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बजट 2026: इनकम टैक्स पर बड़े एलान की उम्मीद
CNBC TV18
January 18, 2026•4 days ago

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बजट 2026 में नए इनकम टैक्स रिजीम को बेहतर बनाने की उम्मीद है। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने, HRA और मेडिकल इंश्योरेंस जैसी सीमित छूटें जोड़ने की मांग उठ रही है। इसका उद्देश्य नए रिजीम को अधिक आकर्षक और व्यावहारिक बनाना है, ताकि सभी करदाता इससे लाभान्वित हो सकें।
Income Tax News, Budget 2026: नया टैक्स रिजीम अब ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना रहे हैं. बजट 2026 में इसे और बेहतर बनाने की उम्मीद है. स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की मांग उठ रही है.
By CNBC Awaaz
Income Tax News, Budget 2026: नया टैक्स रिजीम (New Tax Regime) धीरे - धीरे टैक्सपेयर्स के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है. शुरुआत में इसे एक जटिल विकल्प माना गया था लेकिन Budget 2025 में टैक्स स्लैब (Tax Slab) बढ़ाने और रिबेट में बदलाव के बाद यह कई लोगों के लिए डिफॉल्ट विकल्प बन गया. अब जब इस साल ज्यादा टैक्सपेयर्स इसके तहत रिटर्न फाइल करने वाले हैं तो नजरें Budget 2026 (Union Budget) पर टिकी हैं कि इसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है.
Budget 2026 Income Tax Expectations
मनीकंट्रोल के मुताबिक, सरकार का फोकस एक साफ और बिना डिडक्शन वाले टैक्स सिस्टम पर है लेकिन इसके बावजूद पुराना टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुआ है. खासकर सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थकेयर खर्च मेडिकल इंश्योरेंस और ब्याज आधारित आय जैसे पहलू पुराने रिजीम को अब भी आकर्षक बनाते हैं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि Budget 2026 में नए टैक्स रिजीम को इस तरह बदला जाए कि कोई वर्ग पीछे न छूटे.
नए टैक्स रिजीम की सबसे बड़ी कमी इसमें आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली डिडक्शन का न होना है. फिलहाल इसमें सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) और नियोक्ता की ओर से NPS में योगदान की छूट मिलती है. HRA और मेडिकल इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं इसमें शामिल नहीं हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित और जरूरी डिडक्शन को वापस लाने से यह रिजीम ज्यादा व्यावहारिक बन सकता है. आनंद राठी वेल्थ की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता राजानी का कहना है कि HRA और मेडिकल इंश्योरेंस जैसी सीमित छूट नए टैक्स रिजीम को सरल रखते हुए ज्यादा आकर्षक बना सकती है.
नए टैक्स रिजीम में मिलेगा मेडिक्लेम डिडक्शन?
बढ़ती हेल्थकेयर लागत को देखते हुए मेडिकल इंश्योरेंस एक बड़ा खर्च बन चुका है. डेलॉयट इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नितिन बैजल का कहना है कि नए टैक्स रिजीम में मेडिक्लेम डिडक्शन की गैरमौजूदगी एक बड़ी कमी है.
स्टैंडर्ड डिडक्शन इस रिजीम में राहत का मुख्य जरिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई और बढ़ती जीवन लागत को देखते हुए इसे बढ़ाया जा सकता है. नितिन बैजल के अनुसार स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने से बिना अतिरिक्त जटिलता के सभी को राहत मिल सकती है.
एजुकेशन लोन (Education Loan) और होम लोन (Home Loan) से जुड़े टैक्स फायदे फिलहाल सिर्फ पुराने टैक्स रिजीम तक सीमित हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि ये फायदे बैंकों और औपचारिक सिस्टम से जुड़े होते हैं इसलिए इन्हें नए टैक्स रिजीम में शामिल करना आसान हो सकता है. सीनियर सिटीजन के लिए नया टैक्स रिजीम अब भी कम आकर्षक है. इसमें न तो ज्यादा बेसिक छूट मिलती है और न ही हेल्थ इंश्योरेंस की डिडक्शन.
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