Friday, January 23, 2026
Geopolitics
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ईरान पर अमेरिकी हमला: दो फोन कॉल से कैसे टला युद्ध?

AajTak
January 19, 20263 days ago
आर्मी तैयार, एयरस्पेस बंद... बुधवार को ईरान पर अटैक होने वाला था, फिर ट्रंप के पास आए दो फोन कॉल...

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ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को राष्ट्रपति ट्रंप ने दो फोन कॉलों के बाद टाल दिया. इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और सऊदी क्राउन प्रिंस ने क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता जताई. ईरान से एक कूटनीतिक संदेश भी ट्रंप के फैसले को प्रभावित करने में सहायक रहा, जिससे तनाव कम हुआ.

ईरान पर बुधवार को अमेरिकी हमला होने ही वाला था. सुरक्षा के लिहाज से कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस अल उदैद को अमेरिकी सेनाओं ने खाली करना शुरू कर दिया था. बहरीन से अमेरिकी नेवी की पांचवीं फ्लीट को भी खाली कर दिया गया था. ईरानी सरकार को यकीन था कि अमेरिका हमला करने वाला है और उसने अपना एयरस्पेस बंद करने का नोटिस जारी कर दिया. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "यह नकली या कोई चाल नहीं थी." इस बीच सबका ध्यान बुधवार दोपहर को ट्रंप द्वारा अपनी टॉप नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बुलाई जाने वाली एक अहम मीटिंग पर चला गया. लेकिन घंटों बीत गए और व्हाइट हाउस से कोई खबर नहीं आई. ट्रंप ने रुकने का फैसला किया था. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, "वह स्थिति पर नजर रखना जारी रखना चाहते थे." दूसरे अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "यह बहुत करीब था. सेना बहुत तेजी से कुछ करने की स्थिति में थी, लेकिन आदेश नहीं आया." इस पहले दिन में पहले हुई एक कॉल में एक चौंकाने वाली आवाज ने राष्ट्रपति ट्रंप को सावधानी बरतने की सलाह दी थी. ये आवाज थी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की. Advertisement उन्होंने ट्रंप से कहा कि इजरायल ईरान के संभावित जवाबी हमले से खुद का बचाव करने के लिए तैयार नहीं है, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिका के पास इस क्षेत्र में इतने लाव-लश्कर नहीं हैं कि वह इज़रायल को ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में मदद कर सके. इसके अलावा प्रधानमंत्री नेतन्याहू के एक सलाहकार ने कहा कि नेतन्याहू को लगा कि मौजूदा अमेरिकी प्लान काफी मज़बूत नहीं है और असरदार नहीं होगा. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप से बात की और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके नतीजों को लेकर गहरी चिंता जताई. हालांकि ट्रंप के मन की बात जानना मुश्किल है, लेकिन कई अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि नेतन्याहू की चेतावनी और ट्रंप की टीम द्वारा अमेरिकी सेना पर ईरानी जवाबी कार्रवाई से होने वाले खतरों के बारे में दी गई जानकारी वो कदम थे, जिसकी वजह से ट्रंप ने फिलहाल पीछे हटना मंजूर किया. हालांकि ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें किसी ने सलाह नहीं दी बल्कि उन्होंने खुद को मनाया. एक बड़ा फैक्टर यह था कि जून में ईरान के साथ पिछली झड़प के बाद से अमेरिका की कई सेनाओं और हथियारों को कैरेबियन और ईस्ट एशिया में भेज दिया गया था. Advertisement कुछ अधिकारियों ने कहा कि "वॉर थिएटर तैयार नहीं था" और इससे अमेरिका के पास मौजूद ऑप्शन सीमित हो गए थे. अगर ईरान जवाबी हमला करता और युद्ध का विस्तार हो जाता तो मुश्किल पैदा हो सकती थी. एक जानकार सूत्र ने कहा, "हमने एक तरह से मौका गंवा दिया." हालांकि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के पास इस क्षेत्र में पर्याप्त हथियार हैं. ट्रंप के फैसले को प्रभावित करने में एक और फैक्टर था. दरअसल ट्रंप प्रशासन के अधिकारी विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अराघची के बीच एक डिप्लोमैटिक बैक चैनल के ज़रिए बात हो रही थी. दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार बुधवार सुबह अराघची ने विटकॉफ को टेक्स्ट मैसेज भेजकर प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना को रोकने और "हत्याएं बंद करने" का वादा किया. इसके बाद ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात की और ईरानियों से मिले मैसेज के बारे में बताया. इस समय तक अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह साफ था कि ट्रंप कम से कम कुछ समय के लिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे. गुरुवार को ट्रंप ने माना कि ईरानियों से मिले मैसेज का उनके फैसले पर काफी असर पड़ा था. Advertisement एक व्हाइट हाउस अधिकारी ने कहा, "इसका असर तो हुआ, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं था. ---- समाप्त ----

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