Geopolitics
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डियागो गार्सिया पर अमेरिकी 'परमाणु किले' का बवाल: क्या है पूरा मामला?
Navbharat Times
January 20, 2026•2 days ago
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डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की यूके की योजना की आलोचना की है, इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। यह द्वीप हिंद महासागर में एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डा है। भारत ने मॉरीशस की संप्रभुता का समर्थन किया है और अमेरिकी बेस की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु यूके-मॉरीशस समझौते में भूमिका निभाई।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आज के दिन की शुरूआत भी कुछ नई नौटंकियों के साथ हुई है। आज डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया नक्शा जारी किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिकी हिस्से के रूप में दिखाया गया है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने आज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएलन मैक्रों से हुई निजी बातचीत को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्क्रीनशॉट को सार्वजनिक कर दिया, जो ना सिर्फ निजता का उल्लंघन है, बल्कि डिप्लोमेसी की मर्यादा को भी तार तार करने जैसा है। इनके अलावा आज डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया को लेकर ब्रिटेन को आड़े हाथों लिया है। ये एक ऐसा आइलैंड है, जहां एक अहम अमेरिकी मिलिट्री बेस है। उन्होंने इस द्वीप की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाने के लिए UK की आलोचना की है। इस फैसले का हवाला देते हुए ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मकसद से ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपने इरादे को सही ठहराया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ने मंगलवार सुबह ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि "हैरानी की बात है कि हमारा 'शानदार' नाटो सहयोगी, यूनाइटेड किंगडम, अभी डिएगो गार्सिया द्वीप, जो एक महत्वपूर्ण अमेरिकी मिलिट्री बेस की जगह है, उसे मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है और ऐसा बिना किसी वजह के किया जा रहा है।" उन्होंने आगे लिखा कि "इसमें कोई शक नहीं कि चीन और रूस ने कमजोरी के इस काम को नोटिस किया है।"
डिएगो गार्सिया आईलैंड कहां है?
आपको बता दें कि डिएगो गार्सिया, हिंद महासागर में मौजूद एक द्वीप है। ये पूर्वी अफ्रीका के तट से करीब 3,200 किलोमीटर दूर है। यहां कई दशकों से अमेरिका और ब्रिटेन का मिलिट्री बेस है, जिससे इन देशों को मिडिल ईस्ट से एशिया तक मिशन चलाने में आसानी होती है। ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इन द्वीपों को मॉरीशस को वापस सौंपने और मिलिट्री बेस को लीज पर वापस लेने के लिए एक डील की थी। पिछले साल ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह इस डील का समर्थन करते हैं, लेकिन अब वो पलट गये हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे कहा कि "UK का इतनी जरूरी जमीन देना बहुत बड़ी बेवकूफी है और यह नेशनल सिक्योरिटी के उन कई कारणों में से एक है, जिनकी वजह से ग्रीनलैंड को हासिल करना जरूरी है।" उन्होंने अपनी बात को एक बार फिर से दोहराते हुए कहा कि "डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों को सही काम करना चाहिए।" आपको बता दें कि रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने चिंता जताई है कि डिएगो गार्सिया की योजनाओं से चीन वहां अमेरिकी गतिविधियों पर जासूसी कर सकता है। ट्रंप का ये बयान उस वक्त आया है, जब यह डर बढ़ रहा है कि चीनी हिंद महासागर में अपनी आर्थिक और सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।भारत का डिएगो गार्सिया से क्या रिश्ता है?
हिंद महासागर में स्थित होने की वजह से भारत के लिए डिएगो गार्सिया महत्वपूर्ण रहा है। ये भारत के दक्षिणी तट से सिर्फ 1800 किलोमीटर दूर है। डिएगो गार्सिया, चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है। भारत ने UK और मॉरीशस के बीच चागोस संधि (22 मई 2025 को साइन हुई) पर औपचारिक हस्ताक्षर का स्वागत किया था। भारत ने लगातार चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के दावे का समर्थन किया है इसे क्षेत्रीय अखंडता का मामला माना है। यूके ने 99 सालों के लिए डिएगो गार्सिया पर कंट्रोल बनाए रखा है ताकि अमेरिकी मिलिट्री बेस का ऑपरेशन लगातार चलता रहे। ये एक तरह से लीज है, जिसपर पिछले साल मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच सहमति बनी थी। भारत ने इस समझौते को कराने में एक अहम भूमिका निभाई थी। जिससे यह पक्का हो सके कि मॉरीशस को संप्रभुता वापस मिलने के बाद भी अमेरिकी बेस चालू रहे।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद, नवभारत टाइम्स में इंटरनेशनल अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं। जियो-पॉलिटिक्स और डिफेंस पर लिखते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 सालों का अनुभव है। अपने कैरियर की शुरूआती दिनों में उन्होंने क्राइम बीट में काम किया और ग्राउंड रिपोर्टिंग की। उन्होंने दो लोकसभा चुनाव को कवर किया है। इसके बाद वो इंटरनेशनल अफेयर्स की तरफ आ गये, जहां उन्होंने अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के साथ साथ कई देशों के इलेक्शन और वहां की राजनीति को कवर किया है। डिफेंस सेक्टर, हथियारों की खरीद बिक्री और अलग अलग देशों के बीच होने वाले संघर्ष पर लगातार लिखते रहते हैं। वो ज़ी मीडिया समेत कई प्रतिष्ठित संस्थान में काम कर चुके हैं। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन पर वो डिफेंस और जियो-पॉलिटिक्स के एक्सपर्ट्स, डिप्लोमेट्स और सैन्य अधिकारियों से बात करते रहते हैं। इस समय वो 'बॉर्डर-डिफेंस' नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू भी करते हैं, जो डिफेंस पर आधारित है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई है।... और पढ़ें
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