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विदेशमंत्री जयशंकर ने 'PAK प्रेम' पर क्या कहा? पोलैंड का रूस राग और भारत का लॉजिक
News18 Hindi
January 20, 2026•2 days ago

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड को पाकिस्तान को हथियार न देने की सलाह दी, क्योंकि इससे सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है। पोलैंड के विदेश मंत्री ने जवाब में भारत के रूस के साथ सैन्य अभ्यास पर चिंता जताई। जयशंकर ने इस तुलना को बचकाना बताते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है, जबकि रूस एक संप्रभु राष्ट्र है, और भारत के रूस के साथ संबंध रक्षात्मक हैं।
Written by :
Gyanendra Mishra
Agency:News18Hindi
Last Updated:January 20, 2026, 19:51 IST
S Jaishankar Poland News: जयशंकर ने पोलैंड को जो संदेश दिया, वह नए भारत का संदेश है. भारत अब चुपचाप यह नहीं सुनेगा कि उसे किससे दोस्ती रखनी चाहिए और किससे नहीं. पोलैंड के विदेश मंत्री का यह तर्क कि चूंकि आप रूस के साथ ड्रिल करते हैं, इसलिए हम पाकिस्तान की मदद करेंगे या हमारे पाकिस्तान प्रेम पर सवाल मत उठाइए... पूरी तरह से बचकाना है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की को ‘पाकिस्तान प्रेम’ पर सुनाया. उनके सामने ही कहा कि भारत के पड़ोस (पाकिस्तान) में जो आतंक की फैक्ट्रियां चल रही हैं, उन्हें खाद-पानी देना बंद कीजिए. जयशंकर का इशारा साफ था कि ‘अगर आप पाकिस्तान के दोस्त हैं और उसे हथियार दे रहे हैं, तो आप भारत की सुरक्षा से खेल रहे हैं. यह बात सुनकर पोलैंड के विदेश मंत्री तिलमिलाया उठे. लेकिन इस तिलमिलाहट में वे तार्किक जवाब देने की बजाय वही पुराना घिसा-पिटा रूस का राग अलापने लगे.
पहले जानिए जयशंकर ने कहा क्या था, जो वायरल हो गया. जयशंकर सिकोरस्की के सामने ही कहा, उपप्रधानमंत्री जी, आप इस क्षेत्र से अनजान नहीं हैं और आपको लंबे समय से चुनौती बने हुए सीमा-पार आतंकवाद के बारे में भी जानकारी है. मुझे उम्मीद है कि हम इस बैठक में आपके इस क्षेत्र के हालिया दौरों के बारे में भी चर्चा करेंगे. पोलैंड को आतंकवाद के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस दिखाना चाहिए और हमारे पड़ोस में टेररिस्ट इन्फ़्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने में मदद नहीं करनी चाहिए. जयशंकर ने तल्खी अंदाज में समझाया कि आप जो कर रहे हैं वो ठीक नहीं है. जयशंकर ने पोलैंड को याद दिलाया कि भारत दशकों से जिस आतंकवाद का सामना कर रहा है, उसके तार उसके पड़ोसी देश (पाकिस्तान) से जुड़े हैं. और जब कोई यूरोपीय देश उस पड़ोसी देश के साथ रक्षा सौदे करता है या उसके साथ खड़ा दिखता है, तो यह भारत के लिए चिंता का विषय है.
यह बयान पोलैंड के लिए असहज करने वाला था क्योंकि पोलैंड और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग लंबे वक्त से चल रहा है. ड्रोन और टैंकों से जुड़े उपकरण खरीदते बेचते रहे हैं. भारत ने साफ कर दिया कि आप एक तरफ भारत से अच्छी दोस्ती की बात करें और दूसरी तरफ हमारे दुश्मनों को हथियार दें, यह अब नहीं चलेगा.
पोलैंड का पलटवार: तर्क नहीं, सिर्फ रूस का बहाना
जयशंकर की इस खरी-खरी के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की बचाव की मुद्रा में आ गए. लेकिन पाकिस्तान के मुद्दे पर सफाई देने के बजाय, उन्होंने गेंद को घुमाकर रूस की तरफ फेंक दिया. सिकोरस्की ने कहा, हमें भी इस बात की चिंता है कि भारत, रूस में मिलिट्री एक्सरसाइज करता है. उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि भारत का रूस के साथ खड़ा होना पाखंड है. उनका तर्क था कि एक तरफ भारत लोकतंत्र की बात करता है और दूसरी तरफ यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस के साथ युद्धाभ्यास करता है. पोलिश मंत्री ने भारतीय मीडिया के सामने भारत को घेरने की कोशिश की, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि उनका यह बयान कुतर्क से ज्यादा कुछ नहीं.
पोलैंड के ‘लॉजिक’ में कहां है झोल?
पोलैंड के विदेश मंत्री ने भारत के रूस संबंधों की तुलना पाकिस्तान के साथ पोलैंड के रिश्तों से करने की कोशिश की, जो कि सेब और संते की तुलना करने जैसा है. यहां समझिए कि सिकोरस्की का लॉजिक क्यों फेल है.
पाकिस्तान दुनिया भर में आतंकवाद का केंद्र माना जाता है. पाकिस्तान की नीति स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म की रही है. अगर पोलैंड पाकिस्तान को हथियार या तकनीक देता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि उसका इस्तेमाल आतंकवादियों द्वारा भारत के खिलाफ किया जाएगा. वहीं, रूस एक संप्रभु राष्ट्र है. भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं और ये संबंध किसी तीसरे देश जैसे पोलैंड पर आतंकवादी हमला करने के लिए नहीं हैं. भारत रूस से हथियार अपनी रक्षा के लिए खरीदता है, आतंकवाद फैलाने के लिए नहीं.
भारत रूस के साथ जो सैन्य अभ्यास करता है, वह दो सेनाओं के बीच का प्रोफेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज है. इसका उद्देश्य किसी देश पर आक्रमण करना नहीं होता. लेकिन पाकिस्तान को दी गई मदद का इतिहास गवाह है कि उसका इस्तेमाल हमेशा भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए हुआ है. पोलैंड का यह कहना कि “भारत की रूस के साथ ड्रिल से हमें डर लगता है”, एक बेतुका बयान है क्योंकि भारत की सेना ने कभी किसी यूरोपीय देश पर हमला नहीं किया.
यूरोप की सबसे बड़ी दिक्कत यही है, जिसे जयशंकर पहले भी कह चुके हैं. यूरोप को लगता है कि यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं जैसे आतंकवाद, यूरोप की समस्याएं नहीं हैं. पोलैंड चाहता है कि भारत यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को छोड़ दे, क्योंकि इससे पोलैंड को खतरा महसूस होता है. लेकिन जब भारत कहता है कि पाकिस्तान से हमें खतरा है, तो पोलैंड उसे नजरअंदाज कर देता है. यही वह हिपोक्रेसी है जिसे जयशंकर ने उजागर किया था.
‘दोस्त’ वही जो सच बोले
पोलैंड के मंत्री ने जिस तरह भारतीय मीडिया के सामने हिपोक्रेसी शब्द का इस्तेमाल किया या चिंता जताई, वह असल में उनकी अपनी घबराहट को दिखाता है. भारत आज अपनी शर्तों पर विदेश नीति चला रहा है. भारत ने यूक्रेन में शांति की वकालत की है और पीएम मोदी ने वहां का दौरा भी किया. लेकिन भारत ने रूस से अपनी पुरानी दोस्ती को भी नहीं तोड़ा. दूसरी तरफ, पोलैंड जैसे देश जब पाकिस्तान के साथ रक्षा सौदे करते हैं, तो वे अनजाने में ही सही, दक्षिण एशिया में आग भड़काने वाली ताकतों को मजबूत करते हैं.
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Gyanendra Mishra
Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें
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Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
January 20, 2026, 19:51 IST
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