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चांदी का पूरा इतिहास: कहां मिलती है, भाव सोने से कम क्यों और अब क्यों छू रही आसमान?
Amar Ujala
January 21, 2026•1 day ago

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भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी देखी जा रही है। यह धातु एक महीने में ₹2 लाख से ₹3 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। मैक्सिको, पेरू और चीन प्रमुख उत्पादक हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, अक्षय ऊर्जा और चिकित्सा जैसे उद्योगों में इसकी भारी मांग है, जो आपूर्ति से अधिक है। भू-राजनीतिक संकट और पोर्टफोलियो बीमा के रूप में इसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है।
विस्तार
भारतीय सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक तेजी का दौर जारी है। एमसीएक्स पर सोना और चांदी लगातार नए रिकॉर्ड स्तरों को छू रहे हैं। बाजार के लिए सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा चांदी की चाल रही है। जिस चांदी को 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से दो लाख रुपये तक पहुंचने में 14 महीने का वक्त लगा था, उसने दो लाख से तीन लाख रुपये का सफर महज एक महीने में ही तय कर लिया है।
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अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार दिल्ली में चांदी फिर एक लंबी छलांग लगाते हुए 3.23 लाख प्रति किलोग्राम के भाव पर पहुंच गई है। यानी सोमवार के 3.20 लाख रुपये प्रति किग्रा के मुकाबले चांदी के दाम मंगलवार को करीब तीन हजार रुपये ज्यादा रहे।
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चांदी की इस रिकॉर्डतोड़ बढ़त के बीच यह जानना अहम है कि आखिर चांदी धातु क्या है? इसका इतिहास क्या है? यह इतनी अहमियत क्यों रखती है और इसकी कीमत सोने से कम क्यों है? इसकी बढ़ती कीमतों का इतिहास क्या है? हालिया दिनों में चांदी के भाव किस तेजी से बढ़े हैं और इसकी वजह क्या रही? आइये जानते हैं...
दुनिया में कहां-कहां चांदी का भंडार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया में चांदी के भंडार के मामले में अमेरिकी महाद्वीप सबसे समृद्ध माना जाता है। इसके उत्पादक देशों में शीर्ष में मैक्सिको, पेरू और चीन लगातार बने हुए हैं।
मैक्सिको: यहां दुनिया के सबसे समृद्ध चांदी के भंडार हैं। दुनिया की दस सबसे बड़ी चांदी की खानों में से चार अकेले मैक्सिको में स्थित हैं, जिनमें न्यूमॉन्ट की पेनासक्विटो खान प्रमुख है।
दक्षिण और उत्तरी अमेरिका: मेक्सिको के अलावा, पेरू और बोलीविया चांदी के महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में भी इसके बड़े भंडार पाए जाते हैं।
यूरोप: यूरोप में पोलैंड चांदी का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां दुनिया की तीन सबसे बड़ी चांदी की खदानें हैं, जिनमें केजीएचएम की तांबे की खान प्रमुख है, जो चांदी के उत्पादन में भी विश्व स्तर पर बड़ी भूमिका निभाती है।
अन्य क्षेत्र: ऑस्ट्रेलिया, चिली और रूस में भी चांदी के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं। इसके अलावा, पापुआ न्यू गिनी और कनाडा के समुद्रों में 'गहरे समुद्र के हाइड्रोथर्मल वेंट्स' में भी चांदी और अन्य धातुओं के भंडार पाए जाते हैं।
चांदी क्यों इतनी अहम, उद्योग में भारी मांग क्यों?
उद्योगों में चांदी की अत्यधिक मांग इसके जबरदस्त भौतिक और रासायनिक गुणों के कारण है। वैश्विक स्तर पर चांदी की कुल मांग का लगभग 50% से ज्यादा हिस्सा औद्योगिक इस्तेमाल से जुड़ा है।
बेहतरीन कंडक्टर (चालक): चांदी सभी धातुओं में सबसे उत्कृष्ट विद्युत और तापीय चालकता रखता है, जो तांबे और सोने से भी ज्यादा है। अपनी इस खासियत की वजह से यह इलेक्ट्रॉनिक्स, जैसे कि मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टीवी, स्विच और फ्यूज में अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाता है।
अक्षय ऊर्जा: वर्तमान में वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का चलन बढ़ रहा है। सोलर पैनल (फोटोवोल्टेइक सेल), पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के निर्माण में चांदी का भारी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा सोलर पैनल्स को इस धातु की बहुत अधिक मात्रा की जरूरत होती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक: एआई से जुड़े उद्योगों में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसका इस्तेमाल स्मार्ट ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा ट्रांसमिशन से जुड़े उपकरणों में किया जाता है। टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने भी कहा है कि चांदी कई औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए बेहद जरूरी है।
चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा: चांदी में एंटी-माइक्रोबियल (रोगाणुरोधी) गुण होते हैं। इसकी वजह से इसका प्रयोग घाव की ड्रेसिंग, पट्टियों, क्रीम और चिकित्सा उपकरणों (जैसे कैथेटर और ब्रीदिंग ट्यूब) में संक्रमण रोकने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, दंत चिकित्सा में अमैलगम फिलिंग के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है।
अन्य औद्योगिक प्रयोग: चांदी का इस्तेमाल ब्रेजिंग और सोल्डरिंग अलॉय (धातुओं को जोड़ने के लिए), रासायनिक उपकरणों और उत्प्रेरक (कैटालिस्ट) के तौर पर भी होता है। इसके परावर्तक (रिफ्लेक्टिव) गुणों के कारण इसका उपयोग शीशों और विशेष फोटोग्राफी और एक्स-रे में भी किया जाता है।
मांग ज्यादा होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि चांदी की आपूर्ति मांग के अनुपात में नहीं बढ़ रही है, क्योंकि यह मुख्य रूप से अन्य धातुओं (जैसे तांबा, सीसा और जस्ता) के खनन के दौरान एक सह-उत्पाद के तौर पर मिलती है। इन्हीं वजहों से अमेरिका ने हाल ही में चांदी को अपने महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में भी शामिल किया है।
जब इतनी महंगी है चांदी तो सोने से कम कीमत क्यों?
सोने की तुलना में चांदी की कीमतें कम होने के कई बड़े कारण हैं, इनमें चांदी की उपलब्धता, खनन लागत और ऐतिहासिक धारणाएं शामिल हैं। मौजूदा समय में सोना, चांदी की तुलना में लगभग 50 गुना ज्यादा कीमती है।
1. उपलब्धता और आपूर्ति में सोने से ज्यादा
सोने की तुलना में चांदी पृथ्वी पर बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध है। ऐतिहासिक रूप से अब तक लगभग 20 लाख टन से ज्यादा चांदी का खनन किया जा चुका है, जबकि सोने का खनन केवल दो लाख टन से कुछ ज्यादा ही हुआ है। यानी चांदी सोने से लगभग 10 गुना अधिक मात्रा में निकाली जा चुकी है। यह आंकड़े भी सिर्फ 2020 तक के हैं। यानी तबसे इन आंकड़ों में भी बदलाव आया है।
2. खनन और उत्पादन लागत
सोने का खनन करना ज्यादा जटिल और महंगी प्रक्रिया है, क्योंकि इसके भंडार गहरे और दुर्लभ होते हैं। इसके उलट चांदी अक्सर तांबा, जस्ता और सीसा (लेड) जैसी अन्य धातुओं के खनन के दौरान एक उप-उत्पाद यानी बाई-प्रोडक्ट के तौर पर मिलता है। इससे इसकी उत्पादन लागत कम हो जाती है और बाजार में इसकी आपूर्ति बनी रहती है।
3. औद्योगिक मांग बनाम आपूर्ति
उद्योगों (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल) में चांदी की भारी मांग है, लेकिन इनमें भी चांदी की बहुत कम मात्रा का उपयोग होता है। चांदी की व्यापक उपलब्धता के कारण इसकी आपूर्ति अभी भी औद्योगिक मांग से ज्यादा बनी हुई है, जो इसकी कीमत को सीमित रखती है।
4. रासायनिक गुण
सोना जंग-रोधी होता है और शुद्ध सोना कभी काला नहीं पड़ता, जो इसे पीढ़ियों तक निवेश के लिए आकर्षक बनाता है। इसके उलट, चांदी हवा में मौजूद सल्फर यौगिकों के संपर्क में आने पर काली पड़ जाती है और इसे चमक बनाए रखने के लिए रखरखाव की जरूरत होती है।
5. केंद्रीय बैंक और सरकारी भंडार
दुनियाभर के केंद्रीय बैंक अपने आधिकारिक भंडार में सोने को सुरक्षित संपत्ति के रूप में रखते हैं, लेकिन अधिकतर बैंकों ने अब चांदी को अपने भंडार से हटा दिया है। उदाहरण के लिए अमेरिका ने 1965 में सिक्कों से हटाने के बाद अपना अधिकांश चांदी का भंडार बेच दिया था। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में चांदी ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है और अलग-अलग देशों ने इसके भंडार को वापस जुटाना शुरू कर दिया है।
हालिया दिनों में किस तेजी से बढ़े हैं चांदी के दाम?
14 महीनों में कैसे बदली चांदी की कीमत
अक्तूबर 2024 में चांदी का भाव 1 लाख रुपये प्रति किलो था, जिसे 2 लाख रुपये (दिसंबर 2025) तक पहुंचने में 14 महीने लगे थे।
इसके उलट, दिसंबर 2025 से 19 जनवरी 2026 के बीच- मात्र एक महीने में- चांदी दो लाख से बढ़कर तीन लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गई।
पिछले दो कारोबारी सत्रों में ही चांदी की कीमतों में 32,187 रुपये (11.18%) का उछाल दर्ज किया गया है।
क्या है तेजी का प्रमुख कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी में इस विस्फोटक तेजी के पीछे कई मैक्रोइकोनॉमिक और भू-राजनीतिक कारक काम कर रहे हैं-
भू-राजनीतिक संकट: ईरान के साथ बढ़ता तनाव, वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य दबाव और ग्रीनलैंड पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद NATO से जुड़ी अनिश्चितताओं ने 'ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट' को नाजुक बना दिया है।
सप्लाई-डिमांड गैप: चांदी की औद्योगिक मांग (सोलर पावर, ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स) लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई में कमी देखी जा रही है।
पोर्टफोलियो इंश्योरेंस: स्मार्ट वेल्थ एआई के फाउंडर, पंकज सिंह का कहना है कि वैश्विक विकास दर की अनिश्चितता के बीच निवेशक बुलियन को 'मोमेंटम ट्रेड' के बजाय 'पोर्टफोलियो इंश्योरेंस' के तौर पर देख रहे हैं।
सुरक्षित निवेश का सबसे बेहतर विकल्प
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध और उच्च मुद्रास्फीति के डर से निवेशक सोने और चांदी को एक सुरक्षित ठिकाना मान कर इसमें निवेश बढ़ा रहे हैं। यह संपत्ति उनके पोर्टफोलियो को आर्थिक उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद करती है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। डॉलर और अन्य मुद्राओं में गिरावट के दौर में सोना-चांदी ज्यादा स्थिर रहे हैं।
खासतौर पर चांदी के मामले में, इसकी औद्योगिक स्तर पर मांग काफी ज्यादा है, जबकि उत्पादन और आपूर्ति सीमित है। इससे इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले और भी ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है।
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