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फेफड़ों का कैंसर: 60 हजार मौतें, 5 खतरनाक लक्षण और बचाव के तरीके
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January 19, 2026•3 days ago

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भारत में फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिससे हर साल लगभग 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है। धूम्रपान और प्रदूषण इसके प्रमुख कारण हैं। अधिकांश मामले देर से सामने आते हैं, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है। लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक वजन कम होना और बार-बार फेफड़ों में संक्रमण जैसे लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए।
फेफड़ों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान आदतों को अपनाना बहुत जरूरी है। बाहर निकलते समय सही तरह का मास्क जरूर पहनें, ताकि धूल, धुआं और प्रदूषण से बचाव हो सके। फेफड़ों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए रोजाना हल्के और आसान ब्रीदिंग एक्सरसाइज...
भारत में फेफड़ों का कैंसर तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। ICMR के डेटा के अनुसार, भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2015 में जहां इसके लगभग 63708 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक इनके बढ़कर करीब 81219 होने का अनुमान है। फेफड़ों के कैंसर के कारण क्या हैं? मामलों में इस तेजी से बढ़ोतरी के बड़ी वजह स्मोकिंग है क्योंकि भारत में इस समय लगभग 10 करोड़ वयस्क स्मोकर हैं, साथ ही बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण भी एक बड़ी वजह है। सिगरेट पीना मुख्य वजह माना जाता है और करीब 85 से 90 फीसदी मामले इससे जुड़े होते हैं। यह बीमारी पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती है। दुखद बात यह है कि ज्यादातर मरीज बीमारी के काफी आगे बढ़ जाने पर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जिससे करीब 80 से 85 फीसदी मामले लाइलाज अवस्था में होते हैं। फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर काफी ज्यादा है क्योंकि अधिकतर मामलों का पता देर से चलता है। फेफड़ों के कैंसर से हर साल लगभग 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है।फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों को समय पर जानना जरूरी फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर काफी ज्यादा है क्योंकि अधिकतर मामलों का पता देर से चलता है। भात में लोगों को इसका रिस्क भी ज्यादा है इसलिए लक्षण हों या हों आपको समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए। फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती और आमतौर पर नजरअंदाज किए जाने वाले लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है। हम आपको कुछ संकेत और लक्षण बता रहे हैं जिन्हें आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।लगातार खांसी होना अक्सर लोग मौसम बदलने या हल्की एलर्जी समझकर लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। अगर खांसी कई हफ्तों तक बनी रहे, ज्यादा तेज या खुरदरी हो जाए और गले में दर्द के साथ हो, तो यह फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में खांसी के साथ खून या जंग जैसे रंग का बलगम भी आ सकता है।सीने में दर्द या बेचैनी सीने में दर्द को सिर्फ हार्ट अटैक से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर में भी सीने में दर्द हो सकता है, जो गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर बढ़ जाता है। यह दर्द हल्का, तेज या लगातार बना रह सकता है और कभी-कभी कंधों या पीठ तक भी फैल सकता है। इस तरह के दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।सांस फूलना बिना किसी खास वजह के सांस लेने में दिक्कत होना भी एक गंभीर संकेत है। रोजमर्रा के काम जैसे थोड़ा चलना या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना इस बात का इशारा हो सकता है कि फेफड़ों में ट्यूमर हवा के रास्ते को रोक रहा है या फेफड़ों के आसपास तरल जमा हो गया है।बिना वजह वजन कम होना अगर बिना डाइट या एक्सरसाइज बदले अचानक वजन कम होने लगे, तो यह भी फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है। कैंसर से जूझ रहे लोगों में अक्सर भूख कम लगती है, जिसके कारण तेजी से वजन घटता है और साथ में लगातार थकान भी महसूस होती है।बार-बार फेफड़ों में इंफेक्शन अगर बार-बार ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसके पीछे फेफड़ों की कोई गंभीर बीमारी हो सकती है। फेफड़ों में मौजूद ट्यूमर इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है या हवा के रास्ते को ब्लॉक कर सकता है, जिससे इंफेक्शन जल्दी होते हैं और ठीक होने में भी समय लगता है।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।.
भारत में फेफड़ों का कैंसर तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। ICMR के डेटा के अनुसार, भारत में फेफड़ों के कैंसर के मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2015 में जहां इसके लगभग 63708 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक इनके बढ़कर करीब 81219 होने का अनुमान है। फेफड़ों के कैंसर के कारण क्या हैं? मामलों में इस तेजी से बढ़ोतरी के बड़ी वजह स्मोकिंग है क्योंकि भारत में इस समय लगभग 10 करोड़ वयस्क स्मोकर हैं, साथ ही बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण भी एक बड़ी वजह है। सिगरेट पीना मुख्य वजह माना जाता है और करीब 85 से 90 फीसदी मामले इससे जुड़े होते हैं। यह बीमारी पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती है। दुखद बात यह है कि ज्यादातर मरीज बीमारी के काफी आगे बढ़ जाने पर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जिससे करीब 80 से 85 फीसदी मामले लाइलाज अवस्था में होते हैं। फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर काफी ज्यादा है क्योंकि अधिकतर मामलों का पता देर से चलता है। फेफड़ों के कैंसर से हर साल लगभग 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है।फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों को समय पर जानना जरूरी फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर काफी ज्यादा है क्योंकि अधिकतर मामलों का पता देर से चलता है। भात में लोगों को इसका रिस्क भी ज्यादा है इसलिए लक्षण हों या हों आपको समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए। फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती और आमतौर पर नजरअंदाज किए जाने वाले लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है। हम आपको कुछ संकेत और लक्षण बता रहे हैं जिन्हें आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।लगातार खांसी होना अक्सर लोग मौसम बदलने या हल्की एलर्जी समझकर लंबे समय तक रहने वाली खांसी को नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। अगर खांसी कई हफ्तों तक बनी रहे, ज्यादा तेज या खुरदरी हो जाए और गले में दर्द के साथ हो, तो यह फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में खांसी के साथ खून या जंग जैसे रंग का बलगम भी आ सकता है।सीने में दर्द या बेचैनी सीने में दर्द को सिर्फ हार्ट अटैक से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। फेफड़ों के कैंसर में भी सीने में दर्द हो सकता है, जो गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर बढ़ जाता है। यह दर्द हल्का, तेज या लगातार बना रह सकता है और कभी-कभी कंधों या पीठ तक भी फैल सकता है। इस तरह के दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।सांस फूलना बिना किसी खास वजह के सांस लेने में दिक्कत होना भी एक गंभीर संकेत है। रोजमर्रा के काम जैसे थोड़ा चलना या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना इस बात का इशारा हो सकता है कि फेफड़ों में ट्यूमर हवा के रास्ते को रोक रहा है या फेफड़ों के आसपास तरल जमा हो गया है।बिना वजह वजन कम होना अगर बिना डाइट या एक्सरसाइज बदले अचानक वजन कम होने लगे, तो यह भी फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है। कैंसर से जूझ रहे लोगों में अक्सर भूख कम लगती है, जिसके कारण तेजी से वजन घटता है और साथ में लगातार थकान भी महसूस होती है।बार-बार फेफड़ों में इंफेक्शन अगर बार-बार ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसके पीछे फेफड़ों की कोई गंभीर बीमारी हो सकती है। फेफड़ों में मौजूद ट्यूमर इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है या हवा के रास्ते को ब्लॉक कर सकता है, जिससे इंफेक्शन जल्दी होते हैं और ठीक होने में भी समय लगता है।डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।
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