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कर्नल सोफिया कुरैशी केस: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार से की महत्वपूर्ण पूछताछ
AajTak
January 19, 2026•3 days ago

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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में मध्य प्रदेश सरकार से मंत्री कुंवर विजय शाह पर केस चलाने की मंजूरी पर अब तक फैसला न लेने पर सवाल उठाए हैं। SIT ने अगस्त 2025 में जांच पूरी कर ली थी। कोर्ट ने सरकार को दो हफ्ते में मंजूरी पर फैसला लेने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। SIT को पुराने मामलों की भी जांच करने को कहा गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के बीजेपी मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ जांच पूरी हो जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक अभियोजन की मंजूरी न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त सवाल उठाए हैं.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि विशेष जांच टीम (SIT) ने अगस्त 2025 में ही अपनी जांच पूरी कर ली थी और राज्य सरकार से अभियोजन (केस चलाने) की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है. कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि कानून के तहत सरकार पर समय पर निर्णय लेने की वैधानिक जिम्मेदारी है.
सुनवाई के दौरान CJI ने सीधे तौर पर पूछा, 'क्या हम सही समझ रहे हैं कि SIT ने राज्य सरकार से कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी है और सरकार अब तक उस पर चुप बैठी हुई है?'
कोर्ट में मौजूद SIT के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें अब DIG इंटेलिजेंस के तौर पर नियुक्त किया गया है. इस पर कोर्ट ने SIT की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में दो पुराने मामलों का भी जिक्र है, उनमें एक नवंबर 2020 का और दूसरा उससे पहले का. हालांकि, इन मामलों को मौजूदा जांच में शामिल नहीं किया गया.
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CJI ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समय की कमी के कारण अगर उन मामलों को छोड़ा गया है तो SIT को उम्मीद है कि वो उन आरोपों की भी जांच पूरी करेगी. कोर्ट ने ये भी रिकॉर्ड किया कि SIT का गठन खुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था और पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी गई है. रिपोर्ट के पैरा 10.2 में कुछ पुराने बयानों का जिक्र है, जिन्हें फिलहाल बाहर रखा गया.
SIT ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 217 के तहत राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजकर अभियोजन की पूर्व अनुमति मांगी थी, जो कि किसी मंत्री के खिलाफ कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के लिए जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, 'राज्य सरकार को कानून के मुताबिक अभियोजन की मंजूरी देने या न देने पर फैसला करना ही होगा.' कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो दो हफ्ते के भीतर अभियोजन की मंजूरी पर फैसला लेकर अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे. इसके साथ ही SIT को ये भी निर्देश दिया गया है कि वो रिपोर्ट में बताए गए अन्य पुराने मामलों की भी जांच कर रिपोर्ट सौंपे. मामले की अगली सुनवाई अब राज्य सरकार की अनुपालन रिपोर्ट और SIT की अतिरिक्त जांच रिपोर्ट के बाद होगी.
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