Geopolitics
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पीएम सनई तकाईची ने जापान को चुनाव में क्यों झोंका?
AajTak
January 19, 2026•3 days ago

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जापान की प्रधानमंत्री सनई तकाईची ने संसद के निचले सदन को भंग कर दिया है, जिससे समय से पहले आम चुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ है। 8 फरवरी को मतदान की संभावना है। तकाईची जनता से नया जनादेश मांग रही हैं और उनके नेतृत्व का यह पहला बड़ा परीक्षण होगा। यह चुनाव उनके नए गठबंधन और नीतियों पर जनता की मुहर लगाने का अवसर है।
जापान की प्रधानमंत्री सनई तकाईची ने सोमवार को संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' को भंग करने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही देश में समय से पहले आम चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. क्योदो न्यूज के मुताबिक मतदान 8 फरवरी को होने की संभावना है, जबकि आधिकारिक चुनाव प्रचार 27 जनवरी से शुरू होगा.
प्रधानमंत्री तकाईची ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वो जनता से नया जनादेश लेना चाहती हैं और चुनाव के नतीजों को अपने प्रधानमंत्री पद से जोड़ा है. निचले सदन को भंग करने का फैसला पिछले शुक्रवार को लिया गया था, जिसे संसद के मौजूदा सत्र के पहले ही दिन लागू किया गया.
ये चुनाव तकाईची के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला आम चुनाव होगा. उन्होंने 21 अक्टूबर को जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर पद संभाला था. इसके अलावा, ये पहला चुनाव है जब उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) के साथ नया गठबंधन किया है.
तकाईची अपनी कैबिनेट की मजबूत लोकप्रियता के सहारे चुनाव में उतर रही हैं. उनका कहना है कि वो ‘जिम्मेदार लेकिन आक्रामक’ आर्थिक नीतियों के लिए जनता का समर्थन चाहती हैं, साथ ही नए गठबंधन को भी स्थिर जनादेश दिलाना चाहती हैं. गौरतलब है कि ये चुनाव पिछले निचले सदन चुनाव के महज 18 महीने के भीतर हो रहा है. पिछला आम चुनाव अक्टूबर 2024 में हुआ था.
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जापान में क्यों जरूरी है ये स्नैप इलेक्शन?
जापान में निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) का भंग होना हमेशा बड़े सियासी संकेत देता है. मौजूदा स्नैप इलेक्शन इसलिए अहम है क्योंकि ये प्रधानमंत्री सानाए तकाईची के नेतृत्व की पहली बड़ी लोकतांत्रिक परीक्षा मानी जा रही है. अक्टूबर 2025 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने के बाद तकाईची ने आर्थिक सुधार, सरकारी खर्च बढ़ाने और सुरक्षा नीति को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है.
इस चुनाव के जरिए वो न सिर्फ अपनी नीतियों पर जनता की मुहर चाहती हैं, बल्कि हाल ही में बनी एलडीपी-जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) गठबंधन सरकार की स्थिरता भी परखना चाहती हैं. खास बात ये है कि यह चुनाव पिछले आम चुनाव के 18 महीने के भीतर हो रहा है, जो जापान की राजनीति में असामान्य माना जाता है.
महंगाई, टैक्स नीति, रक्षा खर्च और जनसंख्या संकट जैसे मुद्दे इस चुनाव के केंद्र में रहने वाले हैं. नतीजे तय करेंगे कि तकाईची का 'मजबूत नेतृत्व' जनता को भरोसे में ले पाया या नहीं.
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