Geopolitics
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ग्रीनलैंड ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध की तैयारी शुरू की
Navbharat Times
January 21, 2026•1 day ago
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ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी हमले की आशंका जताते हुए नागरिकों से पांच दिनों के लिए पर्याप्त भोजन जमा करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से सैन्य संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि यह कम है। सरकार इस संभावित टकराव से उत्पन्न बाधाओं को रोकने की तैयारी कर रही है। डेनमार्क ने भी ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग को खारिज किया है।
नूक/कोपेनहेगन: ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी हमले की आशंका को वास्तविक बताया है। प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने मंगलवार को कहा है, कि ग्रीनलैंड के लोगों और अधिकारियों को संभावित मिलिट्री हमले के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा है कि 'अमेरिका के साथ सैन्य संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।' राजधानी नूक में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि "इस बात की संभावना कम है कि कोई मिलिट्री टकराव होगा, लेकिन इसे पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।"
फाइनेंशियल रिव्यू की एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री के हवाले से कहा गया है कि सरकार अब लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली रूकावट को रोकने के लिए मदद करने की तैयारी शुरू कर रही है। इसके लिए सभी संबंधित स्थानीय अधिकारियों के प्रतिनिधियों वाली एक टास्क फोर्स बनाई जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि "सरकार लोगों के लिए एक नई गाइडलाइंस बनाने पर काम कर रही है, जिसे लोगों के बीच बांटा जाएगा। जिसमें ये सलाह दी जाएगी कि वो अपने घरों में पांच दिनों के लिए पर्याप्त खाना स्टोर करके रखें।"
अमेरिका से युद्ध की तैयारी में जुटा ग्रीनलैंड!
हालांकि ग्रीनलैंड के पास इतनी क्षमता नहीं है कि वो अमेरिकी मुकाबले को रोक सके। कुछ मिनट से ज्यादा ग्रीनलैंड की सेना अमेरिका का मुकाबला नहीं कर सकती है, अगर उसे यूरोप के ताकतवर देशों की मदद न मिले। वहीं, यूरोपीय संसद में बोलते हुए, डेनमार्क MEP एंडर्स विस्टिसेन ने डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों को खारिज कर दिया कि "संयुक्त राज्य अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण कर लेना चाहिए।" एंडर्स विस्टिसेन ने सेशन के दौरान कहा, "मैं इसे उन शब्दों में कहता हूं जो शायद आप समझें, मिस्टर प्रेसिडेंट, दफा हो जाओ।" डोनाल्ड ट्रंप ने बार बार कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए, क्योंकि उसे चीन और रूस से खतरा है। उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि चीन और रूस का मुकाबला करने के लिए अमेरिका का आर्कटिक द्वीप पर ज्यादा कंट्रोल की जरूरत है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वाले देशों पर, जिनमें फ्रांस और ब्रिटेन भी शामिल हैं, उनपर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है, जो 1 फरवरी से लागू होगा। वहीं अगर ये देश पीछे नहीं हटे, तो 1 जून से ये टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। दूसरी तरफ ग्रीनलैंड के वित्त मंत्री म्यूट बी एगेडे ने मंगलवार को उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "ग्रीनलैंड बहुत ज्यादा प्रेशनर में है और हमें सभी स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा।" जबकि एक दिन पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि "अगर टैरिफ लागू किए जाते हैं तो यूरोप को जवाब देना होगा और अटलांटिक के दोनों किनारों पर "बड़े नतीजे" हो सकते हैं।"
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद, नवभारत टाइम्स में इंटरनेशनल अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं। जियो-पॉलिटिक्स और डिफेंस पर लिखते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 सालों का अनुभव है। अपने कैरियर की शुरूआती दिनों में उन्होंने क्राइम बीट में काम किया और ग्राउंड रिपोर्टिंग की। उन्होंने दो लोकसभा चुनाव को कवर किया है। इसके बाद वो इंटरनेशनल अफेयर्स की तरफ आ गये, जहां उन्होंने अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के साथ साथ कई देशों के इलेक्शन और वहां की राजनीति को कवर किया है। डिफेंस सेक्टर, हथियारों की खरीद बिक्री और अलग अलग देशों के बीच होने वाले संघर्ष पर लगातार लिखते रहते हैं। वो ज़ी मीडिया समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान में काम कर चुके हैं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पर वो डिफेंस और जियो-पॉलिटिक्स के एक्सपर्ट्स, डिप्लोमेट्स और सैन्य अधिकारियों से बात करते रहते हैं। इस समय वो 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू भी करते हैं, जो डिफेंस पर आधारित है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई है।... और पढ़ें
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