Thursday, January 22, 2026
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जमी हुई हाइड्रोजन सायनाइड में छिपा है जीवन का रहस्य: वैज्ञानिक शोध

Zee News
January 20, 20262 days ago
जमी हुई हाइड्रोजन सायनाइड में छिपा है जीवन का रहस्य! यहीं से हुई थी शुरुआत; वैज्ञानिक बोले...

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वैज्ञानिकों की नई शोध के अनुसार, जमी हुई हाइड्रोजन सायनाइड जीवन की शुरुआती केमिस्ट्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती थी। ठंडे हालात में भी यह रसायन सक्रिय रहकर जीवन की नींव बनने वाले जटिल अणुओं के निर्माण में सहायक हो सकता है। यह शोध एसीएस सेंट्रल साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है।

Hydrogen cyanide new reserch: वैज्ञानिकों को लंबे समय तक लगता रहा कि हाइड्रोजन सायनाइड नाम का रसायन बेहद खतरनाक है और ठंड में जमने के बाद यह लगभग निष्क्रिय हो जाता है. लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस सोच को बदल दिया है. स्वीडन के वैज्ञानिक मार्टिन राहम और उनकी टीम की रिसर्च के मुताबिक, जमी हुई हाइड्रोजन सायनाइड धरती पर जीवन की शुरुआती केमिस्ट्री को आगे बढ़ाने में जरूरी भूमिका निभा सकती थी. यह स्टडी एसीएस सेंट्रल साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है. शोध में बताया गया है कि ठंडे हालात में भी यह रसायन छोटे पर लेवल पर सक्रिय होकर जरूरी रासायनिक बदलाव कर सकता है, जो जीवन की नींव बनने में मददगार रहे होंगे. अणुओं के बनने का रास्ता खोल सकती हैं हाइड्रोजन सायनाइड हाइड्रोजन सायनाइड कोई दुर्लभ तत्व नहीं है. यह हमारे सौरमंडल में कई जगह पाया जाता है. वैज्ञानिकों को यह धूमकेतुओं, ग्रहों, चंद्रमाओं और यहां तक कि अंतरतारकीय बादलों में भी मिला है. पानी के साथ प्रतिक्रिया करने पर यह अमीनो एसिड और न्यूक्लियोबेस जैसे जरूरी तत्व बना सकता है, जो जीवन के लिए बेहद अहम हैं. अब नई स्टडी यह भी दिखाती है कि जब यह रसायन जम जाता है, तब भी इसकी सतह पर रासायनिक गतिविधियां चलती रहती हैं. यही गतिविधियां आगे चलकर जटिल अणुओं के बनने का रास्ता खोल सकती हैं. रिसर्च में बताया गया है कि जमी हुई हाइड्रोजन सायनाइड सुई जैसी लंबी क्रिस्टल संरचना बनाती है. इन क्रिस्टलों की बनावट मकड़ी के जाले जैसी होती है. वैज्ञानिकों ने लगभग 450 नैनोमीटर लंबे ऐसे क्रिस्टल का मॉडल तैयार किया. पाया गया कि इनके सिरों पर खास तरह की सतह होती है. यही सतह छोटे स्तर पर बिजली जैसे मजबूत इलेक्ट्रिक फील्ड पैदा करती है. ये फील्ड रसायनों के लिए उत्प्रेरक की तरह काम करते हैं. इसकी वजह से बहुत ठंडे तापमान पर भी हाइड्रोजन सायनाइड, हाइड्रोजन आइसोसायनाइड जैसे ज्यादा सक्रिय रूप में बदल सकता है. रासायनिक प्रक्रियाओं को कर सकते हैं और तेज स्टडी के अनुसार, इन क्रिस्टलों पर बनने वाले इलेक्ट्रिक फील्ड काफी ताकतवर होते हैं. इनकी शक्ति उन तकनीकों जैसी है, जिनका इस्तेमाल वैज्ञानिक बेहद सूक्ष्म स्तर पर अणुओं को कंट्रोल करने के लिए करते हैं. यही कारण है कि सामान्य हालात में मुश्किल माने जाने वाले रासायनिक बदलाव यहां आसानी से हो सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि शनि के चंद्रमा टाइटन जैसे ठंडे पिंडों पर ऐसे हालात मौजूद हैं. वहां हाइड्रोजन सायनाइड की परतें धीरे-धीरे जमती रहती हैं. साथ ही वहां सूर्य की रोशनी, ब्रह्मांडीय किरणें और चुंबकीय कण भी मौजूद हैं, जो इन रासायनिक प्रक्रियाओं को और तेज कर सकते हैं. यह रिसर्च एक पुराने सवाल का जवाब भी देती है. वैज्ञानिकों को लंबे समय से हैरानी थी कि ठंडे इलाकों में हाइड्रोजन आइसोसायनाइड इतनी मात्रा में कैसे पाया जाता है. सामान्य गैस अवस्था में इसका बनना मुश्किल माना जाता है. नई स्टडी बताती है कि जमी हुई हाइड्रोजन सायनाइड की सतह पर यह बदलाव आसानी से हो सकता है. बाद में गर्मी या रोशनी मिलने पर यह अणु बाहर निकल सकता है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि धूमकेतुओं और ठंडे ग्रहों पर जीवन से जुड़ी केमिस्ट्री कैसे आगे बढ़ी होगी. वैज्ञानिक अब प्रयोगशालाओं में इस सिद्धांत को परखने की तैयारी कर रहे हैं.

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