांगीर सरुरी सक्रिय है और उसके साथ दो अन्य स्थानीय युवक, लेकिन यह सिर्फ तीन नहीं हैं, इनमें 13 से 30 होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ज्ञात स्थानीय आतंकियों के अलावा जो भी आतंकी जिला किश्तवाड़ में सक्रिय हैं, वह सभी पाकिस्तानी ही हैं और जो स्थानीय लोग कभी कभार उनके संपर्क में आए हैं या फिर सुरक्षा एजेंसियाें ने आतंकियों के पकड़े गए ओवरग्राउंड वर्करों से जो जानकारी जुटाई है, उसके आधार पर यही कहा जाता है कि यह आतंकी न सिर्फ इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों से पूरी तरह परिचित हैं, बल्कि जंगल वारफेर, माउंटेनवारफेर और गुरिल्ला वारफेर में पूरी तरह प्रशिक्षित हैं।
अपने हैंडलरों से ऐसे संपर्क करते हैं आतंकी
यह किसी आम नागरिक के संपर्क में तभी आते हैं, जब उन्हें कोई खास जरूरत होती है। यह अपने ओवरग्राउंड वर्कर से या सीमा पार बैठे अपने हैंडलरों से कुछ विशेष मोबाइल ऐप्स के जरिए ही संपर्क करते हैं। अपने लिए यह साजो सामान जुटाने के लिए यह किसी एक ओवरग्राउंड वर्कर पर निर्भर नहीं रहते और किसी को अपने ठिकाने तक आने भी नहीं देते।
किश्तवाड़ में जारी आतंकरोधी अभियान से जुढ़े सूत्रों ने बताया किकिश्तवाड़ से लेकर जिला कठुआ तक सक्रिय आतंकियों में एक बात समान है। यह जंगल में ही ज्यादा रहते हैंऔर इन्होंने जंगलों मं जहां भी ठिकाना बनाया है, उसे इन्होंने एक मिनी बंकर की शक्ल दी है।
ग्रुप में चलते हैं आतंकी
जंगलों में प्राकृतिक गुफाओं का भी यह इस्तेमाल करते हैं और जहां गुफा न मिले, वहां यह जंगल में जमीन खोदकर और उसके साथ थोड़े बहुत पत्थरों को जोड़कर अपने रहने लायक जगह बनाते हैं। यह किसी ग्रामीण के साथ तभी संपर्क करते हैं जब इनके लिए बहुत जरूरी हो और यह दो-तीन या फिर चार के समूह में चलते हैं।
इन्हें मालूम है कि इनके ठिकाने से कितनी दूर तक सुरक्षाबलों की मौजूदगी है। यह जब किसी ग्रामीण से संपर्क करते हैं, तो इन्हें पता रहता है कि इनके जाने के कितनी देर बाद सुरक्षाबल वहां पहुंच सकते हैं।
आतंकियों का स्थानीय नेटवर्क मजबूत
उन्होंने बताया कि किश्तवाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां आतंकियों की पूरी मदद करती है। किश्तवाड़ को डोडा, उधमपुर, कठुआ के अलावा कश्मीर घाटी के जिला अनंतनाग से जोड़ने वाले कई प्राकृतिक रास्ते हैं।इसलिए यह आतंकियों के लिए एक कॉरिडोर की तरह काम करता है।
इस पूरे क्षेत्र के कई आतंकी इस समय पाकिस्तान में हैं और उनका स्थानीय नेटवर्क इन आतंकियों के लिए आंख नाक कान बना हुआ है। इसके अलावा किश्तवाड़ के ऊपरी भागों में कई चरागाहें हैं जो सर्दियों में खाली रहती हैं और यह उनका इस्तेमाल भी करते हैं।
Rate this article
Login to rate this article
Comments
Please login to comment
No comments yet. Be the first to comment!
