Friday, January 23, 2026
Economy & Markets
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भारत की कोर सेक्टर ग्रोथ में 3.7% की तेजी: अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकेत

Navbharat Times
January 20, 20262 days ago
India Core Sector Growth: चार महीने में सबसे ज्‍यादा, भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए कहां से आया ये टॉनिक, कितना बड़ा संकेत?

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दिसंबर 2025 में भारत के कोर सेक्टर ग्रोथ में 3.7% की वृद्धि दर्ज की गई, जो चार महीने का उच्च स्तर है। यह वृद्धि मुख्य रूप से स्टील और सीमेंट उत्पादन में आई तेजी से हुई, जो बुनियादी ढांचे के विकास में मजबूती का संकेत देती है। हालांकि, तेल और गैस क्षेत्रों में कमजोरी बनी हुई है।

नई दिल्‍ली: भारत की अर्थव्‍यवस्था के ल‍िए अच्‍छी खबर है। देश के कोर सेक्‍टर ग्रोथ में तेजी आई है। आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्र में दिसंबर 2025 में 3.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2025 के 2.1 फीसदी के मुकाबले यह काफी अच्छी है। हालांकि, पिछले साल दिसंबर की 5.1 फीसदी ग्रोथ से कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से स्टील और सीमेंट उत्पादन में आई तेजी के कारण हुई है। इससे साल 2025 के आखिरी महीने में कोर इंडस्ट्रियल आउटपुट चार महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (ICI) में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। इसने दिसंबर 2025 में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.7 फीसदी (अस्थायी) की बढ़ोतरी दिखाई है। इस महीने में कोयला, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे पांच क्षेत्रों ने सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की। ये आठ प्रमुख उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 40.27 फीसदी का वेटेज रखते हैं। ऐसे में यह डेटा व्यापक औद्योगिक रफ्तार का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। कुल मिलाकर, अप्रैल-दिसंबर 2025-26 की अवधि में प्रमुख क्षेत्र का उत्पादन 2.6 फीसदी बढ़ा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कम है। यह मुख्य रूप से तेल और गैस से जुड़े क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण हुआ है। सीमेंट और स्टील ने कराई दिसंबर में वापसी अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो दिसंबर में सीमेंट उत्पादन में 13.5 फीसदी की शानदार ग्रोथ हुई, जबकि स्टील उत्पादन 6.9 फीसदी बढ़ा। इससे कंस्‍ट्रक्‍शन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी मांग में मजबूती का पता चलता है। बिजली उत्पादन में 5.3 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं, उर्वरक उत्पादन में महीने के दौरान 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कोयला उत्पादन दिसंबर में 3.6 फीसदी बढ़ा। हालांकि, अप्रैल-दिसंबर की अवधि के लिए इसका कुल उत्पादन पिछले साल की तुलना में 0.7 फीसदी कम रहा। कोयला 10.33% +3.6% -0.7% कच्चा तेल 8.98% -5.6% -1.9% प्राकृतिक गैस 6.88% -4.4% -3.2% रिफाइनरी उत्पाद 28.04% -1.0% +0.1% उर्वरक 2.63% +4.1% +1.7% स्‍टील 17.92% +6.9% +9.5% सिमेंट 5.37% +13.5% +8.8% बिजली 19.85% +5.3% +0.3% तेल और गैस बने बाधा मुख्य बढ़ोतरी में सुधार को हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) की लगातार कमजोरी ने आंशिक रूप से कम कर दिया। दिसंबर में कच्चे तेल का उत्पादन साल-दर-साल 5.6 फीसदी घट गया, जबकि प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.4 फीसदी गिर गया। रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन भी इस महीने एक फीसदी कम हुआ। अप्रैल-दिसंबर 2025-26 की अवधि में कच्चे तेल का उत्पादन कुल मिलाकर 1.9 फीसदी और प्राकृतिक गैस का उत्पादन 3.2 फीसदी सिकुड़ गया। यह घरेलू उत्पादन में संरचनात्मक चुनौतियों को उजागर करता है। हालांकि, रिफाइनरी उत्पादन इस अवधि में मोटे तौर पर स्थिर रहा। इसमें 0.1 फीसदी की कुल बढ़ोतरी हुई। सरकार ने नवंबर 2025 के लिए अंतिम कोर सेक्‍टर ग्रोथ को भी संशोधित कर 2.1 फीसदी कर दिया है। इससे दिसंबर में देखी गई क्रमिक सुधार की पुष्टि होती है, भले ही साल-दर-साल की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई हो। क्‍या संकेत दे रहा डेटा? यह डेटा बताता है कि भारत का औद्योगिक क्षेत्र धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है। लेकिन, तेल और गैस जैसे कुछ प्रमुख क्षेत्रों को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमेंट और स्टील जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन, बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी का संकेत देता है जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लाअमित शुक्‍ला, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं। वह 18 साल से भी ज्‍यादा समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार, शेयर मार्केट, राजनीति, देश-विदेश, प्रॉपर्टी, करियर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। पत्रकारिता और जनसंचार में PhD करने वाले अमित शुक्ला 7 साल से भी ज्‍यादा समय से टाइम्‍स इंटरनेट लिमिटेड के साथ जुड़े हैं। टाइम्‍स इंटरनेट में रहते हुए नवभारतटाइम्‍स डॉट कॉम से पहले इकनॉमिकटाइम्‍स डॉट कॉम में सेवाएं दीं। उन्‍होंने टीवी टुडे नेटवर्क, दैनिक जागरण, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं। लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया।... और पढ़ें

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