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100 करोड़ की गुजराती फिल्म 'लालो - कृष्ण सदा सहायते' ने बचाई 23 लोगों की जान
Hindustan
January 20, 2026•2 days ago

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100 करोड़ कमाने वाली गुजराती फिल्म 'लालो- कृष्ण सदा सहायते' ने 23 लोगों की जान बचाई। कम बजट में बनी इस फिल्म को देखकर लोगों को जीने की उम्मीद मिली। फिल्म के निर्देशक अंकित सखिया के अनुसार, दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के कारण इसे हिंदी में भी रिलीज किया गया।
साल 2025 में एक गुजराती फिल्म चुपके से 100 करोड़ रुपये कमाकर साल की सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमाने वाली मूवी बन गई। इस फिल्म का नाम था लालो- कृष्ण सदा सहायते। फिल्म बहुत कम बजट में बनी है। यहां तक शूट भी सिंगल कैमरा से हुआ जो कि दोस्त से मांगा गया था। फिल्म की पॉप्युलैरिटी देखकर इसे हिंदी भाषा में भी रिलीज किया गया है। अब मूवी के डायरेक्टर अंकित सखिया ने इससे जुड़ी कई इंट्रेस्टिंग बातें बताई हैं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को देखने के बाद 23 लोगों का मैसेज आया कि मूवी ने उनकी जान बचाई और जीने की उम्मीद दी।
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कम बजट में फिल्म बनाने का था प्लान
अंकित फ्री प्रेस जर्नल से बात कर रहे थे। उनसे पूछा गया कि उन्हें फिल्म का आइडिया कैसे आया? इस पर उन्होंने जवाब दिया, आइडिया एक फिल्म बनाने का था और इसे कम बजट में कैसे बनाया जाए। तो इसके लिए जरूरत किस चीज की थी? एक लोकेशन, एक एक्टर और जो भी चीजें इर्द-गिर्द मिलें जिनमें मेरा पैसा ना खर्च हो। इस सोच से स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की।
शुरू में कोई देखने नहीं गया था फिल्म
अंकित ने बताया कि फिल्म शुरू में नहीं चली, कोई देखने नहीं जा रहा था लेकिन जैसे-जैसे एक-दूसरे को बताना शुरू हुआ लोग देखने लगे। इसके बाद यह ब्लॉकबस्टर बन गई। अंकित से पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि फिल्म क्यों चली होगी? इस पर उन्होंने जवाब दिया, मुझे लगता है कि इसने हर किसी को कनेक्ट किया। दूसरा मेन फैक्टर था कि इसके साथ डिवाइन एनर्जी जुड़ी थी, जो लोगों के साथ जुड़ी और फिल्म चल गई।
आत्महत्या का मन बना चुके लोगों का मैसेज
अंकित से पूछा गया कि फिल्म को हिंदी में रिलीज करने का फैसला क्यों लिया? इस पर उन्होंने एक इंट्रेस्टिंग बात बताई। अंकित बोले, फिल्म देखकर लोग हील हो रहे थे। लोग देख रहे थे, रो रहे थे, अपने दुख बता रहे थे। 23 लोगों ने कहा कि वे आत्महत्या करने वाले थे लेकिन उन्होंने फिल्म देखी और बच गए। उन्हें उम्मीद मिली तो हमें लगा कि यह गुजराती भाषा तक ही नहीं रहनी चाहिए। इसे पूरे भारत को दिखाते हैं। इसलिए हिंदी में लाने का फैसला लिया।
एक दर्शक ने अंकित को दिए रुपये
अंकित ने दर्शकों से मिलने वाला बेस्ट रिएक्शन भी साझा किया। वह बोले, 'मुझे आज भी याद है जब मैं शुरुआती दिनों में थिएटर गया तो एक शख्स मेरे पास आया और बोला, 'ये 5000 रुपये रखो, तुम मुझे बहुत पसंद हो।' वह मुझे 5000 रुपये देकर बोला, 'मेरा नाम विष्णु है।' ये चीज मैं कभी नहीं भूल सकता। मेरे लिए यह बहुत बड़ी चीज थी।'
क्या है फिल्म की कहानी
लालो कृष्ण सदा सहायते एक गरीब रिक्शेवाले की कहानी है। वह एक फार्महाउस में फंस जाता है इसके बाद उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है। वह श्रीकृष्ण से सहायता मांगता है, उनके गाइडेंस से उसकी जिंदगी बदलती और वह अपने पास्ट को भी हील करता है।
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