Geopolitics
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JF-17 थंडर: क्या पाकिस्तान का एयरस्पेस में ढकोसला सच है?
AajTak
January 20, 2026•2 days ago

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पाकिस्तान JF-17 थंडर जेट के निर्यात को लेकर बढ़ा-चढ़ाकर प्रचार कर रहा है. दावों के विपरीत, इस स्वदेशी जेट की वास्तविक निर्यात स्थिति कमजोर है, जिसमें म्यांमार और नाइजीरिया जैसे देशों को हुई तकनीकी समस्याओं का उल्लेख है. यह प्रचार रक्षा निर्माण शक्ति दिखाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.
हाल के हफ्तों में पाकिस्तान JF-17 थंडर फाइटर जेट को लेकर जोर-शोर से प्रचार कर रहा है. दावा किया जा रहा है कि यह स्वदेशी जेट दुनिया भर में बहुत डिमांड में है. कई देश इसे खरीदने वाले हैं. लेकिन हकीकत में यह ज्यादातर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स तक ही सीमित है.
असल हवाई युद्ध और एयरस्पेस में नहीं. पाकिस्तान इसे अपनी रक्षा ताकत दिखाने और ऑपरेशन सिंदूर में कथित जीत का प्रचार करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, हालांकि ऑपरेशन में मुख्य रूप से चीनी J-10C जेट शामिल थे, JF-17 नहीं.
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JF-17 क्या है?
JF-17 थंडर एक हल्का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर बनाया है. पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) में इसका उत्पादन होता है. यह सस्ता माना जाता है, लेकिन रूसी इंजन (RD-93) और चीनी एवियोनिक्स पर निर्भर है. पाकिस्तान साल में 20-25 जेट बना पाता है.
2026 में क्या दावे किए जा रहे हैं?
2026 की शुरुआत से रॉयटर्स के पाकिस्तान में पत्रकार साद सईद ने कई रिपोर्ट्स प्रकाशित कीं. इनमें कहा गया कि JF-17 को बांग्लादेश, सूडान, इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे देश खरीदने वाले हैं.
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सऊदी अरब के साथ 'जेट्स-फॉर-लोन्स' डील की बात – 2 बिलियन डॉलर के लोन को JF-17 में बदलने की. लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई बातचीत की जानकारी नहीं है. सऊदी के पास पहले से F-15, यूरोफाइटर टाइफून और F-35 जैसे एडवांस्ड जेट हैं.
सूडान के साथ 1.5 बिलियन डॉलर का डील.
इंडोनेशिया के साथ 40+ JF-17 जेट्स की बातचीत.
बांग्लादेश के साथ डिफेंस पैक्ट और JF-17 बिक्री की चर्चा.
दिसंबर 2025 में लीबिया (खलीफा हफ्तार की लिबियन नेशनल आर्मी) के साथ 4 बिलियन डॉलर का डील, जिसमें 16 JF-17 शामिल बताए गए. लेकिन लीबिया पर UN आर्म्स एम्बार्गो है, इसलिए सवाल उठ रहे हैं.
ये रिपोर्ट्स ज्यादातर अनाम सूत्रों पर आधारित हैं. कोई ठोस कॉन्ट्रैक्ट, डिलीवरी टाइमलाइन या आधिकारिक घोषणा नहीं. कई पाकिस्तानी खुद इन दावों को उथला और फार्सिकल बता रहे हैं.
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JF-17 की असली निर्यात स्थिति क्या है?
अब तक सिर्फ दो विदेशी ग्राहक हैं...
म्यांमार: 2015 में 16 JF-17 खरीदे, लेकिन कई समस्याएं आईं – सबस्टैंडर्ड एवियोनिक्स, स्ट्रक्चरल फ्लॉ (संरचनात्मक दोष), स्पेयर पार्ट्स की कमी. कई जेट ग्राउंडेड हो गए, ऑपरेशनल नहीं रहे.
नाइजीरिया: सिर्फ 3 JF-17 खरीदे, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियां, रडार की समस्या और मेंटेनेंस इश्यूज. ज्यादा ऑर्डर नहीं दिए.
ये समस्याएं JF-17 की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं. पाकिस्तान के पास मजबूत इंडस्ट्रियल बेस नहीं है – चीनी पार्ट्स और रूसी इंजन पर निर्भरता ज्यादा है.
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क्यों हो रहा है यह प्रचार?
पाकिस्तान की सरकार और मिलिट्री इसे डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पावर दिखाने के लिए इस्तेमाल कर रही है. 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) में JF-17 को बैटल-प्रूवन बताकर प्रचार किया जा रहा है, जबकि मुख्य भूमिका J-10C की थी. सोशल मीडिया पर नैरेटिव वॉरफेयर चल रहा है, जहां हकीकत से ज्यादा दावे किए जा रहे हैं.
JF-17 एक उपयोगी जेट हो सकता है, लेकिन इसका निर्यात अभी बहुत सीमित है. 2026 की रिपोर्ट्स ज्यादातर बातचीत या अटकलों पर आधारित हैं, कोई बड़ा ऑर्डर बुक नहीं दिखता. पाकिस्तान के ये सपने सिर्फ न्यूज साइकिल जीत सकते हैं, लेकिन मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम नहीं बना सकते. रिपोर्टः अतिशय जैन
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