Friday, January 23, 2026
Economy & Markets
7 min read

नए साल में भी जारी FIIs की बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने बेचे हजारों करोड़ के शेयर

CNBC TV18
January 18, 20264 days ago
FIIs Selling Data: नए साल पर भी नहीं रुक रही विदेशी निवेशकों की बिकवाली, जानिए 18 दिनों में कितने हजार करोड़ का माल बेचा?

AI-Generated Summary
Auto-generated

जनवरी के पहले 18 दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹22,530 करोड़ निकाले हैं। अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती, वैश्विक अनिश्चितताएं, और घरेलू बाजार में ऊंचे मूल्यांकन जैसे कारक इस बिकवाली के पीछे हैं। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ा है।

FIIs Selling Data: एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक बाजार को सहारा देने वाले ठोस सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, तब तक बिकवाली का यह रुझान जारी रह सकता है. By CNBC Awaaz FIIs Selling Data: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की भारतीय शेयर बाजार से बिकवाली का सिलसिला जारी है. जनवरी महीने में अब तक FPIs ने इक्विटी से ₹22,530 करोड़ (करीब 2.5 अरब डॉलर) निकाले हैं. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच यह रुझान पिछले साल से जारी बिकवाली को आगे बढ़ाता दिख रहा है. इससे पहले 2025 में FPIs ने कुल ₹1.66 लाख करोड़ (18.9 अरब डॉलर) की निकासी की थी. यह निकासी करेंसी की अस्थिर स्थिति, ग्लोबल बिजनेस टेंशन, संभावित अमेरिकी टैरिफ और ऊंचे बाजार वैल्यूएशन की चिंताओं के चलते देखी गई थी. लगातार बिकवाली के दबाव का असर रुपये पर भी पड़ा है और 2025 में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 5% कमजोर हुआ है. भारतीय इक्विटी से ₹22,530 करोड़ निकाले NSDL के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 16 जनवरी के बीच FPIs ने भारतीय इक्विटी से ₹22,530 करोड़ निकाल लिए. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे ग्लोबल और घरेलू दोनों कारक जिम्मेदार हैं. Sachin Jasuja, हेड ऑफ इक्विटीज और फाउंडिंग पार्टनर, Centricity WealthTech के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने विकसित बाजारों में जोखिम-एडजस्टेड रिटर्न को बेहतर बनाया है, जिससे उभरते बाजारों से कैपिटल रि-स्ट्रक्चरिंग हो रहा है. इसी तरह, Himanshu Srivastava, प्रिंसिपल-मैनेजर रिसर्च, Morningstar Investment Research India का कहना है कि ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती ने अमेरिकी एसेट्स को ज्यादा आकर्षक बना दिया है. साथ ही, भू-राजनीतिक और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं भी उभरते बाजारों की जोखिम लेने की क्षमता पर दबाव डाल रही हैं. Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट V K Vijayakumar केअनुसार, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है. घरेलू स्तर पर कुछ सेगमेंट में ऊंचे वैल्यूएशन और चालू अर्निंग सीजन से मिले मिलेजुले संकेतों के चलते विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग की है. रुपये की लगातार कमजोरी, जो हाल में 90.44 प्रति डॉलर के आसपास पहुंच गई. उन्होंने भी डॉलर रिटर्न को घटाया है, जिससे FPI फ्लो पर और दबाव बढ़ा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक बाजार को सहारा देने वाले ठोस सकारात्मक संकेत नहीं मिलते, तब तक बिकवाली का यह रुझान जारी रह सकता है.

Rate this article

Login to rate this article

Comments

Please login to comment

No comments yet. Be the first to comment!
    FIIs बिकवाली: नए साल में विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली