Politics
4 min read
गिग वर्कर्स की जमीनी हकीकत: कर्ज पर बाइक-स्मार्टफोन, हफ्ते में 95 घंटे काम
Jagran
January 21, 2026•1 day ago

AI-Generated SummaryAuto-generated
एक नए सर्वे के अनुसार, अधिकांश गिग वर्कर्स ने स्मार्टफोन और बाइक खरीदने के लिए लोन लिया है, जिसमें से एक-तिहाई ने किस्तें चुकाने में चूक की है। वे हफ्ते में 95 घंटे तक काम करते हैं, लेकिन पेट्रोल और रखरखाव खर्च के बाद प्रति घंटा वास्तविक कमाई केवल ₹75 है। प्लेटफॉर्म काम के घंटों की गणना में इंतजार और यात्रा के समय को शामिल नहीं करते।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गिग वर्कर्स को लेकर एक नया सर्वे सामने आई है। सर्वे के मुताबिक गिग प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले 95% वर्कर्स के पास स्मार्टफोन और 73% के पास बाइक मौजूद थी।
हालांकि, आधे से अधिक वर्कर्स ने इस बात को स्वीकार किया है कि इन्हें खरीदने के लिए उन्हेंने लोन लिया है। आईडीआर के सर्वे के अनुसार लोन लेने वालों में से लगभग एक-तिहाई ने कम से कम ने एक किस्त चूकने की बात मानी है।
सर्वे में बताया गया है कि यहां काम करने वाले लोग हफ्ते में 95 घंटे तक काम करते हैं। हालांकि, इसमें 75 फीसदी वर्कर्स पार्ट-टाइमर हैं, जो फ्लेस ड्राइवर सर्ज प्राइसिंग का बेहतर इस्तेमाल कर पाते हैं।
कितनी होती है औसत कमाई?
फुल टाइम काम करने वाले गिग वर्कर्स की प्रति घंटे 170 रुपए औसत सकल कमाई है, जिसमें जिसमें ₹115 / घंटा वास्तविक टेक - होम कमाई है।
इसके बाद 32 प्रतिशत पेट्रोल और मेंटेनेस में खर्च होता है। यानी एक गिग वर्कर प्रति घंटा 75 रुपए के लिए काम करता है।
प्लेटफॉर्म की गिनती Vs जमीनी हकीकत
प्लेटफॉर्म सिर्फ 'लॉग-इन और ऑर्डर समय' को काम मानते हैं। लेकिन, गिग वर्कर्स वेटिंग, जोन तक जाने और उपलब्ध रहने के समय को भी काम मानते हैं। यह अनपेड समय सिस्टम में नहीं दिखता है।
Rate this article
Login to rate this article
Comments
Please login to comment
No comments yet. Be the first to comment!
