Friday, January 23, 2026
Health & Fitness
12 min read

पुरुषों के लिए भी क्यों जरूरी है एचपीवी वैक्सीन? जानिए डॉ मीरा पाठक से

IANS LIVE
January 19, 20263 days ago
सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुषों के लिए भी जरूरी है एचपीवी वैक्सीन: डॉ मीरा पाठक

AI-Generated Summary
Auto-generated

डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एचपीवी वायरस पुरुषों और महिलाओं दोनों को संक्रमित करता है और पुरुषों में कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए, पुरुषों का टीकाकरण न केवल उनकी सुरक्षा करता है, बल्कि वायरस के प्रसार को भी रोकता है।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। आमतौर पर जब भी एचपीवी वैक्सीन की चर्चा होती है, तो लोगों के दिमाग में सीधे सर्वाइकल कैंसर और महिलाओं का नाम आता है। यही वजह है कि समाज में यह धारणा बन गई है कि यह वैक्सीन सिर्फ लड़कियों या महिलाओं के लिए ही जरूरी है, लेकिन सच्चाई यह है कि एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है और पुरुषों के लिए भी उतना ही खतरनाक हो सकता है। डॉ. मीरा पाठक के मुताबिक, सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं, पुरुषों के लिए भी एचपीवी वैक्सीन जरूरी है। एचपीवी एक बेहद आम वायरस है, जिसके 200 से ज्यादा प्रकार होते हैं। यह मुख्य रूप से सेक्सुअल कॉन्टैक्ट के जरिए फैलता है और मेल-फीमेल दोनों को संक्रमित करता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर मामलों में एचपीवी का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता। यानी व्यक्ति संक्रमित होने के बावजूद बिल्कुल सामान्य महसूस करता है। ऐसे में वह अनजाने में अपने पार्टनर को भी संक्रमित कर सकता है। डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि कई लोग यह सोचते हैं कि जब कोई तकलीफ ही नहीं है, तो जांच या वैक्सीन की क्या जरूरत है? जबकि यही सोच आगे चलकर बड़ी बीमारी का कारण बन जाती है। एचपीवी के अलग-अलग स्ट्रेन्स अलग-अलग तरह की बीमारियां पैदा करते हैं। कुछ स्ट्रेन्स जेनाइटल वॉर्ट्स यानी गुप्तांगों पर मस्सों का कारण बनते हैं, जो भले ही जानलेवा न हों, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से काफी परेशानी देते हैं। वहीं कुछ हाई-रिस्क स्ट्रेन्स, खासतौर पर टाइप 16 और 18, कैंसर का कारण बनते हैं। महिलाओं में यही स्ट्रेन्स सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन पुरुषों में भी ये कम खतरनाक नहीं हैं। डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, पुरुषों में एचपीवी पेनाइल कैंसर, एनल कैंसर, ओरल और ओरोफैरिंजियल कैंसर का कारण बन सकता है। यही वजह है कि एचपीवी वैक्सीन को सिर्फ महिलाओं तक सीमित रखना एक बड़ी चूक है। डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि अगर पुरुष वैक्सीनेट नहीं होंगे, तो वे खुद तो जोखिम में रहेंगे ही, साथ ही अपने पार्टनर के लिए भी खतरा बन सकते हैं। अगर पुरुषों को वैक्सीन लगती है, तो न सिर्फ वे खुद एचपीवी से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचेंगे, बल्कि वायरस के फैलाव की कड़ी भी टूटेगी। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में एचपीवी वैक्सीन लड़के और लड़कियों दोनों को दी जाती है। अब सवाल आता है कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने की सही उम्र क्या है। डॉ. मीरा पाठक के मुताबिक, इसकी सबसे आदर्श उम्र 9 से 14 साल मानी जाती है। इस उम्र में आमतौर पर बच्चों की सेक्सुअल एक्टिविटी शुरू नहीं हुई होती और शरीर की इम्युनिटी भी काफी मजबूत होती है। इस वजह से वैक्सीन का असर सबसे बेहतर होता है और लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है। हालांकि अगर इस उम्र में वैक्सीन नहीं लग पाई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह वैक्सीन 45 साल की उम्र तक लगाई जा सकती है, चाहे व्यक्ति पुरुष हो या महिला। डोज की बात करें तो यह भी उम्र पर निर्भर करती है। अगर 9 से 14 साल की उम्र में वैक्सीन लगवाई जाती है, तो सिर्फ दो डोज की जरूरत होती है। पहली डोज के छह महीने बाद दूसरी डोज दी जाती है। लेकिन अगर 15 साल या उससे ज्यादा उम्र में वैक्सीन शुरू की जाती है, तो तीन डोज लगती हैं- पहली डोज, फिर एक या दो महीने बाद दूसरी डोज और छह महीने पर तीसरी डोज। डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि सही समय पर पूरी डोज लेना बेहद जरूरी है, तभी वैक्सीन पूरी तरह असर दिखाती है। भारत में इस समय एचपीवी वैक्सीन के चार विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें सर्वारिक्स, गार्डासिल 4 और गार्डासिल 9 विदेशी वैक्सीन हैं, जबकि सर्वावैक भारत में बनी वैक्सीन है। ये वैक्सीन इस आधार पर अलग-अलग होती हैं कि वे कितने स्ट्रेन्स से सुरक्षा देती हैं। गार्डासिल 9 सबसे ज्यादा स्ट्रेन्स से बचाव करती है, जबकि सर्वावैक चार स्ट्रेन्स से सुरक्षा देती है और भारतीय होने की वजह से अपेक्षाकृत कम कीमत में उपलब्ध है। डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, वैक्सीन कौन-सी लगवानी है, यह डॉक्टर की सलाह से तय करना चाहिए। अक्सर लोग वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स को लेकर डर जाते हैं, लेकिन डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साइड इफेक्ट्स आम वैक्सीन जैसे ही होते हैं। इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन या लालिमा, और कभी-कभी हल्का बुखार। ये लक्षण कुछ ही समय में अपने-आप ठीक हो जाते हैं और किसी तरह का गंभीर खतरा नहीं होता। --आईएएनएस पीआईएम/एएस

Rate this article

Login to rate this article

Comments

Please login to comment

No comments yet. Be the first to comment!
    एचपीवी वैक्सीन: पुरुषों के लिए भी जरूरी - डॉ मीरा पाठक