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ग्रेटर नोएडा: इंजीनियर की मौत पर CEO नपे, सीएम के आदेश पर SIT गठित
ABP News
January 19, 2026•3 days ago

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ग्रेटर नोएडा में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की प्रशासनिक लापरवाही से हुई मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। घटना की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व एडीजी करेंगे। इस मामले में संबंधित जूनियर इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त न करने की हिदायत दी गई है।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक 27 साल के युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की जान महज प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही की वजह से चली गई. अब इस गंभीर घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है.
योगी सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी का नेतृत्व मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) करेंगे. टीम में मेरठ मंडल के मंडलायुक्त को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रशासनिक और तकनीकी दोनों पहलुओं की बारीकी से जांच हो सके. इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के चीफ इंजीनियर को भी एसआईटी का सदस्य बनाया गया है, जिससे यदि घटना में किसी तरह की निर्माण खामी या तकनीकी लापरवाही सामने आती है तो उसकी विशेषज्ञ स्तर पर जांच हो सके.
अखिलेश यादव ने भी लगाए थे आरोप
इस घटना को लेकर सपा मुखिया और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- "बेहद दुःखद और एक ऐसी घटना जो सरकारी लापरवाही के कारण हुई, जो समय रहते टाली जा सकती थी. अपनों के जाने का दर्द परिवारवाले ही समझ सकते हैं."
इस मामले में क्या हुआ एक्शन
इससे पहले इस घटना को लेकर नोएडा अथॉरिटी की तरफ से सम्बंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की गईं. इसके साथ ही विभागों को लोटस बिल्डर की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए. अथॉरिटी ने साफ कहा था कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कतई बर्दाश्त नहीं होगी. सभी विभागों को अपने क्षेत्रों में निर्माणाधीन परियोजनाओं की सुरक्षा का पुनः निरीक्षण करने के निर्देश दिए.
बता दें कि यह घटना 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे की है. इंजीनियर युवराज गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता था और वह सेक्टर-150 की टाटा सोसाइटी की ओर जा रहा था. इस दौरान हाईवे से जुड़ने वाली सड़क पर कोई बैरिकेड नहीं था, न ही कोई चेतावनी बोर्ड दिखा था. अचानक गाड़ी एक गहरे पानी भरे नाले में जा गिरी. इसके बाद मृतक ने अपने पिता को फोन किया था कि मैं गिर गया हूं और मुझे बचा लो.
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