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सुपरस्टार को मिला नोटों से भरा सूटकेस, फिर बनी ब्लॉकबस्टर फिल्म
News18 Hindi
January 20, 2026•2 days ago

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दक्षिण के एक निर्माता ने सुपरस्टार राजेश खन्ना को मुंहमांगी फीस और संगीतकारों को चांदी की प्लेट में पैसे देकर 'हाथी मेरे साथी' फिल्म बनाई। स्क्रिप्ट में दम न होने पर राजेश खन्ना ने सलीम-जावेद से मदद मांगी, जिन्होंने फिल्म को सफल बनाया। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
बॉलीवुड में ऐसा कई बार देखने को मिला है जब प्रोड्यूसर ने हीरो-हीरोइन को मुंहमांगी फीस दी हो.70 के दशक में साउथ इंडिया के एक प्रोड्यूसर ने उस समय के सुपरस्टार को सूटकेस में भर-भरकर पैसे दिए. यहां तक कि संगीतकार जोड़ी को भी चांदी की प्लेट में रखकर 1-1 लाख रुपये दिए. उस जमाने में यह रकम बहुत बड़ी थी. हीरो ने पैसे तो ले लिए लेकिन इस फिल्म को पूरा करने में पसीने छूट गए. उन्होंने हाथ-पैर जोड़कर फिल्म पूरी की. हम 1971 में रिलीज हो रही 'हाथी मेरे साथी' फिल्म की बात कर रहे हैं.
14 मई 1971 को रिलीज हुई 'हाथी मेरे साथी' का डायरेक्शन एमए थिरुमुगम ने किया था. स्क्रीनप्ले सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखा था. डायलॉग इंदर राज आनंद ने लिखे थे. फिल्म में राजेश खन्ना और तनूजा लीड रोल में थे. स्टोरी सैंडो एमएमए और चिनप्पा थेवर ने लिखी थी. फिल्म के प्रोड्यूसर भी सैंडो एमएमए और चिनप्पा थेवर ही थे. साउथ इंडिया के प्रोड्यूसर की यह बहुत कामयाब हिंदी फिल्म थी. प्रोड्यूसर थेवर ने फिल्म में एक छोटा सा रोल भी किया था. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद-बख्शी थे. पहली बार इस फिल्म के लिए सलीम-जावेद साथ आए थे. इसी फिल्म से उनकी जोड़ी बतौर स्क्रीनप्ले राइटर चमकी. यह फिल्म 1967 की तमिल फिल्म का रीमेक थी.
फिल्म का म्यूजिक बहुत शानदार था. पॉप्युलर गानों में 'दुनिया में रहना है तो काम कर प्यारे', 'सुनजा ऐ ठंडी हवा, थम जा ऐ काली घटा', 'दिलबर जानी चली हवा मस्तानी', 'चल चल मेरे साथी' और 'नफरत की दुनिया' शुमार थे. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का टाइटल पहले 'प्यार की दुनिया' था जिसे बदलकर 'हाथी मेरे साथी' किया गया.
अब बात करते हैं इस फिल्म के लिए मुश्किलों से घिरे राजेश खन्ना की. मुंबई के कार्टर रोड पर समुद्र किनारे वो एक बंगला लेना चाहते थे. 60 के दशक में गीतकार नौशाद का इस इलाके में एक बंगला था, जिसका नाम 'आशियाना' था. उनके बंगले के पास एक जर्जर दो मंजिला बंगला था जिसे हॉन्टेड माना जाता था. सुपरस्टार राजेंद्र कुमार ने यह बंगला 60 हजार में खरीदा. अपने दोस्त मनोज कुमार की सलाह पर शांति पूजा करवाई और बंगले का नाम अपनी बेटी 'डिंपल' के नाम पर रख दिया. राजेंद्र कुमार की किस्मत चमक गई. उनकी फिल्में सिल्वर जुलबी होने लगीं. इस बंगले पर राजेश खन्ना की नजर थी. बात तय हो गई लेकिन राजेश खन्ना को इस बंगले को पाने के लिए जो करना पड़ा, वो दिलचस्प है.
उन्हीं दिनों साउथ के प्रोड्यूसर चिनप्पा थेवर अपनी तमिल फिल्म का रीमेक हिंदी में बनाना चाहते थे. राजेश खन्ना उस दौर के सुपरस्टार थे. ऐसे में उन्होंने राजेश खन्ना को फिल्म में साइन करने का मन बनाया. राजेश खन्ना ने उनकी फिल्म के लिए 9 लाख रुपये लिए. चिन्नप्पा ने 9 लाख फीस दी. पैसे दो किश्तों में दिए गए. 2.5 लाख का साइनिंग अमाउंट दिया गया. इतना ही नहीं, संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को 1-1 लाख रुपये चांदी की प्लेट में रखकर दिए.
राजेश खन्ना ने पैसे तो मुंहमांगे ले लिए लेकिन जो स्क्रिप्ट उन्हें मिली, उसमें दम नहीं था. ऐसे में राजेश खन्ना स्क्रिप्ट राइटर सलीम के पास पहुंचे और बोले कि मेरी बड़ी मजबूरी है. कार्टर रोड पर बंगला खरीद रहा हूं. घर 4.5 लाख का है. प्रोड्यूसर चिनप्पा थेवर ने मुझे 2.5 लाख का भारी-भरकम साइनिंग अमाउंट दिया है, अब मैं इसे वापस नहीं कर सकता. अगर मैंने यह फिल्म की तो मेरा करियर खराब हो जाएगा क्योंकि फिल्म नहीं चलेगी. मैं इंडस्ट्री से ही बाहर हो जाऊंगा. अब आप दोनों (सलीम-जावेद) मुझे बचा लो. हमने राजेश खन्ना से कहा कि हीरो वही रहेगा, चार हाथी भी वही रहेंगे लेकिन बाकी स्क्रिप्ट में हम सब कुछ बदल देंगे. इस तरह से यह फिल्म बनकर तैयार हुई. राजेश खन्ना ने बंगला खरीद लिया. नाम आशीर्वाद रखा. घर में पूजा-पाठ करवाया.
जावेद अख्तर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, 'उन दिनों सलीम-जावेद का नाम उतना नहीं था. हाथी मेरे साथी की सफलता का क्रेडिट हाथियों को और राजेश खन्ना को गया लेकिन इस पिक्चर ने हमें नाम दिया. जब यह फिल्म बन रही थी तो उस दौरान हमारी 5-6 पिक्चर फ्लॉप हो गई थीं.'
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