Friday, January 23, 2026
Economy & Markets
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ईयू का बड़ा कदम: ZTE और हुआवे को बाहर करेगा यूरोप

Navbharat Times
January 21, 20261 day ago
चीन के साथ जो अमेरिका ने किया, वही करने वाला है यूरोप…ZTE और हुवावे की छुट्टी करने का प्‍लान

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यूरोपीय संघ (ईयू) अपने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से चीनी निर्मित उपकरणों को हटाने की योजना बना रहा है। इस कदम से हुआवेई और जेडटीई जैसी कंपनियां ईयू के दूरसंचार नेटवर्क, सौर ऊर्जा प्रणाली और सुरक्षा स्कैनर में उपकरण नहीं बेच पाएंगी। डेटा चोरी की चिंताओं के कारण यह फैसला लिया जा रहा है, जो अमेरिका द्वारा इसी तरह के प्रतिबंधों के अनुरूप है। इस निर्णय से दूरसंचार क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा और 6G लॉन्चिंग में देरी हो सकती है।

चीन के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। यूरोपीय संघ (EU) चीन में बने उपकरणों को अपने जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से बाहर निकालने की योजना बना रहा है। इसका मतलब है कि EU, चीन के उपकरणों का इस्तेमाल करना बंद करने पर विचार कर रहा है। अगर यह प्रस्ताव मान लिया गया, तो Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियां ईयू के टेलीकॉम नेटवर्क, सौर ऊर्जा सिस्टम और सुरक्षा स्कैनर में अपने बनाए हुए उपकरण नहीं बेच पाएंगी। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। EU के इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर पर भारी असर देखने को मिल सकता है। 6G लॉन्चिंग में भी देरी हो सकती है। साथ ही, कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। आइये, पूरी खबर जानते हैं। डेटा चोरी की चिंता में लिया फैसला यूरोपीय संघ अपनी सुरक्षा और टेक्नोलॉजी नीति को नया रूप दे रहा है। ऐसे में यह बदलाव चीनी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। EU, अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों और चीन के हाई रिस्क वाले सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ऐसा कदम उठा सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ईयू अधिकारियों को चिंता है कि चीन के ये सप्लायर्स यूरोपीय नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर से संवेदनशील डेटा चुरा सकते हैं। अमेरिका ने पहले ही हुआवेई और जेडटीई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था और सरकारी नेटवर्क में उनके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। अब यूरोप भी चीनी टेक्नोलॉजी कंपनियों को अपने जरूरी सिस्टम से बाहर निकालने की तरफ बढ़ रहा है। हाई रिस्क विक्रेताओं को रखना होगा बाहर रिपोर्ट्स की मानें तो ईयू का यह साइबर सुरक्षा प्रस्ताव जल्द ही पेश किया जाएगा। इसका मतलब है कि ईयू देशों को अपने नेटवर्क से हाई रिस्क वाले विक्रेताओं को बाहर रखना होगा। पहले भी ऐसी सिफारिशें की गई थीं, लेकिन उन्हें ठीक से नहीं माना गया। कई यूरोपीय देश अभी भी ऐसे हाई रिस्क वाले सप्लायर्स पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए, पिछले साल स्पेन ने हुआवेई के साथ 12 मिलियन यूरो का एक बोंड किया था। इसके तहत हुआवेई कानून प्रवर्तन और खुफिया सेवाओं द्वारा मंजूर किए गए वायरटैप (बातचीत की रिकॉर्डिंग) को स्टोर करने के लिए हार्डवेयर देगा। चीन की भागीदारी को करना चाहता है कम बता दें कि यह प्रस्ताव ईयू के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत वह यूरोपीय उद्योगों में चीन की भागीदारी को कम करना चाहता है। यूरोपीय आयोग पहले ही ट्रेन निर्माता और पवन टरबाइन बनाने वाली कंपनियों की जांच कर चुका है। 2024 में, उसने सुरक्षा उपकरण कंपनी Nuctech के यूरोपीय दफ्तरों पर छापा भी मारा था। कब बाहर हो जाएंगे चीनी सप्लायर? अधिकारियों ने बताया कि उपकरणों को कब तक बाहर किया जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उस सप्लायर से ईयू को कितना जोखिम है और वह किस खास सेक्टर में काम कर रहा है। प्रस्तावित समय-सीमा में लागत के साथ-साथ वैकल्पिक सप्लायर्स की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाएगा। उदाहरण के लिए, ईयू में लगने वाले 90% से ज्यादा सोलर पैनल चीन में बनते हैं। 6G लॉन्चिंग में हो सकती है देरी हालांकि, टेलीकॉम ऑपरेटरों ने सीधे बैन लगाने से उपभोक्ता कीमतों पर पड़ने वाले असर के बारे में चेतावनी दी है। साथ ही, आगे आने वाले समय में 6G भी लॉन्च होना है और ऐसे में टेलीकॉम सेक्टर से चीनी उपकरण को हटा देना एक बड़ा फैसला है। इससे लॉन्चिंग में देरी भी हो सकती है। कुछ देश कर सकते हैं विरोध जब आयोग अपना प्रस्ताव पेश करेगा, तो इस मसौदा कानून पर यूरोपीय संसद और ईयू सदस्य देशों के बीच बातचीत होगी। चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी सदस्य देशों की होती है, इसलिए प्रस्तावित समय-सीमाओं का कुछ यूरोपीय देशों द्वारा विरोध भी मिल सकता है। अमेरिका पहले ही ले चुका ये फैसला ऐसा फैसला पहली बार नहीं लिया जाएगा। इससे पहले साल 2022 में अमेरिका ने भी ऐसा ही कदम उठाया था। अमेरिकी की फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने हुआवेई, जेडटीई और अन्य चीनी कंपनियों के टेलीकॉम और वीडियो निगरानी उपकरणों की बिक्री और आयात पर रोक लगा दी थी। अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए यह बैन लगाया था। लेखक के बारे मेंमोना दीक्षितमोना दीक्षित, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। यह पिछले 8 साल से पत्रकार‍िता के क्षेत्र में हैं। इन्‍होंने न्‍यूजबाइट्स और जी मीड‍िया की प्रमुख टेक्‍नोलॉजी वेबसाइट टेक्‍लूसिव में लंबे समय तक काम क‍िया है। टेक जर्नल‍िस्‍ट के तौर पर मोना को गैजेट्स न्‍यूज, टेक टिप्‍स एंड ट्रिक्‍स, एआई न्‍यूज, गैजेट रिव्‍यूज ल‍िखने का अच्‍छा अनुभव है। यह टेलिकॉम सेक्‍टर और ऐप्‍स की दुनिया में हो रहे बदलावों पर भी नजर रखती हैं। टेक के क्षेत्र में हो रहीं नई रिसर्च, गवर्नमेंट पॉलिसी पर पाठकों को आसान भाषा में न्‍यूज समझाती हैं। मोना ने बैचलर ऑफ साइंस के बाद मास्टर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री नोएडा के IMS कॉलेज से ली है।... और पढ़ें

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