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केरल में मंकीपॉक्स का नया खतरनाक वेरिएंट: पुणे की स्टडी से बड़ी ख़बर
Navbharat Times
January 21, 2026•1 day ago
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केरल में मंकीपॉक्स का एक नया और अधिक खतरनाक वेरिएंट, Clade Ib, पाया गया है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि यह वेरिएंट अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़ा है और तेजी से इंसानों में फैल रहा है। इस वेरिएंट में ऐसे म्यूटेशन मिले हैं जो इसे पुराने वेरिएंट्स से अधिक संक्रामक बनाते हैं।
पुणे: केरल में मंकीपॉक्स के एक नए और ज्यादा खतरनाक वेरिएंट का पता चला है। इस पर हुई एक नई जेनेटिक स्टडी में पता चला है कि यह वेरिएंट अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़ा है और इंसानों से इंसानों में फैल रहा है। यह स्टडी पुणे के आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और देश भर की वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज की टीमों ने मिलकर की है।
मंकीपॉक्स का मिला नया वेरिएंट
यह स्टडी मंकीपॉक्स के Clade Ib वेरिएंट पर केंद्रित थी। यह वेरिएंट अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पहले से ही फैल रहा था और अब कई देशों में भी पाया गया है। स्टडी में पाया गया कि यह वेरिएंट पुराने वेरिएंट्स की तुलना में तेजी से और ज्यादा बड़े पैमाने पर फैल सकता है। इस वजह से इस वेरिएंट पर ज्यादा नजर रखने की जरूरत है। शोधकर्ताओं ने सितंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच केरल में मंकीपॉक्स Clade Ib के 10 लैब-पुष्टि मामलों का अध्ययन किया। इस स्टडी के नतीजे 'वायरोलॉजी' जर्नल में छपे हैं। इनसे पता चलता है कि वायरस में लगातार बदलाव आ रहे हैं, जो बीमारी की निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मंकीपॉक्स वायरस में मिला म्यूटेशन पैटर्न
स्टडी के एक शोधकर्ता ने बताया कि स्टडी ने इस बात की पुष्टि की है कि मंकीपॉक्स वायरस वाकई में बदल रहा है। उन्होंने कह कि हमें एक खास तरह का म्यूटेशन पैटर्न मिला है, जो इंसानों से इंसानों में लगातार फैलने का संकेत देता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि Clade Ib में यह म्यूटेशन पैटर्न पुराने वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा मजबूत था। इससे पता चलता है कि वायरस फैलते हुए खुद को ढाल रहा है। स्टडी में शामिल एक वैज्ञानिक ने कहा कि वायरस के जेनेटिक सीक्वेंस में कई जीन्स में ऐसे म्यूटेशन भी मिले, जिन्हें पहले डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के Clade Ib स्ट्रेन में भी पाया गया था। उन्होंने बताया कि यह अलग-अलग जगहों पर वायरस के एक जैसे बदलावों की ओर इशारा करता है।
विदेश यात्रा करने वाले 10 में से 9 मरीज पॉजिटिव
10 में से 6 मामलों में एक नया म्यूटेशन (बदलाव) पाया गया। शोधकर्ताओं ने मरीजों के लक्षणों, शरीर में वायरस की मात्रा (वायरल लोड), इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया और वायरस के पूरे जेनेटिक सीक्वेंस का अध्ययन किया। नतीजों से पता चला कि वायरस भारत में किसी एक व्यक्ति से नहीं आया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े एक बड़े क्षेत्रीय फैलाव का हिस्सा था। महामारी विज्ञान के विश्लेषण से पता चला कि 10 में से नौ मरीजों ने पॉजिटिव पाए जाने से पहले विदेश यात्रा की थी। एक व्यक्ति में स्थानीय स्तर पर संक्रमण का मामला सामने आया, जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा का इतिहास रखने वाले परिवार के सदस्य के करीबी संपर्क से फैला था।
भारत में 2024 में डिटेक्ट हुआ था मामला
यात्रा से जुड़े Clade Ib के शुरुआती मामले भारत में 2024 में ही डिटेक्ट हो गए थे। यह तब हुआ जब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने फरवरी 2025 में दुनिया भर में Clade Ib का पहला मामला आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट किया था। स्टडी का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा हब में अनडिटेक्टेड (पता न चले) या कम रिपोर्ट हुए संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। इस रिसर्च टीम में डॉ. प्रज्ञा यादव, डॉ. रीमा आर. सहाय और डॉ. अनीता एम. शेटे जैसे वैज्ञानिक शामिल थे।
लेखक के बारे मेंएनबीटी डेस्कदेश, दुनिया, खेल की खबर हो या फिर सियासत के गलियारों की अंदर की बात, हर खबर आप तक पहुंचाता है NBT न्यूज डेस्क।... और पढ़ें
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