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हनी त्रेहान का बड़ा खुलासा: लीड रोल के लिए हिंदू एक्टर की मांग
Navbharat Times
January 20, 2026•2 days ago
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बॉलीवुड के कास्टिंग डायरेक्टर हनी त्रेहान ने इंडस्ट्री में सांप्रदायिक सोच और डर का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि बड़े बजट की फिल्मों में मुस्लिम सुपरस्टार को लिया जाता है, पर लीड रोल हिंदू अभिनेता को मिलता है। उनकी फिल्म 'पंजाब 95' सेंसर बोर्ड में अटकी है, जबकि 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्में आसानी से रिलीज हो गईं।
एआर रहमान के बयान पर विवाद के बीच बॉलीवुड के दिग्गज कास्टिंग डायरेक्टर और फिल्ममेकर हनी त्रेहान ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। म्यूजिक कंपोजर ने बीते दिनों एक इंटरव्यू में कहा कि इंडस्ट्री में 'सांप्रदायिक' सोच घर कर गई है। यह भी कि पावर डायनिमिक्स बदले हैं, जिस कारण लोग क्रिएटिव काम करने की बजाय कॉरपोरेट की तरह पैसे और फायदे की चाह पर अधिक फोकस हो गए हैं। यही बात सिंगर हरिहरन ने भी कही। अब हनी त्रेहान ने बतौर कास्टिंग डायरेक्टर अपने 14 साल, एक प्रोड्यूसर के तौर पर 10 साल और डायरेक्टर के तौर पर पांच साल के सफर पर बड़े दावे किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे इंडस्ट्री में कहीं ना कहीं एक डर है। बड़े बजट की फिल्में बन रही हैं। ऐसे में यह भी हो रहा है कि आप मुस्लिम सुपरस्टार को कास्ट करते हैं, लेकिन फिल्म में लीड रोल हिंदू हीरो को मिलता है। हनी त्रेहान ने यह भी कहा कि आज के दौर में 'हैदर' जैसी फिल्म बनना नामुमकिन है।
हनी त्रेहान ने डायरेक्शन की शुरुआत 2020 में Netflix की मिस्ट्री फिल्म 'रात अकेली है' से की थी। आल ही इसका सीक्वल 'रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स' रिलीज हुई। जबकि सच्ची घटनाओं पर आधारित उनकी पीरियड इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर, 'पंजाब 95' करीब डेढ़ साल से सेंसर बोर्ड में अटकी है। यह दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा पर बनी है, जिसमें दिलजीत दोसांझ लीड रोल में हैं।
सेंसर बोर्ड में अटकी है 'पंजाब 95', लगाए हैं 127 कट्स
'पंजाब ’95' को सेंसर बोर्ड रिलीज सर्टिफिकेट नहीं दे रही है। इस बारे में 'इंडियन एक्सप्रेस' से बात करते हुए वह कहते हैं, 'मैं अभी भी जवाबों का इंतजार कर रहा हूं। मुझे बोर्ड ने 127 कट दिए। मैं कट्स के खिलाफ नहीं हूं। अगर वे सही हैं या मुझे कोर्ट से दिए जा रहे हैं, तो मैं 150 कट करने में भी बहुत खुश हूं। लेकिन अगर कोई सरकार या सत्ता में बैठे लोग कहते हैं कि यह हमारी राजनीति के हिसाब से ठीक नहीं है, तो यह बहुत सब्जेक्टिव है। मैं सच में चाहूंगा कि मेरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हो, जो आज के समय में बहुत मुश्किल लगता है। यह कोई प्रोपेगेंडा फिल्म नहीं है। बस यह मौजूदा सरकार के पक्ष में काम नहीं करती है।'
'सेंसर बोर्ड में लोग सरकार को खुश करने की कोशिश कर रहे'
'पंजाब 95' की तरह ही 'उड़ता पंजाब' को लेकर भी सेंसर बोर्ड के साथ विवाद हुआ था। यह हनी त्रेहान के प्रोड्यूसिंग पार्टनर अभिषेक चौबे की फिल्म थी। हनी कहते हैं, 'उड़ता पंजाब को रिलीज हुए 10 साल हो गए। इन एक दशक में निश्चित रूप से हालत और खराब हो गई है। CBFC में बैठे लोग अपने काम का फायदा उठा रहे हैं। वे अपनी पावर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे मौजूदा सरकार को इतना खुश करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे कहानी को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। उस पूरी चक्की में कोई न कोई तो पिस ही रहा है। उस समय एक ट्रिब्यूनल था, FCAT (फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल), जिसे 2021 में भारत सरकार ने खत्म कर दिया था। उसके बाद, हम कोर्ट गए, एक कानूनी लड़ाई लड़ी, और जीत गए। अब अगर किसी को कोर्ट में लड़ने की भी इजाजत नहीं है, तो सरकार मेरा संवैधानिक अधिकार छीनकर अपने हाथों में पावर ले रही है। इस तरह के हालात में आपको पता नहीं चलता कि कहां जाएं।'
हनी त्रेहान ने पूछा- फिर 'कश्मीर फाइल्स', 'केरल स्टोरी' कैसे रिलीज हुई
जब उनसे पूछा गया कि 'उड़ता पंजाब' के समय हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ज्यादा एकजुट थी, तो उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है। आज के समय में आप 'उड़ता पंजाब' या 'हैदर' जैसी फिल्में नहीं बना सकते।अब, मुझे अपनी प्राइवेट स्क्रीनिंग करने की भी इजाजत नहीं है। मुझे बताया गया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि 'द कश्मीर फाइल्स' (2022), 'द केरल स्टोरी' (2023), 'इमरजेंसी' (2025), 'द बंगाल फाइल्स' (2025), और 'द साबरमती रिपोर्ट' (2024) जैसी बहुत संवेदनशील फिल्में न सिर्फ रिलीज होती हैं, बल्कि टैक्स-फ्री भी की जाती हैं। उन संबंधित राज्यों में तो कानून-व्यवस्था बरकरार है। क्या सिर्फ पंजाब की कानून-व्यवस्था ही देश की एकता को बिगाड़ेगी?'
'मुसलमान को विलेन दिखाता, तो संसद में स्टैंडिंग ओवेशन मिलता'
हनी त्रेहान आगे कहते हैं, 'शायद अगर मैंने किसी मुसलमान को विलेन दिखाया होता या मुसलमानों को नकारात्मक रोशनी में दिखाया होता, तो मुझे भी संसद में इन फिल्मों की तरह स्टैंडिंग ओवेशन मिलता।' इसी कड़ी में आगे बोलते हुए उन्होंने कहा, 'आजकल ऐसी बहुत सी फिल्में हैं जिनमें मुस्लिम ए-लिस्ट एक्टर हो सकते हैं, लेकिन लीड रोल करने वाला एक्टर हिंदू होना चाहिए। मुझे समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों है।'
'वो कहानी मुसलमान की थी, डर से उसे हिंदू बना दिया गया'
हनी त्रेहान ने बिना नाम लिए एक फिल्म का किस्सा सुनाया, जिसमें वह कास्टिंग डायरेक्टर थे। उन्होंने कहा, 'एक समय था जब मैं एक फिल्म से जुड़ा हुआ था, वह जल्द ही रिलीज होने वाली है। यह एक सच्ची मुस्लिम कहानी पर आधारित है। लेकिन क्योंकि यह एक बड़े बजट की फिल्म है, जिसमें एक ए-लिस्ट स्टार है, इसलिए उस किरदार को हिंदू बना दिया गया है। तो, कहीं न कहीं समाज में यह डर है कि शायद सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते कि कोई असली हीरो किसी अल्पसंख्यक समुदाय से आए, चाहे वह सिख हो, मुस्लिम हो या ईसाई। मैं यह नहीं कह रहा कि वे ऐसा चाहते हैं, लेकिन जब मैं पूरी स्थिति देखता हूं तो मुझे ऐसा ही लगता है।'
'मैं कहानी सुनाने आया हूं, पर्सनल या पॉलिटिकल एजेंडा नहीं'
जब फिल्ममेकर से पूछा गया कि क्या वह भविष्य में कोई ऐसी फिल्म करेंगे, जिससे वह राजनीतिक तौर पर समहत नहीं हों, तो उन्होंने कहा, 'नहीं। मुझे कहानी बताने के लिए राजनीति या ऐसी वजह समझ नहीं आती। अगर मैं इसके साथ ईमानदार नहीं हूं, तो मेरे लिए फिल्म करना बहुत मुश्किल होगा। मैं यहां किसी के पर्सनल या पॉलिटिकल एजेंडा को सपोर्ट करने के लिए नहीं हूं। मैं यहां किसी का माउथपीस बनने के लिए नहीं हूं।'
लेखक के बारे मेंस्वपनल सोनलस्वपनल सोनल, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास 14 वर्षों का अनुभव है। वह एंटरटेनमेंट एडिटर के तौर पर सिनेमा और सितारों की दुनिया को कवर कर रहे हैं। उनकी विशेष रुचि मनोरंजन के बदलते स्वरूप यानी OTT पर वेब सीरीज, फिल्म समीक्षा और बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों में है। इसके अलावा, स्वपनल ने अपने करियर में राजनीति, समसामयिक घटनाओं, टेक्नोलॉजी और वायरल ट्रेंड्स जैसी बीट पर भी काम किया है। वह बीते 8 साल से NBT (Digital) के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने जयपुर लिटरेचर फेस्टविल और प्रवासी भारतीय सम्मेलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, और गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी से जनसंचार में स्नातकोत्तर हैं। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री ली है।... और पढ़ें
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