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एक ही सीन 4 फिल्मों में: जानिए कौन सी बनीं ब्लॉकबस्टर और कौन हुई फ्लॉप
Zee News
January 18, 2026•4 days ago
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चार फिल्मों में कुंभ मेले के बिछड़ने के एक ही सीन को अलग-अलग ढंग से दिखाया गया। 1943 की 'किस्मत' और 1975 की 'त्रिशूल' ब्लॉकबस्टर रहीं, जबकि 1954 की 'नया दौर' औसत और 1991 की 'कुंभ' फ्लॉप हुई। यह सीन फिल्मों में भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक बना।
महबूब खान के निर्देशन में बनी फिल्म साल 1943 में रिलीज हुई थी. जिसमें नरगिस, मोतीलाल, चंद्रमोहन, चार्ली जैसे सितारे थे. हल्की-फुल्की कॉमेडी मेले के इर्द-गिर्द घूमती है. कहानी में दो परिवारों के बच्चे पप्पू और श्यामा मेले की भीड़ में खो जाते हैं. बाद में वे बड़े होकर मिलते हैं और उनकी असली पहचान सामने आती है. मेले का सीन फिल्म की शुरुआत में है, जहां बच्चों के बिछड़ने की घटना होती है. यह 'कुंभ में बिछड़े'वाली थीम की शुरुआत मानी जाती है.ये हिट हुई थी.
एसएम यूसुफ के निर्देशन में बनी फिल्म साल 1954 में आई थी. ये फिल्म एवरेज निकली थी. फिल्म में उषा किरण, किशोर कुमार जैसे सितारे थे. कुंभ मेले को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया. मुख्य किरदार रघुनाथ परिवार, कर्तव्य और न्याय के बीच संघर्ष करता है, जिसमें मेले का बैकग्राउंड उसकी आंतरिक लड़ाई को गहराई देता है. मेले के सीन भावुक और आध्यात्मिक हैं.
तुकाराम काटे के निर्देशन में बनी ये फिल्म साल 1991 में रिलीज हुई थी. कहानी कुंभ मेले की परेशानियों और भावनाओं से जुड़ी है. फिल्म में एक्शन, इमोशन और ट्विस्ट हैं, जहां मेले में भाग्य और दैवीय कृपा दिखाया गया है. मेले के दृश्यों से कहानी आगे बढ़ती है.हालांकि ये मूवी फ्लॉप हुई.
1975 में आई फिल्म है, जिसमें फिरोज खान, हेमा मालिनी और रेखा अहम रोल में हैं. फिल्म में कुंभ मेले का एक यादगार सीन है, जहां हेमा मालिनी और उनके परिवार का बिछड़ना दिखाया गया है. उस सीन में 'यह मेला तो बस नाम है, यहां हर कोई अपनी किस्मत का सौदा करने आया है', जैसा डायलॉग है. मेले की भीड़ और आस्था को खूबसूरती से दिखाया गया है.ये ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. (इनपुट-एजेंसी)
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