Health & Fitness
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ICMR की नई तकनीक: बुखार, डेंगू और कोविड जैसी बीमारियों का एक ही सैंपल में पता लगाएं
Patrika News
January 21, 2026•1 day ago

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आईसीएमआर एक नई मल्टीप्लेक्स डायग्नोस्टिक तकनीक विकसित कर रहा है, जिससे एक ही सैंपल में बुखार, डेंगू, कोविड जैसी कई बीमारियों का एक साथ पता लगाया जा सकेगा। यह पहल एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक उपयोग को कम करेगी और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे को रोकेगी। इससे इलाज में देरी नहीं होगी और मरीजों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।
ICMR Multiplex Diagnostic Test: भारत में गंभीर संक्रामक बीमारियों की पहचान को आसान और तेज बनाने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एक बड़ी पहल पर काम कर रही है। इसका मकसद ऐसा एक ही डायग्नोस्टिक टेस्ट विकसित करना है, जिससे एक साथ कई बीमारियों का पता लगाया जा सके। यह कदम पब्लिक हेल्थ के लिए बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे बिना जरूरत दिए जाने वाले ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कम होगा और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे को भी रोका जा सकेगा।
आज की स्थिति यह है कि जब कोई मरीज बुखार, सांस फूलना या कमजोरी जैसे आम लक्षणों के साथ डॉक्टर के पास आता है, तो उसे एक के बाद एक कई जांचें करानी पड़ती हैं। पहले डेंगू, फिर कोविड, फिर फ्लू, फिर टाइफाइड हर रिपोर्ट निगेटिव आने पर अगला टेस्ट। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है। कई बार सही बीमारी का पता देर से चलता है, जिससे इलाज में देरी होती है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है। साथ ही, यह तरीका मरीज पर आर्थिक बोझ भी डालता है। क्योंकि कई संक्रमणों के लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी पकड़ना मुश्किल हो जाता है और असली कारण छूट भी सकता है।
इसी समस्या को हल करने के लिए ICMR मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट विकसित कर रहा है। इन टेस्ट की मदद से एक ही सैंपल में कई गंभीर संक्रमणों की जांच हो सकेगी। इससे डॉक्टरों को बहुत जल्दी सही बीमारी की पुष्टि मिल जाएगी और इलाज भी सही दिशा में शुरू हो सकेगा।
आज कुछ बड़े अस्पतालों और आईसीयू में ऐसे मल्टीप्लेक्स टेस्ट पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं, खासकर सेप्सिस जैसे गंभीर मामलों में, जहां एक साथ कई बैक्टीरिया और AMR जीन की पहचान की जाती है। गंभीर मरीजों के बेहतर प्रबंधन के लिए डॉक्टर OC Academy का Certification Course in Intensive Care Medicine जैसे कोर्स से अपनी समझ और स्किल को और मजबूत कर सकते हैं।
जांच में देरी की वजह से डॉक्टर अक्सर अंदाजे से तेज एंटीबायोटिक्स शुरू कर देते हैं। अगर ये दवाएं लंबे समय तक चलती रहें, तो बैक्टीरिया उन पर असरहीन हो जाते हैं। ICMR की AMR Surveillance Report 2024 भी बताती है कि अस्पतालों में कई आम एंटीबायोटिक्स अब कम असरदार हो रही हैं। अगर सही बीमारी जल्दी पता चल जाए, तो डॉक्टर तुरंत सही और सीमित दवा दे सकते हैं। सुरक्षित और समझदारी से दवा लिखने की ट्रेनिंग के लिए OC Academy का Certification Course in Safe Prescribing काफी उपयोगी है।
ICMR के ये नए टेस्ट भारत में पाई जाने वाली बीमारियों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। देश के सर्विलांस डेटा के आधार पर यह तय होगा कि किन संक्रमणों को प्राथमिकता दी जाए। इससे भविष्य में महामारी और आउटब्रेक को भी जल्दी पकड़ा जा सकेगा। कोविड-19 से यह साफ हो चुका है कि देर से पहचान कितनी खतरनाक हो सकती है। ICMR पहले भी ऐसे डायग्नोस्टिक टूल्स के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर चुका है, खासकर बच्चों में एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए। बच्चों के जटिल मामलों को बेहतर ढंग से संभालने के लिए OC Academy का Certification Course in Paediatrics डॉक्टरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
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