Friday, January 23, 2026
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क्या चांदी में आएगी 1 लाख की बड़ी गिरावट? 1980 के दशक जैसा बन सकता है हाल

TV9 Bharatvarsh
January 20, 20262 days ago
Explained: क्या 1980 जैसा होगा चांदी का हाल, आने वाली है 1 लाख रुपए की बड़ी गिरावट!

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जानकारों के अनुसार, चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद बड़ी गिरावट की आशंका है। टैरिफ में कमी, डॉलर इंडेक्स में रिकवरी, निवेशकों का रुझान अन्य धातुओं की ओर और मुनाफावसूली जैसे कारण कीमतों को नीचे ला सकते हैं। चांदी 1 लाख रुपये तक या 30% तक सस्ती हो सकती है, जो 1980 के दशक जैसी बड़ी गिरावट का संकेत दे रहा है।

भले ही देश के वायदा बाजार से लेकर दिल्ली सर्राफा बाजार तक चांदी की कीमतें रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही हो, लेकिन आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. जानकारों की मानें तो चांदी की कीमतों का इंटरनेशनल टारगेट 100 डॉलर और देश के वायदा बाजार का टारगेट 3.25 लाख रुपए है. अगर दोनों जगहों पर चांदी टारगेट लेवल पर पहुंचती हैं तो कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. एक्सपर्ट के अनुसार मौजूदा समय में चांदी काफी ओवरवैल्यूड हो चुकी है. उसका कारण है टैरिफ टेंशन. हाल ही में ट्रंप की ओर से यूरोपीय देशों पर ग्रीनलैंड टैरिफ लगाया है. लेकिन आने वाले दिनों में ट्रंप पर टैरिफ हटाने का दबाव बढ़ सकता है. वहीं दूसरी ओर डॉलर इंडेक्स में रिकवरी भी एक बड़े फैक्टर के रूप में काम कर सकती है और चांदी की कीमतों को नीचे लेकर आ सकती है. मेटल्स रिप्लेसमेंट थ्योरी जिसके तहत निवेशकों का रुझान चांदी के बजाय दूसरे मेटल्स जैसे कॉपर और एल्यूमीनियम की ओर देखने को मिल सकता है. जिसकी वजह से डिमांड कम होने के साथ कीमतों में भी कमी आ जाएगी. गोल्ड सिल्वर रेश्यो भी बड़ा फैक्टर काम कर सकता है. जो मौजूदा समय में 14 साल के लोअर लेवल पर है. इसके ऊपर उठने का अनुमान लगाया जा रहा है. निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली भी चांदी की कीमतों को धराशाई करने में एक बड़े फैक्टर के रूप में देखी जा रही है. खास बात तो ये है कि बीते एक महीने में चांदी की कीमतों में 54 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. 17 दिसंबर को चांदी के दाम पहली बार 2 लाख रुपए पर बंद हुए थे. जबकि 19 जनवरी को चांदी के दाम पहली बार 3 लाख रुपए के लेवल पर पहुंचे. इसका मतलब है कि एक महीने में चांदी की कीमतों में एक लाख रुपए से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल चुका है. जानकारों का कहना है कि चांदी के दाम पीक से 30 फीसदी तक नीचे यानी 1 लाख रुपए या उससे ज्यादा नीचे आ सकते हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में निवेशकों के बीच इतनी महंगी चांदी आकर्षण का केंद्र बनी रहेगी या नहीं. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं… पहले टारगेट को समझें जानकारों की मानें तो इंटरनेशनल मार्केट से लेकर देश के लोकल वायदा बाजार तक चांदी का एक टारगेट सेट किया गया है. पहले इंटरनेशनल मार्केट की बात करें तो चांदी की कीमतों का टारगेट 100 डॉलर प्रति ओंस है. जोकि मौजूदा समय में करीब 93 डॉलर प्रति ओंस पर देखने को मिल रहा है. इसका मतलब है कि चांदी के दाम को 100 डॉलर प्रति ओंस पर पहुंचने के लिए 7 डॉलर प्रति ओंस की जरुरत है. वहीं दूसरी ओर देश के वायदा बाजार में चांदी की कीमतों का टारगेट 3.25 से 3.30 के लेवल का लेवल रखा हुआ है. मौजूदा समय में एमसीएक्स पर चांदी के दाम 3.20 से नीचे देखने को मिल रहे हैं. ऐसे में 3.30 तक पहुंचने के लिए चांदी को 10 हजार रुपए से ज्यादा की जरुरत है. इस लेवल के चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है. कौन से हो सकते हैं गिरावट के कारण? टैरिफ में संभावित कमी: मौजूदा समय में चांदी और सोने की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण ट्रंप का टैरिफ है. जिसकी वजह से निवेशकों को सेफ हैवन की ओर रुख करना पड़ रहा है. जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में टैरिफ पर राहत देखने को मिल सकती है. यूरोप और मीडिल ईस्ट के देशों पर टैरिफ लगाने का मतलब अमेरिका का खुद का नुकसान है. हाल ही में ट्रंप ने ग्रीनलैंड टैरिफ का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी से लागू होगा. उसके बाद जून से 10 फीसदी का टैरिफ बढ़कर 25 फीसदी हो जाएगा. एक्सपर्ट का अनुमान है कि 1 फरवरी से पहले ये टैरिफ वापस हो सकता है. डॉलर इंडेक्स में रिकवरी: वहीं दूसरी ओर डॉलर इंडेक्स में काफी अच्छी रिकवरी देखने को मिली है. बीते एक महीने में डॉलर इंडेक्स में 1 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. सोमवार को डॉलर इंडेक्स 99 के लेवल पर था, जो मंगलवार को सुबह कम होकर 98 के लेवल पर आ गया है. लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर इंडेक्स में और इजाफा देखने को मिल सकता है. जिससे चांदी की कीमतें नीचे की ओर आ सकती है. निवेशकों की रिप्लेसमेंट थ्योरी: सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड लेवल पर है. जानकारों का कहना है कि चांदी के दाम इतनी हाई हो चुकी है कि अब इस लेवल पर रिटर्न पर काफी सीमित हो सकता है. ऐसे में अब निवेशक रिप्लेसमेंट थ्योरी को अपनाते हुए दूसरे मेटल्स की ओर से ध्यान लगा रहे हैं. जानकारों की मानें तो कॉपर निवेशकों का अब अगला टारगेट हो सकता है. बीते कुछ महीनों में कॉपर ने निवेशकों को काफी अच्छा रिटर्न दिया है. वैल्यू कम हो से कॉपर मौजूदा साल में हॉट केक हो सकता है. गोल्ड सिल्वर रेश्यो: मौजूदा समय में गोल्ड और सिल्वर रेश्यो 50 के लेवल पर बना हुआ है. जोकि 14 बरस का लोअर लेवल है. इसका मतलब है कि चांदी की डिमांड काफी हाई बनी हुई है. जिसकी वज​ह से लगातार निवेश भी हो रहा है. लेकिन यहां से इसके ऊपर उठने के चांस बने हुए हैं. उसका कारण चांदी की कीमतें हैं. जोकि इतनी बढ़ चुकी है कि यहां से निवेश पर रिटर्न की संभावनाएं काफी कम है. फेड रेट कट डिस्काउंट: महंगाई और रोजगार के आंकड़ों के बाद चांस बने हुए हैं कि इस बार फेड रेट कट हो सकता है. फेड की मीटिंग जनवरी के आखिरी वीक में होनी है, जो कि मेटल्स को सपोर्ट करता है. इस पर जानकारों मानना है कि फेड रेट कट अब डिस्काउंट हो चुका है. अब इसका असर सोने और चांदी की कीमतों में देखने को नहीं मिलेगा. उससे ज्यादा अहम फेड हेड की कॉमेंट्री होगी, जिससे ये अनुमान होगा कि साल के बाकी महीनों में रेट कट होगा या नहीं. मई में फेड हेड पॉवेल का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में जनवरी के कट के बाद मई तक कोई रेट कट की संभावना नहीं दिखाई दे रही है. एक लाख रुपए तक की गिरावट इन तमाम कारणों की वजह से चांदी की कीमतों में 30 फीसदी या उससे ज्यादा की गिरावट देखने को मिल सकती है. इसका मतलब है कि अगर चांदी के दाम 3.30 तक भी पहुंचते हैं तो वहां से चांदी के दाम में एक लाख रुपए तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. इसका मतलब है कि चांदी की कीमतें 2.30 के लेवल पर देखने को मिल सकती है. इस बारे में केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि अब चांदी में रिटर्न की गुंजाइश काफी सीमित हो गई है. 3 लाख रुपए से ज्यादा की चांदी में निवेश करके आप भविष्य में ज्यादा रिटर्न नहीं कमा सकते हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में चांदी की डिमांड काफी कम हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि अब सोलर पैनल, ईवी और दूसरे इलेक्ट्रोनिक्स गुड्स में चांदी का रिप्लेसमेंट खोज रहे हैं. इतनी महंगी चांदी का इस्तेमाल कोई क्यों करेगा, जब मेकर्स के पास दूसरे सस्ते ऑप्शन होंगे. महंगी चांदी का इस्तेमाल प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा भी कर सकता है. ऐसे में मेकर्स भी इतना बड़ा रिस्क नहीं लेंगे. 1980 जैसा हो सकता है हाल? ऐसा नहीं है कि चांदी की कीमतों में पहले कभी इतनी बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है. हिस्टोरिकली डाटा को देखें तो 1980 में जब चांदी की कीमतें 50 डॉलर के साथ पीक पर पहुंची थी, तब उसके दो महीने में इसमें 70 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली थी. जिसे एक बड़ा फॉल माना गया था. 2011 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. जब चांदी के दाम 50 डॉलर प्रति ओंस पर देखने को मिले थे, तब अगले 5 महीनों में चांदी की कीमतों में 32 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी थी. केडिया कहते हैं कि इस बार भी ऐसा हो सकता है. जबकि चांदी की कीमतें 3.25 या 3.30 के लेवल पर देखने को मिलेंगी. उसके बाद इसमें एक बड़ा फॉल देखने को मिल सकता है. कितने हैं मौजूदा दाम? मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल चुका है. कारोबारी सत्र के दौरान चांदी की कीमतें 9,674 रुपए की तेजी के साथ 3,19,949 रुपए पर आ गई जोकि अब तक लाइफ टाइम हाई है. वैसे सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर चांदी की कीमतें 7,489 रुपए के इजाफे के साथ 3,17,764 रुपए पर कारोबार कर रही थी. एक दिन पहले चांदी के दाम 3,10,275 रुपए पर बंद हुई थी. वैसे बीते एक महीने में चांदी की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा यानी 1 लाख रुपए से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है. वहीं जनवरी के महीने में ही चांदी के दाम में 84,248 रुपए का इजाफा देखने को मिल चुका है.

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    चांदी की कीमत: 1 लाख की गिरावट? जानें 1980 जैसा हाल